
मै एक भौतिक योजना विभाग, योजना तथा वास्तु विद्यालय का छात्र हू. मै अपने शोध पत्र में सहभागितापूर्ण नियोजन का अध्यन किया जिसमे हमने देल्ल्ही के मास्टर प्लान के आपत्ति व् सुझाव; शहरी विकास योजना तथा स्थानीय क्षेत्र योजना का अध्यन किया.
हम सोचतें है कि हमारी अध्यन का परिणाम मास्टर प्लान को और भी सहभागितापूर्ण बनाने में मदगार सावित् हो सकता है.
यह बड़े आश्चर्य की बात है कि कोई कैसे अपनी राय दे जब तक उसे पता ही न हो कि क्या और क्यों हो रहा है. प्रबंध समिति कार्य दल बने थे मस्टर प्लान को लागु करने के लिए लिकिन उनका कोई रिपोर्ट आम आदमी के पहुच में नहीं है. एक फ़िलहाल में ही आप ने सुझाव समिति (मलिन बस्ती पुर्नार्वास व् सामाजिक घर) के बैठक की जानकारी प्राधिकार के साईट पे डाला है. पर इससे तो पूरी बात सामने नहीं आती.
जबतक जनता को ये पता ही नहीं होगा कि मास्टर प्लान में क्या प्रावधान था उसे किस हद तक हासिल किया गया. भू-उपयोग योजना क्या था और अभी क्या स्तिथि है, आम आदमी तो केवल अपनी ही समस्याएं बताएगा. फिर नतीजा क्या होगा. इस बार ७००० के जगह ७ लाख आपत्ति व् सुझाव आ जायेंगे पर पर उससे कुछ खास नहीं होने वाला.
ये बहुत हो गया लोगों के लिए योजना बनाना अब समय कि मांग है कि हम लोगों के साथ योजना बनाये ताकि योजना प्रभवि और लाभदायक हो. इस उपलक्ष्य में हमे कुछ सुझाव लिखे है गौर फरमाएगा.
किसी भी योजना में लोगों कि भागीदारी के लिए चार स्तर होतें है. जो कि निम्लिखित है.
जब जन भागीदारी कि प्रथम कड़ी है सुचना का अदना-प्रदान जिसका विवरण मै निचे लिख रहा हू .
आशा है कि आप इसे अमली जमा पहनने कि कोशिश करेंगे. मुझे खुशी होगी कि मेरा कुछ सुझाव आपलोगों को पसंद आयें और सबसे बड़ी बात कि उसे अमल में लाया जाये.
जनता कि सेवा में सदा समर्पित!
आप का . . .
शशिकांत निशांत शर्मा
भौतिक योजना विभाग
योगना तथा वास्तु विद्यालय , नई दिल्ली 110002
संपर्क सूत्र: snsharma.spa@gmail.com
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