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Jan 15

महा कुम्भ के पवन पर्व पर नवगीतों से शिव अभिषेक --भोलानाथ

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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अमुआं की

गुफरी  में

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Jan 15

हिंदी साहित्य में नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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पिछले  अंक में जैसा की शम्भुनाथ जी ने लिखा है  ,जिसका विवर ण दिए जाने पर यह शंका की जा सकती है की अज्ञेय द्वारा संकलित और सम्पादित  चार सप्तकों के अनुकरण के रूप में अथवा नवगीत नमक अक नये काव्यान्दोलन का नेतृत्व ग्रहण करने के उदेश्य से  ये तीन नवगीत दशक प्रकाशित किये जा रहे हैं!किन्तु वास्तविकता यह है की अज्ञेय द्वारा सम्पादित सप्तकों में और इन नवगीत दसको में कोई तुल्नीयता या सद्रश्यता नहीं है !अज्ञेय ने लगभग  आठ आठ वर्षों की अवधि के अंतराल से प्रथम तीन सप्तकों का सम्पादन प्रकाशन किया !अल्पज्ञात नये यश प्रार्थी कविओं को प्रोत्साहित करने ,ख्याति दिलाने और स्थापित करने के उद्देश्य से उन्होंने तार सप्तक १९४३ दूसरा सप्तक १९५१ और तीसरा सप्तक १९५८ का का प्रकाशन किया और तीसरे प्रकाशन के लगभग दो दशक बाड चौथे सप्तक का प्रकाशन  संपादन शायद इस दृष्टि से किया की कहीं  लोग यह न समझ लें की नै कविता का युग समाप्त हो गया है या नै कविता का नेतृत्व यागे के हांथों से छीन गया है !इसके विपरीत प्रस्तुत योजना के अंतर्गत तीनों दशकों का प्रकाशन अक ही साथ नवगीत के प्रादुर्भाव के तीन दशकों के के उपरांत हो रहा है !...................क्रमशः

 

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Jan 15

अब और कथा नहीं सुननी ---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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बहुत हुआ

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Jan 15

Creamy Garlic Mushroom Recipe | Mushroom Garlic Recipe | How to make Garlic Mushroom

catchmypost Posted by: catchmypost in Food | Drinks | Recipe | Comments

 

Garlic Mushroom Recipe

Hi Today I am going to share Creamy Garlic Mushroom Recipe with you. Mushroom Garlic recipe has lots different variant as per different cuisines like Chinese, Italian and Indian. Though there is not much difference. This recipe of Garlic Mushroom is rich in taste and very easy to cook.  So this is how make Garlic Mushroom

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Jan 15

तिरंगे तू गवाह है

Dilip Posted by: Dilip in हिंदी कविता | Comments
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तिरंगे तू गवाह है,
तेरे ही सामने , संविधान ने
जाती ,धर्म ,वर्ण- रहित सामाज कि व्यवस्था दी थी,
लेकिन, आज नागरिकों से सबसे पहला सवाल होता है -
S/C हो S/T हो OBC हो या गुर्जर हो,और तो और,
तेरे बन्दों का विश्वास भी नहीं करते,
प्रमाण पत्र मांगते हैं,और प्रमाणित करवाते हैं,
उन लोगों से जिनकी प्रमाणिकता खुद संदेहास्पद है,
ऐ तिरंगे सावधान,
तू ही कुछ कर, नहीं तो एक दिन,
ये,तुझसे ही,तेरी जाती पूछेंगे.

Jan 15

पिछड़े वर्ग को उठाया जा रहा है | व्यंग्य

Dilip Posted by: Dilip in हिंदी कविता | Comments
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आरक्षण पर व्यंग्य कविता

एक गधे को, जींस की पेंट ,लिनेन की शर्ट ,
रीबोक के जूते, पहनाये जा रहे हैं
प्रोफेसनल डिग्री, अपोइन्टमेंट लेटर,
मारुती कार थमाई जा रही है
विश्वस्त सूत्रों से पता चला है,
पिछड़े वर्ग को उठाया जा रहा है |

Jan 15

English Poem about Sufi - Wisdom of Sufi

nafees unnisa Posted by: nafees unnisa in English Poems | Comments
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Jan 14

कुम्भ मेले पर - महाकुम्भ --नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in हिंदी कविता | Comments
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मकर संक्रांति

और महाकुम्भ के

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Jan 14

" राह ''

praveen Posted by: praveen in हिंदी कविता | Comments
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" राह ''


क्षितिज  के उस पार भी ,


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Jan 14

" आरम्भ ''

praveen Posted by: praveen in हिंदी कविता | Comments
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" आरम्भ ''

विषाद के इस काल में,

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Jan 14

हिंदी साहित्य में भोला नाथ के नवगीत (२४) शिव अभिषेक कुम्भ के पावन पर्व पर

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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अमुआं की

