Username:  Password:        Forgot Password? Username?   |   Register
Banner

Blogs

This blog displays the articles written by all the bloggers. . . . . . .
Sep 17

ठीक उसी तरह जैसे

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 

अपने अनुभबों,एहसासों ,बिचारों को
यथार्थ रूप में
अभिब्यक्त करने के लिए
जब जब मैनें लेखनी का कागज से स्पर्श किया
उस समय मुझे एक बिचित्र प्रकार के
समर से आमुख होने का अबसर मिला
लेखनी अपनी परम्परा प्रतिष्टा मर्यादा के लिए प्रतिबद्ध थी
जबकि मैं यथार्थ चित्रण के लिए बाध्य था
इन दोनों के बीच कागज मूक दर्शक सा था
ठीक उसी तरह जैसे
आजाद भारत की इस जमीन पर
रहनुमाओं तथा अन्तराष्ट्रीय बित्तीय संस्थाओं के बीच हुए
जायज और दोष पूर्ण अनुबंध को
अबाम को मानना अनिबार्य सा है
जब जब लेखनी के साथ समझौता किया
हकीकत के साथ साथ कल्पित बिचारों को न्योता दिया
सत्य से अलग हटकर लिखना चाहा
उसे पढने बालों ने खूब सराहा
ठीक उसी तरह जैसे
बेतन ब्रद्धि के बिधेयक को पारित करबाने में
बिरोधी पछ के साथ साथ सत्ता पछ के राजनीतिज्ञों
का बराबर का योगदान रहता है
आज मेरी प्रत्येक रचना
बास्तबिकता से कोसों दूर
कल्पिन्कता का राग अलापती हुयी
आधारहीन तथ्यों पर आधारित
कृतिमता के आबरण में लिपटी हुयी
निरर्थक बिचारों से परिपूरण है
फिर भी मुझको आशा रहती है कि
पढने बालों को ये
रुचिकर सरस ज्ञानर्धक लगेगी
ठीक उसी तरह जैसे
हमारे रहनुमा बिना किसी सार्थक प्रयास के
जटिलतम समस्याओं का समाधान
प्राप्त होने कि आशा
आये दिन करते रहतें हैं
अब प्रत्येक रचना को लिखने के बाद
जब जब पढने का अबसर मिलता है
तो लगता है कि
ये लिखा मेरा नहीं है
मुझे जान पड़ता है कि
मेरे खिलाफ
ये सब कागज और लेखनी कि
सुनियोजित साजिश का हिस्सा है
इस लेखांश में मेरा तो नगण्य हिस्सा है
मेरे हर पल कि बिबश्ता का किस्सा है
ठीक उसी तरह जैसे
भेद भाब पूर्ण किये गए फैसलों
दोषपूर्ण नीतियों के दुष्परिणम आने पर
उसका श्रेय
कुशल राजनेता पूर्ब बरती सरकारों को दे कर के
अपने कर्तब्यों कि इतिश्री कर लेते हैं


मदन मोहन सक्सेना

Sep 05

शिक्षा ,शिक्षक और हम

Madans Posted by: Madans in Uncategorized | Comments


 

