Username:  Password:        Forgot Password? Username?   |   Register
Banner

Blogs

A SHORT DESCRIPTION ABOUT YOUR BLOG
Aug 12

क्या है मलमास या अधिक मास

savita Posted by: savita in लेख | विचार | Comments
Tagged in: Untagged 

क्या है मलमास या अधिक मास
ऋग्वेद के अनुसार अधिकमास एक खगोलीय गणना है I इसके अनुसार सूर्य लगभग 30.44 दिन में एक राशी पूरी करता है उसे सूर्य का एक सौरमास कहते हैं  12 सौर मास में  लगभग 365.25 दिन होते हैं जिसे एक सौर वर्ष कहा जाता है प्रत्येक मास  का आरम्भ सक्रांति से होता है I प्रत्येक चन्द्र मास 29.53 दिन का होता है जो अमावस्या के अगले दिन से लेकर पूर्णिमा तक होता है ,इसलिए चन्द्र वर्ष में लगभ 354.36 दिन होते हैं I

इस तरह सौर वर्ष तथा चन्द्र वर्ष में लगभ 10.87 दिन का अंतर आ जाता है और तीन वर्ष में यह अंतर एक मास का हो जाता है इस अंतर को दूर करने के लिए एक अधिक मास का नियम है  और प्रत्येक तीसरे वर्ष एक चन्द्र मास की  वृद्धि की जाती है  यह अधिक मास लगभग 32 मास 16 दिन और  4घटी के बाद आता है  सौर वर्ष के 12 मास चेत्र ,वैशाख आदि हर मास की एक राशी होती है अर्थात हर संक्रांति को सूर्य एक राशी से दूसरी राशी में प्रवेश करता है I जिस चन्द्र मास में सूर्य एक राशी से दूसरी में प्रवेश नहीं करता वह अधिकमास होता है  इस वर् 16 अगस्त को सूर्य सिंह राशी में प्रवेश करेंगे त 16 सितम्बर अमावस्या को कन्या राशी में चले जाएँगे सूर्य के एक ही संक्रांति कल में दो अमावस्या आने से 18 अगस्त ,प्रतिपदा से  16 सितम्बर  अमावस्या तक भाद्रपद अधिक मास होगा I भगवान श्री कृष्ण ने इस मास का नाम पुरुषोतम मास दिया है

May 27

jiwan hai anmol

savita Posted by: savita in Uncategorized | Comments
Tagged in: Untagged 

यह  जीवन है  अनमोल
जीवन  यह    है अनमोल कोई सका न इसको तोल गम और  खुशियाँ आती हैं इसमें बारी - बारी कभी गम तो कभी ख़ुशी का पलड़ा होता है भारी
तराजू वाले का तराजू है अनोखा कई जन्मों का वो रखता है लेखा -जोखा हम भी बन बैठे हैं कितने नादाँ अपने ही कर्मों के फल से होते हैं परेशान
गर कर्मों को अपने लें सुधार  नहीं होंगे फिर कभी लाचार बड़ी मुश्किल से मिला है जीवन यह मानुष
 कीमत चुका इसकी तू पाकर सुयश   

Mar 14

सार्थक हुआ नाम

savita Posted by: savita in हिंदी कविता | Comments

            सार्थक हुआ नाम 
आश्विन का था महीना 
न थी सर्दी न बहता था पसीना 
शुक्ल पक्ष की तिथि थी प्रथम 
इस धरती पर तुमने जब  रखा था कदम 
अभी बीस बरस की थी  मैं  ---
पैदा होने में नहीं थे तुम लेट 
वो साल था सन  एटी एट 
 मां ने  मेरी जब तुम्हें निहारा 
एक ' विशेष ' नाम से था पुकारा !
ख्वाबों में खो गई थी मैं 
कुछ शंकित सी हो गई थी मैं 
सार्थक क्या तुम कर पाओगे उस नाम को ?
 जग  में  दिखला   पाओगे  अपने काम को ?
आज सारी  दुनिया  तुम्हें है जानती  
ओजस्वी नाम से पहचानती 
मंगल को जन्मे मंगल ही करना 
भले काम के लिए किसी से न डरना 
   डर नहीं है  तुम्हें जमाने का 
ओज है ,तेज है जोश है कुछ कर दिखाने का 
सारा जमाना तुम्हें अब जान जाएगा 
तुम्हारा नाम अपने आप सार्थक हो जाएगा 
                
                                 तुम्हारी मां    

Mar 14

तन्हाई पर हिंदी कविता - तन्हाई

savita Posted by: savita in हिंदी कविता | Comments

                       तन्हाई 

         जब थी मेरे पास आई 
ये नागिन सी तन्हाई .....
हाय ये नागिन सी तन्हाई 
डर था डस जाएगी  मुझे 
अकेले में खूब रुलाएगी मुझे  
तन्हाई थी "तन्हा" ही आई 
चुपके से मेरे मन में समाई 
मैं और मेरी तन्हाई मिलके दो हो गए 
न जाने फिर किन ख्यालों में खो गए 
साथ थी मेरे जब तन्हाई 
बरसों पुरानी बातें याद तब आई 
याद आया था बचपन याद आई थी जवानी 
कभी याद आई दादी तो कभी याद आई नानी 
वक्त था  न जाने कब बीत गया 
तन्हाई में जब लिखा  एक गीत  नया 
ऐ तन्हाई क्यों लोग तुझे कोसते हैं 
बड़ी बड़ी बातें तन्हाई में ही तो सोचते हैं 
न होता कोई काव्य  न होती कोई कथा 
कैसे लिखते लोग मन की ब्यथा 
"तन्हाई"  यूँ ही न हो उदास 
सब   बुलाएँगे तुझे  अपने पास 
नागिन नहीं तू  दोस्त कहलाएगी खास  

Mar 03

गलगल का आचार ,Galgal pickle recipe, Galgal ka achar , how to make galgal ka khatta meetha achar

savita Posted by: savita in Food | Drinks | Recipe | Comments

सामग्री  :

 

गलगल : १ किलो 

नमक : १०० ग्राम 

मेथी : १० ग्राम 

लाल मिर्च : २० ग्राम (स्वादानुसार )

हल्दी : १५  ग्राम 

हींग : चुटकी भर 

सरसों का तेल : २०० ग्राम 

चीनी : २०० ग्राम 

 

Read More...

Activities
X
Please Login
Chat
X
Please login to be able to chat.
Activities
Chat (0)