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May 04

तुम्हें याद करना ....ना तो मेरी आदत ना ही मजबूरी

rajtela1 Posted by: rajtela1 in हिंदी कविता Print PDF

तुम्हें याद करना

ना तो मेरी आदत

ना ही मजबूरी

वो जीने के लिए

आवश्यकता मेरी

ह्रदय को

धड़कने के लिए रक्त

साँस के लिए हवा

मन को

जीवित रखने के लिए

तुम्हें याद करना

सपनों में देखना

मेरे लिए आवश्यक है

ह्रदय धडक भी ले

साँस भी आ रही हो

अगर मन निर्जीव हो

तो मैं जीवित कैसे हो

सकता हूँ

फिर खुद को जीवित

रखने के लिए

अगर तुम्हें याद करता हूँ

सपने में देखता हूँ

तो क्या अनुचित करता हूँ

तुम्हें तो प्रसन्न होना

चाहिए

मेरे साथ होते हुए

बिना भी

मेरे जीवन की कारक हो

बिना तुम्हारी यादों के

मेरा अस्तित्व ही

नहीं है

04-05-2012
495-10-05-12

प्रेम, मोह, याद

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