शिक्षा ,शिक्षक और हम

आज शिक्षक दिवस है
यानि
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और दार्शनिक तथा शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन
प्रश्न है कि आज शिक्षक दिबस की कितनी जरुरत है
शिक्षक लोग आज के दिन
बच्चों से मिले तोहफे से खुश हो जाते हैं
और बच्चे शिक्षक को खुश देख कर खुश हो जातें हैं
शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं है
जानकारी और तकनीकी गुर का अपना महत्व है
लेकिन बौद्धिक झुकाव और लोकतांत्रिक भावना का भी महत्व है
इन भावनाओं के साथ छात्र उत्तरदायी नागरिक बनते हैं
जब तक शिक्षक ,शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा
तब तक शिक्षा को अपना उद्देश्य नहीं मिल पायेगा
हमारी संस्कृति में
शिक्षक और गुरु का दर्जा तो भगवान से भी ऊपर माना गया है
लेकिन
आज का गुरु गुरु कहलाने लायक है इस पर प्रश्नचिह्न हैं
कितने ही गुरु ऐसे हैं जिन पर घिनौने अपराधों के आरोप लगे हुए हैं
शिक्षक भी गुरु के पद से तो उतर ही चुका है
अब वह शिक्षक भी रह पाएगा इसमें संदेह है
परिणाम ये हुआ है कि
आज न तो छात्रों के लिए कोई शिक्षक
उनका आर्दश , उनका मार्गदर्शक गुरू और जीवनभर की प्रेरणा बन पाता है
और न ही शिक्षक बनने को उत्सुक भी हैं
बही घिसी पिटी शिक्षा प्रणाली को उम्र भर खुद ढोता है
और छात्रों की पीठ पर लादता हुआ
एक शिक्षक
अब इस आस में कभी नहीं रहता कि उसका कोई छात्र
देश और समाज के निर्माण में कोई बडी सकारात्मक  भूमिका निभाएगा
सवाल ये कि इन सब के लिए कौन जिम्मेदार है
शिक्षक , शिक्षा ब्यबस्था या समाज
शिक्षक को जिस सम्मान से देखा जाना चाहियें
जो सुबिधाएं शिक्षक को  मिलनी चाहियें ,क्या मिल रहीं हैं
अगर नहीं
तो आज के भौतिक बादी युग में कौन शिक्षक बनना चाहेंगा
यदि शिक्षक संतुष्ट नहीं रहेगा
तो हमारे बच्चों का भबिष्य क्या होगा
देश सेबा में उनका कितना योगदान होगा
और हम किस दिशा में जा रहें हैं
समझना ज्यादा मुश्किल नहीं हैं।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामना :




प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना

Sep 04

ग़ज़ल(दूसरो का किस तरह नुकसान हो )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
Tagged in: Untagged 

ग़ज़ल(दूसरो का किस तरह नुकसान हो )

ख्बाब था मेहनत के बल पर , हम बदल डालेंगे किस्मत
ख्बाब केवल ख्बाब बनकर, अब हमारे रह गए हैं



कामचोरी , धूर्तता, चमचागिरी का अब चलन है
बेअरथ से लगने लगे है ,युग पुरुष जो कह गए हैं





Read More...
Aug 30

Packers and Movers in Indore @ http://www.packersandmoversinindore.com/

kajla100 Posted by: kajla100 in Business | Comments

Here are Best movers and packers in Indore - Manish Packers and Movers in Indore are always ready to help you for moving any type of Household Goods Shifting, Residential Relocation, Car Carrier and Transportation Services, Get best packers and movers in Indore charges and rates and prices info from reputed company just like Manish packers and movers in Indore at professional packers and movers in Indore, India. We want to make your "HAPPY RELOCATION" with perfect experts in city with right charges of packers and movers Indore.

Packers and Movers in Indore

Read More...
Aug 30

Packers and Movers in Indore @ http://www.packersandmoversinindore.com/

kajla100 Posted by: kajla100 in Business | Comments

Packers and Movers in Indore India's fast growing an ISO 9001:2008 IBA approved certified packers and movers of Hi-tech chain international most awarded quality reliable and reputed trusted brand in the professional packers and movers company in Indore. We have also provided a lot of information about of Household Goods Shifting Services, Residential Relocation Services, Office Shifting Services, Local Shifting Services, Commercial Shifting Services, Industrial Shifting Services, Car Carrier and Transportation Services, Corporate Relocation Services, Domestic Relocation Services, International Relocation Services, Warehousing and Storage Services providers in Indore India. Our directory is providing ultimate information to our visitors about Packers and Movers in Indore India. We provide packing and moving all type of Household Shifting and Car Transportation Services to all over India, We provide best movers and packers services to all over India.

