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May 02

मास्टर प्लान के मध्यन्तर समीक्षा के लिए कुछ सुझाव

shashikantnishantsharma Posted by: shashikantnishantsharma in लेख | विचार Print PDF

मै एक भौतिक योजना विभाग, योजना तथा वास्तु विद्यालय का छात्र हू. मै अपने शोध पत्र में सहभागितापूर्ण नियोजन का अध्यन किया जिसमे हमने देल्ल्ही के मास्टर प्लान के आपत्ति व् सुझाव; शहरी विकास योजना तथा स्थानीय क्षेत्र योजना का अध्यन किया.

हम सोचतें है कि हमारी अध्यन का परिणाम मास्टर प्लान को और भी सहभागितापूर्ण बनाने में मदगार सावित् हो सकता है.

यह बड़े आश्चर्य की बात है कि कोई कैसे अपनी राय दे जब तक उसे पता ही न हो कि क्या और क्यों हो रहा है. प्रबंध समिति कार्य दल बने थे मस्टर प्लान को लागु करने के लिए लिकिन उनका कोई रिपोर्ट आम आदमी के पहुच में नहीं है. एक फ़िलहाल में ही आप ने सुझाव समिति (मलिन बस्ती पुर्नार्वास व् सामाजिक घर) के बैठक की जानकारी प्राधिकार के साईट पे डाला है. पर इससे तो पूरी बात सामने नहीं आती.

जबतक जनता को ये पता ही नहीं होगा कि मास्टर प्लान में क्या प्रावधान था उसे किस हद तक हासिल किया गया. भू-उपयोग योजना क्या था और अभी क्या स्तिथि है, आम आदमी तो केवल अपनी ही समस्याएं बताएगा. फिर नतीजा क्या होगा. इस बार ७००० के जगह ७ लाख आपत्ति व् सुझाव आ जायेंगे पर पर उससे कुछ खास नहीं होने वाला.

ये बहुत हो गया लोगों के लिए योजना बनाना अब समय कि मांग है कि हम लोगों के साथ योजना बनाये ताकि योजना प्रभवि और लाभदायक हो. इस उपलक्ष्य में हमे कुछ सुझाव लिखे है गौर  फरमाएगा.

किसी भी योजना में लोगों कि भागीदारी के लिए चार स्तर होतें है. जो कि निम्लिखित है.

  1. सुचना
  2. विचार विमर्श
  3. विश्लेषण व् समस्या का निदान
  1. प्रभाव अवं असर

जब जन भागीदारी कि प्रथम कड़ी है सुचना का अदना-प्रदान जिसका विवरण मै निचे लिख रहा हू .

 

  • सार्वजनिक नोटिस भागीदार को आकर्षित करने के लिए अकेले एक प्रभावी तंत्र नहीं हो सकता है. संबंधित वार्डों में स्थानीय नोटिस बिल बोर्डों के साथ साथ  नवीन मीडिया, रेडियो, टीवी आदि के माध्यम से होना चाहिए.
  • नक्शे, योजना, प्रस्तावों और रिपोर्ट और प्रासंगिक सुचना प्राधिकरण में  और आसान संदर्भ के लिए निगम के वार्ड कार्यालय कार्यालय में उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
  • वहाँ एक मदद डेस्क होना चाहिए जो लोगों कि न केवल बात सुने बल्कि उनके समझाए कि ये क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है यदि वो और कुछ मास्टर प्लान सम्बंधित जानकारी कहते है तो उन्हें जल्दी उप्लंध कराया जाये न कि उनके एस कार्यालय से उस कार्याला तक दौराया जाय.
  • इलाकों और शहर में कार्यशालाओं के आयोजन के माध्यम से सूचित करना  सबसे पसंदीदा तरीका है. या वार्ड के विभिन्न भागों में कई कार्यशालाओं आयोजित कि जा सकती है जिसे  नियोजन और कानून के प्रशिक्षित पेशेवर सुचारु रूप से किर्यान्वयन करें.
  • कमजोर वर्ग के  समूहों के विचारों को विशेष ध्यान दिया जाये..
  • मुद्दों की सही जानकारी और आगे कि विश्लेषण के लिए लोगों के राय लिखकर, रिकॉर्ड कर रखा जा सकता है.

 

 

आशा है कि आप इसे अमली जमा पहनने कि कोशिश करेंगे. मुझे खुशी होगी कि मेरा कुछ सुझाव आपलोगों को पसंद आयें और सबसे बड़ी बात कि उसे अमल में लाया जाये.  

 

जनता कि सेवा में सदा समर्पित!

आप का . . .

शशिकांत निशांत शर्मा

भौतिक योजना विभाग

योगना तथा वास्तु विद्यालय , नई दिल्ली 110002

संपर्क सूत्र: snsharma.spa@gmail.com

                 +91-9958-037-8887

 

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