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Mar 14

सार्थक हुआ नाम

savita Posted by: savita in हिंदी कविता Print PDF

            सार्थक हुआ नाम 
आश्विन का था महीना 
न थी सर्दी न बहता था पसीना 
शुक्ल पक्ष की तिथि थी प्रथम 
इस धरती पर तुमने जब  रखा था कदम 
अभी बीस बरस की थी  मैं  ---
पैदा होने में नहीं थे तुम लेट 
वो साल था सन  एटी एट 
 मां ने  मेरी जब तुम्हें निहारा 
एक ' विशेष ' नाम से था पुकारा !
ख्वाबों में खो गई थी मैं 
कुछ शंकित सी हो गई थी मैं 
सार्थक क्या तुम कर पाओगे उस नाम को ?
 जग  में  दिखला   पाओगे  अपने काम को ?
आज सारी  दुनिया  तुम्हें है जानती  
ओजस्वी नाम से पहचानती 
मंगल को जन्मे मंगल ही करना 
भले काम के लिए किसी से न डरना 
   डर नहीं है  तुम्हें जमाने का 
ओज है ,तेज है जोश है कुछ कर दिखाने का 
सारा जमाना तुम्हें अब जान जाएगा 
तुम्हारा नाम अपने आप सार्थक हो जाएगा 
                
                                 तुम्हारी मां    

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