Article Provided By:-

Read More...
Aug 30

Packers and Movers in Indore @ http://www.packersandmoversinindore.com/

kajla100 Posted by: kajla100 in Business | Comments

Hire professional packers and movers in Indore, packers and movers Indore, movers and packers in Indore at affordable price for household shifting, office shifting, local shifting. Compare quotes of best movers and packers in Indore the best one. Visit : http://www.packersandmoversinindore.com/
Article Provided By:-

Packers and Movers in Indore

Read More...
Aug 27

ग़ज़ल(इश्क क्या है)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
Tagged in: Untagged 

ग़ज़ल(इश्क क्या है)
हर सुबह रंगीन अपनी शाम हर मदहोश है
वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला


चार पल की जिंदगी में ,मिल गयी सदियों की दौलत
जब मिल गयी नजरें हमारी ,दिल से दिल अपना मिला



Read More...
Aug 19

मिलने का चलन यारों ना जानें कब से गुम अब है

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 



कंक्रीटों के जंगल में नहीं लगता है मन अपना
जमीं भी हो गगन भी हो ऐसा घर बनातें हैं

ना ही रोशनी आये ,ना खुशबु ही बिखर पाये
हालत देखकर घर की पक्षी भी लजातें हैं

दीबारें ही दीवारें नजर आये घरों में क्यों
पड़ोसी से मिले नजरें तो कैसे मुहँ बनाते हैं

मिलने का चलन यारों ना जानें कब से गुम अब है
टी बी और नेट से ही समय अपना बिताते हैं

ना दिल में ही जगह यारों ना घर में ही जगह यारों
भूले से भी मेहमाँ को नहीं घर में टिकाते हैं

अब सन्नाटे के घेरे में ,जरुरत भर ही आबाजें
घर में ,दिल की बात दिल में ही यारों अब दबातें हैं


मदन मोहन सक्सेना

Aug 14

Darkling Eyes

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

What moves behind those darkling eyes
What memories concealed -
What shadows drift within their gaze
What visions unrevealed

If I could reach into your mind
All hidden thoughts to know
What phantoms would I find therein
What dreams would inside flow

For as I look upon those eyes
I see a secret world
A world that you alone shall keep
To never be unfurled

The stories that you hold within
Are yours forevermore
To carry with you through all time
Within your mem’ry store

So when I see a wistful smile
Or catch a teardrop fall
I know that you’re remembering
All that you would recall

Perhaps a mother’s gentle kiss
Perhaps her warm embrace
Or maybe it’s a sadder song
Reflected on your face

If only you would beckon me
Behind those darkling eyes
That I might join my soul with yours
Before the sunlight dies

Aug 14

जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 

 
जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान

गंगा यमुना सी नदियाँ हैं जो देश का मन बढ़ाती हैं
सीता सावित्री सी देवी जो आज भी पूजी जाती हैं

यहाँ जाति धर्म का भेद नहीं सब मिलजुल करके रहतें हैं
गाँधी सुभाष टैगोर तिलक नेहरु का भारत कहतें हैं

यहाँ नाम का कोई जिक्र नहीं बस काम ही देखा जाता है
जिसने जब कोई काम किया बह ही सम्मान पाता है

जब भी कोई मिले आकर बो गले लगायें जातें हैं
जन आन मान की बात बने तो शीश कटाए जातें हैं

आजाद भगत बिस्मिल रोशन बीरों की ये तो जननी है
प्रण पला जिसका इन सबने बह पूरी हमको करनी है

मथुरा हो या काशी हो चाहें अजमेर हो या अमृतसर
सब जातें प्रेम भाब से हैं झुक जातें हैं सबके ही सर.

प्रस्तुति: मदन मोहन सक्सेना

Aug 11

I rather have you

eyebello Posted by: eyebello in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

So long as you exist,

So my heart keeps beating,

Read More...
Aug 10

THE MIND WE SHARE

eyebello Posted by: eyebello in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

For the first time in forever,

I found a like mind friend,

Read More...
Aug 10

The unknown feelings

eyebello Posted by: eyebello in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

Once upon a time,

The beginning of all stories,

Read More...
Aug 10

The love I wished I had

eyebello Posted by: eyebello in Uncategorized | Comments
Tagged in: Untagged 

 

