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Mar 14

तन्हाई पर हिंदी कविता - तन्हाई

savita Posted by: savita in हिंदी कविता Print PDF

                       तन्हाई 

         जब थी मेरे पास आई 
ये नागिन सी तन्हाई .....
हाय ये नागिन सी तन्हाई 
डर था डस जाएगी  मुझे 
अकेले में खूब रुलाएगी मुझे  
तन्हाई थी "तन्हा" ही आई 
चुपके से मेरे मन में समाई 
मैं और मेरी तन्हाई मिलके दो हो गए 
न जाने फिर किन ख्यालों में खो गए 
साथ थी मेरे जब तन्हाई 
बरसों पुरानी बातें याद तब आई 
याद आया था बचपन याद आई थी जवानी 
कभी याद आई दादी तो कभी याद आई नानी 
वक्त था  न जाने कब बीत गया 
तन्हाई में जब लिखा  एक गीत  नया 
ऐ तन्हाई क्यों लोग तुझे कोसते हैं 
बड़ी बड़ी बातें तन्हाई में ही तो सोचते हैं 
न होता कोई काव्य  न होती कोई कथा 
कैसे लिखते लोग मन की ब्यथा 
"तन्हाई"  यूँ ही न हो उदास 
सब   बुलाएँगे तुझे  अपने पास 
नागिन नहीं तू  दोस्त कहलाएगी खास  

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