In the middle of the night,

Read More...
Aug 07

बात-बात पर अवरोध,क्योकि हम स्वतंत्र हैं। एम.के.पाण्डेय “निल्को”

vmwteam Posted by: vmwteam in लेख | विचार | Comments
Tagged in: Untagged 

बात-बात पर अवरोध,क्योकि हम स्वतंत्र हैं। एम.के.पाण्डेय “निल्को”

 

नगर निगम ने कई दिनों से मोहल्लों का कचड़ा नहीं उठाया,लोगो ने रोड जाम कर दिया। गुस्सा बहुत था,इसलिए वाहनो पर पथराव किया गया । स्कूल मे मिड डे मील नहीं बना, छोटे बच्चों को लेकर अभिभावक सड़क पर आ गये । परिवहन विभाग के बसों के शीशे तोड़ दिये। शहर मे शोहदों ने किसी से छेड़खानी की। किसी शरीफ से नहीं देखा गया , वह मना करने लगा तो विवाद हो गया । विवाद बढ़ा तो बात चक्काजाम पर आ गई। सिटी मजिस्ट्रेट ने समझाबुझा कर जाम समाप्त कराया । महाविद्यालय मे एडमिशन नहीं तो जाम ....... । बात-बात पर अवरोध, क्योकि हम स्वतंत्र हैं। हालत यह है की –
कुछ घरों मे मुश्किल है
सुबह-शाम चूल्हे जलाना,
बड़ा आसान हो गया है
बात-बात पर बस्ती जलाना।
      सामान्‍य रूप में आजादी का अर्थ पूर्ण तौर पर स्‍वतंत्र होना है , जिसमें किसी का भी कोई हस्‍तक्षेप न हो। पर मनुष्‍य के जीवन में वैसी आजादी किसी काम की नहीं , क्‍यूंकि इसमें उसके समुचित विकास की कोई संभावना नहीं बनती।  लेकिन आज स्वतंत्रता का मतलब बदल गया है। हम स्वच्छंद होते जा रहे है। 15 अगस्त 1947 से आज तक की राष्ट्रीय यात्रा का विश्लेषण करे तो बहुत कुछ अपेक्षित नहीं दिखाई दे रहा है। यहा अंग्रेज़ नहीं है,न उनकी व्यवस्था है। सब कुछ हमारा है, लेकिन हम संतुष्ट नहीं है। सत्ता के स्तर पर सबसे पहले तो केंद्र और राज्य सरकारें ही स्वतंत्र नहीं हैं। आज सब गोलमाल हो गया है। राज्य सरकारे उन मामलों में भी केंद्र पर निर्भर हैं, जिनमें उन्हें स्वतंत्र होना चाहिए। शरीर से हम भारतीय, दिल और दिमाग से पश्चिमी धारा के गुलाम हो गए। यह सब आज हमारे खान-पान,रीति-रिवाज़,बोल-चाल तथा पहनावे में साफ दिख रहा है। हमारे स्वतंत्र व्यवहार के कारण चहुंओर क्या दीख रहा है? अपने घर से ही शुरुआत करें? पढ़ाई-लिखाई के कारण आत्मनिर्भरता आती है, आर्थिक उन्नति होती है। पर इस आत्मनिर्भरता ने व्यक्ति को स्वच्छंद बना दिया है। स्वच्छंदता स्वतंत्रता नहीं है।  स्वच्छंदता का आलम यह है कि देश की सामूहिक स्वतंत्रता को ध्वस्त करने के लिए न जाने कितने आतंकी, अलगाववादी और विध्वसंक संगठन खड़े हो गए। इन संगठनों के कारण समाज जितना तबाह हो रहा है, शायद साम्राच्यवाद के समय भी न हुआ हो।
      अंग्रेज़ो को केवल गालिया देकर स्वतंत्रा की जयकार करने से पहले यदि अपने आस-पास के पुलो,भवनो पर नज़र दौड़ाए, तो देखते है की इतने सालो पहले की बनी इमारत खड़ी होकर इठला रही है और जिस भवन, पुल को आज़ाद भारत के कमीशनबाज नेताओ,ठेकेदारो ने बनवाया है वह धराशायी हो गए । जबसे देश आजाद हुआ है हमने केवल अपने बारे में सोचा है. मेरा भारत महान कहने वाले कई लोग मिल जाते है पर उसमे उनका क्या योगदान है ये वो नहीं बता पाते. मानो उनके यहाँ पैदा होने से ही ये देश महान हुआ हो. इस देश के लिए जो लोग कुर्बान हो गए उनके सपनो के भारत को हमने कही खो दिया है।  स्वतंत्रा के मतलब इतना बदल गए हैं कि किसी कवि कि यह लाइन बहुत ही सटीक बैठ रही है –
देखता हूं चलन सियासत का,
हर कहीं बैर के बवंडर हैं।
फर्क ऊंचाइयों मे है लेकिन,
नीचता मे सभी बराबर हैं।
      बहुत दुःख का विषय है कि स्वराज्य-प्राप्ति के इतने वर्षों बाद भी सामाजिक और राजनैतिक हालत इतने अधिक चिंताजनक हैं। समाज में स्वार्थ लगातार बढ़ रहा है। अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। आतंकवाद, नक्सलवाद, विदेशी घुसपैठ इत्यादि खतरे देश को चारों ओर से घेर रहे हैं। देश के किसी न किसी भाग से प्रतिदिन किसी आतंकवादी घटना,नक्सली हमले या किसी बम विस्फोट का समाचार अवश्य मिलता है और ऐसे कठिन समय में सरे मत-भेद भुलाकर एक होने और इन हमलावरों को कुचलने कि बजाय हम भाषावाद, प्रांतवाद और मजहबी उन्माद से ग्रस्त होकर आपस में ही लड़ रहे हैं। या तो हमें सत्य दिखाई नहीं देता, या हम देखना ही नहीं चाहते। किसी को केवल अपनी जाति की चिंता है और कोई राष्ट्र की बजाय केवल किसी समुदाय-विशेष के हित को ही प्राथमिकता देता है।  जिस देश में युवावस्था का अर्थ बल, बुद्धि एवं विद्या होना चाहिए, वहाँ अधिकांश युवा इसके विपरीत धूम्रपान, मद्यपान और ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की चपेट में हैं। उनके जीवन में संयम, धैर्य तथा शान्ति का स्थान स्वच्छंदता, उन्मुक्त जीवन शैली तथा विवेकहीन उन्माद ने ले लिया है। अधिकांश युवाओं को क्रांतिकारियों की कम और क्रिकेट की जानकारी अधिक है। विदेशी वस्तुओं तथा विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर, खादी को प्रतीक बनाकर स्वदेशी के प्रयोग का संदेश देने वाले महात्मा गाँधी के देश में आज कोने कोने तक विदेशी वस्तुओं के विक्रेता पुनः पहुँच गए हैं। जिस देश में कभी 'जय जवान-जय किसान' का मंत्र गूंजता था, वहाँ शासन की नीतियों से व्यथित होकर शहीद सैनिकों के परिजन सरकार को सभी पदक लौटा रहे हैं और किसान प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे हैं। सोने की चिडिया कहलने वाला देश छोटे-छोटे कार्यों में आर्थिक सहायता के लिए कभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, तो कभी विश्व बैंक की और देखता है। हमारी आर्थिक नीतियों से आज भी भारत की बजाय बाहरी देशों को ही अधिक लाभ हो रहा है। ऐसी स्थिति में हम कैसे कह सकते हैं की हम स्वतंत्र हैं?
      आज यह आवश्यक है कि देश आत्मविश्लेषण करे। देश, राज्य और व्यक्ति को स्वतंत्र बनाया जाए स्वच्छंद नहीं। सर्वधर्म समभाव, सर्वे भवंतु सुखिन: और तेन त्यक्तेन भुंजीथ: जैसे संबल हमारे पास हैं। अंत कि चार लाइनों को भी ध्यान से पढ़ कर आप अपने सुझाव या शिकायत लिखने के लिए स्वतंत्र है ।
हम तो स्वतंत्र होते हुए भी परतंत्र हैं
यहाँ ना खुशियाँ हैं, ना खिलखिलाहट
यहाँ तो चलता है बस आतंकवादी तंत्र
यह कैसा प्रजातंत्र है, यह कैसा लोकतंत्र
कोई हमें बतलाये तो
क्या यही स्वतंत्र है?
******************************
 एम.के.पाण्डेय “निल्को”
+91-9024589902
Aug 05

Lead Me Into Light

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

O take my heart and lead me into light
For darkness overwhelms my soul tonight -
Such melancholy steals the brightling day
So chasing all that glistens far away

The love that has now gone will ne’er return
O’er this my mind, my soul, shall ever yearn -
Must I, with longing, live a joyless life
That cuts into me as a murd’rous knife

So lost am I in bitter-sweet recall
That into bleak despondency I fall -
His voice shall never speak again my name
For now he sleeps, no more a flick’ring flame

I am but now a feather in the wind
(A captured, dried, poor butterfly unpinned)
Yet tracing circles in the silvered sky
No place to rest, no earth on which to lie 

















Read More...
Aug 05

Inside Of You

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

Let me dwell inside of you
for just a little while
Feel your heartbeat softly pulse
and linger in your smile

There to share each breath you take
each movement of your eye
Mingle with your burning blood
each teardrop as you cry

Taking every step with you
whispering through your voice
So together bound in love
O how we would rejoice

You and I could move the world
if we were joined as one
Hold the stars within our hands
and reach out for the sun

Let me dwell inside of you
my spirit there sustain
Be the guardian of my soul
that I might live again






















Read More...
Jul 30

lotus greens gurgaon

homeresidency Posted by: homeresidency in Uncategorized | Comments
Tagged in: Untagged 

lotus greens gurgaon - Lotus Green by lotus green developers - Lotus Green by lotus green developers up with its new residential project 3c Greenopolis Sector 89 Gurgaon. 3c Greeno polis offers price list, specifications, master plan, location plan, reviews.

Jul 26

दुश्मन आज सारे जाने पहचाने लगते हैं

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 

दुश्मन आज सारे जाने पहचाने लगते हैं

 

Read More...
Jul 25

Solid Ground

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

I built my house on solid ground
Convinced that it was safe and sound
Not thinking that the earth could move
But earthquakes happen just to prove
No ground can ever be secure -
My house fell down and is no more.

Beneath the surface, nothing’s fixed
As with the rocks our fate is mixed
And everything can surely break -
There’s nothing that the earth can’t shake
No walls forever stay erect
And all that’s joined can disconnect

Jul 25

क्राँति शब्द

Preet Butter Posted by: Preet Butter in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 

थके हुए शब्दोँ से क्राँति नहीँ होगी,
तोडने होँगे परंपरागत शब्दोँ के अर्थ
देने होँगे पुराने शब्दोँ को नवीन ज्वलंत अर्थ
फिर गढनी होगी
नई परिभाषाएँ
थके हुए,लङखङाते,सहमेँ हुए शब्द 
अव्यवस्था को क्राँति के नाम पर देते हैँ सबल।
सदियोँ से चले आ रहे शब्द
शनै:शनै: हो गये हैँ वृत्ताकार
अब इनसे कही,कोई चोट नहीँ पहुँचती
और ये लुढकते चले जा रहे हैँ।
क्राँति हेतु अनिवार्यता है
शब्द ऐसे हो
जो नश्तर बन ह्रदय मेँ पैवश्त हो,
अशुद्ध रक्त को बाहर निकाल
कर दे सम्पूर्ण व्यवस्था का विरेचन।

Jul 23

क्यों हर कोई परेशां है

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 

क्यों हर कोई परेशां है

दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है

Read More...
Jul 17

Someone Stole the Moon

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

Someone stole the moon last night
Left the land bereft of light
Sorrow filled the sequinned sky
And all the stars began to cry

There above as glist’ning tears
(Weeping, weeping, no-one hears)
Flutt’ring down upon the world
Like soft confetti deftly hurled

Oh to see her face again
Then to watch her wax and wane
Lost to sight her Imbrian sea
So sweetly named Tranquillity 












Read More...
Jul 17

Only Dreaming

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

I know I was only dreaming
When I heard you speak my name
Only my imagination
Which brought you to me again

Oh yes, just a mere illusion
That made me believe you’re here
And sadly some wishful thinking
That caused me to shed a tear

My eyes were deceived in seeing
A glimpse of your smiling face
My arms were not really aching
When I sought your warm embrace

How could I have been so foolish
To think you were back with me
Oh why was I so misguided
Knowing time has set you free

Jul 08

मेरी पोस्ट "क्यों हर कोई परेशां है" ओपन बुक्स ऑनलाइन वेव साईट में

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments


मेरी पोस्ट "क्यों हर कोई परेशां है" ओपन बुक्स ऑनलाइन वेव साईट में


प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि मेरी पोस्ट  "क्यों हर कोई परेशां है" ओपन बुक्स ऑनलाइन    वेव साईट में शामिल की गयी है।  आप सब अपनी प्रतिक्रिया से अबगत कराएं करायें। लिंक नीचे दिया गया है।




 

Your blog post "क्यों हर कोई परेशां है" has been approved on Open Books Online.

To view your blog post, visit:
http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:556518?xg_source=msg_appr_blogpost






क्यों हर कोई परेशां है

दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है
ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है

अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा
कोई तन्हा रहना नहीं चाहें मजबूरी बनाती है

किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है
बिना मेहनत के मंजिल कब किसके हाथ आती है

क्यों हर कोई परेशां है बगल बाले की किस्मत से
दशा कैसी भी अपनी हो किसको रास आती है

दिल की बात दिल में ही दफ़न कर लो तो अच्छा है
पत्थर दिल ज़माने में कहीं ये बात भाती है

भरोसा खुद पर करके जो समय की नब्ज़ को जानें
"मदन " हताशा और नाकामी उनसे दूर जाती है


मदन मोहन सक्सेना

Jun 26

Gently In The Morning

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

Gently in the morning
touch me if you will

Read More...
Jun 26

World Of Wonder

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

A world of wonder waits for you
Just seek and you shall find
A multitude of miracles
To captivate your mind

Look far upon the ocean’s swell
White horses rise and fall
Then watch the glowing sun at dawn
And hear the song-birds call

Across the wide expanse of blue
Tall sailing ships drift by
While cotton clouds that float above
Adorn the sapphire sky

The autumn leaves that turn to gold
Then summer into green
And bluebells nestling in the woods
Create a heav’nly scene

With tinted hues the flowers bloom
The corn sways in the fields
Such beauty set before our eyes
Which Mother Nature yields

A world of wonder waits for you
Just look around and see
There’s so much splendour on display
To dazzle you and me

Jun 26

I've Lost The Road To Paradise

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
Tagged in: Untagged 

 

I’ve lost the road to Paradise
Dark shadows bar the way
The path is strewn with memories
Which dim the burnished day

With heavy heart I wander long
To find this land obscure
That I should in its glory dwell
In joy forevermore

But many twists and turns are marked
It seems, to steal my quest
And all concealed in shrouds of care
My spirit thus to test

So hail the stars to light my way
To guide me through the night
And hail the wind to spur me forth
The sun to shine yet bright

I’ll ever seek to find a way
The bracken thick to clear    




















Read More...
Jun 14

दिखे बदले हुए चेहरे

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
Tagged in: Untagged 

दिखे बदले हुए चेहरे


बदलते बक्त में मुझको  दिखे बदले हुए चेहरे
माँ का एक सा चेहरा  ,  मेरे मन में पसर जाता
नहीं देखा खुदा को है ना ईश्वर से मिला मैं  हुँ
मुझे माँ के ही  चेहरे मेँ खुदा यारों नजर आता

मुश्किल से निकल आता, करता याद जब माँ को 





Read More...
Jun 11

अपने प्यार का पता दे

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments


मेरे  हमनसी  मेरे दिलबर अपने प्यार का पता दे

तू दूर क्यों है हमसे इतना जरा पता दे 


Read More...
<< Start < Prev 1 3 4 5 6 7 8 9 10 > End >>

Activities
X
Please Login
Chat
X
Please login to be able to chat.
Activities
Chat (0)