गुफरी  में

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Jan 13

देश को हांकने लगा है इलैक्ट्रॉनिक मीडिया

tejwanig Posted by: tejwanig in लेख | विचार | Comments
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वे दिन लद गए, जब या तो आकाशवाणी पर देश की हलचल का पता लगता था या फिर दूसरे दिन अखबारों में। तब किसी विवादास्पद या संवेदनशील खबर के लिए लोग बीबीसी पर कान लगाते थे। देश के किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर राय कायम करने और समाज को उसका आइना दिखाने के साथ दिशा देने का काम अखबार किया करते थे, जिसमें वक्त लगता था। आजादी के आंदोलन में समाचार पत्रों की ही अहम भूमिका रही। मगर अब तो सोसासटी हो या सियासत, उसकी दशा और दिशा टीवी का छोटा पर्दा ही तय करने लगा है। और वह भी लाइव। देश में पिछले दिनों हुई प्रमुख घटनाओं ने तो जो हंगामेदार रुख अख्तियार किया, वह उसका जीता जागता सबूत है।
आपको ख्याल होगा कि टूजी व कोयला घोटाले की परत दर परत खोलने का मामला हो या भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर अन्ना हजारे व बाबा रामदेव के आंदोलन को हवा देना, नई पार्टी आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को ईमानदारी का राष्ट्रीय प्रतीक बनाना हो या दिल्ली गेंग रेप की गूंज व आग को दिल्ली के बाद पूरे देश तक पहुंचाना, या फिर महिलाओं को लेकर राजनीतिक व धार्मिक नेताओं की बयानों का बारीक पोस्टमार्टम, हर गरमागरम मुद्दे का पूरा स्वाद चखाने को इलैक्ट्रॉनिक मीडिया तत्पर रहता है। देश के बड़े समाचार पत्र किसी विषय पर अपनी राय कायम कर पाएं, उससे पहले तो हर छोटे-मोटे मुद्दे पर टीवी पर गरमागरम बहस हो चुकती है। यहां तक कि जो बहस संसद में होनी चाहिए, वह भी टीवी पर ही निपट लेती है। उलटे ज्यादा गरमागरम और रोचक अंदाज में, क्योंकि वहां संसदीय सीमाओं के ख्याल की भी जरूरत नहीं है। अब तो संसद सत्र की जरूरत भी नहीं है। बिना उसके ही देश की वर्तमान व भविष्य टीवी चैनलों के न्यूज रूम में तय किया जाने लगा है। संसद से बाहर सड़क पर कानून बनाने की जिद भी टीवी के जरिए ही होती है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जब कि देश के किसी मुद्दे के बाल की खाल न उधेड़ी जाती हो। हर रोज कुछ न कुछ छीलने को चाहिए। अब किसी पार्टी या नेता को अपना मन्तव्य अलग से जाहिर करने की जरूरत ही नहीं होती, खुद न्यूज चैनल वाले ही उन्हें अपने स्टूडियो में बुलवा लेते हैं। हर चैनल पर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों व विषय विशेषज्ञों का पैनल बना हुआ है। इसी के मद्देनजर पार्टियों ने भी अपने प्रवक्ताओं को अलग-अलग चैनल के लिए नियुक्त किया हुआ है, जो रोजाना हर नए विषय पर बोलने को आतुर होते हैं। अपनी बात को बेशर्मी के साथ सही ठहराने के लिए वे ऐसे बहस करते हैं, मानों तर्क-कुतर्क के बीच कोई रेखा ही नहीं है। यदि ये कहा जाए कि अब उन्हें फुल टाइम जॉब मिल गया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। लोगों को भी बड़ा मजा आने लगा है, क्योंकि उन्हें सभी पक्षों की तू-तू मैं-मैं चटपटे अंदाज में लाइव देखने को मिलने लगी है। खुद ही विवादित करार दिए गए बयान विशेष पर बयान दर बयान का त्वरित सिलसिला चलाने की जिम्मेदारी भी इसी पर है। अफसोसनाक बात तो ये है कि मदारी की सी भूमिका अदा करने वाले बहस संयोजक एंकर भी लगातार आग में घी का डालने का काम करते हैं, ताकि तड़का जोर का लगे।
बेशक, इस नए दौर में टीवी की वजह से जनता में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी है। अब आम आदमी अपने आस-पास से लेकर दिल्ली तक के विषयों को समझने लगा है। नतीजतन जिम्मेदार नेताओं और अधिकारियों की जवाबदेही भी कसौटी पर कसी रहती है। इस अर्थ में एक ओर जहां पारदर्शिता बढऩा लोकतंत्र के लिए सुखद प्रतीत होता है, तो दूसरी वहीं इसका दुखद पहलु ये है कि बयानों के नंगेपन का खुला तांडव मर्यादाओं को तार-तार किए दे रहा है। हालत ये हो गई है कि किसी सेलिब्रिटी के आधे-अधूरे बयान पर ही इतना हल्ला मचता है कि मानो उसके अतिरिक्त इस देश में दूसरा कोई जरूरी मुद्दा बाकी बचा ही न हो। पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन राव भागवत व आध्यात्मिक संत आशाराम बापू के महिलाओं के किसी अलग संदर्भ में दिए अदद बयान पर जो पलटवार हुए तो उनकी अब तक कमाई गई सारी प्रतिष्ठा को धूल चटा दी गई। एक मन्तव्य से ही उनके चरित्र को फ्रेम विशेष में फिट कर दिया गया। बेलाग बयानों की पराकाष्ठा यहां तक पहुंच गई कि आशाराम बापू ने टीवी चैनलों को कुत्तों की संज्ञा दे दी और खुद को हाथी बता कर उनकी परवाह न होने का ऐलान कर दिया। पारदर्शिता की ये कम पराकाष्ठा नहीं कि उसे भी उन्होंने बड़े शान से दिखाया।
विशेरू रूप से महिलाओं की मर्यादा और उनकी स्वतंत्रता, जो स्वच्छंदता चाहती है, का मुद्दा तो टीवी पर इतना छा गया कि विदेश में बैठे लोग तो यही सोचने लगे होंगे कि भारत के सारे पुरुष दकियानूसी और बलात्कार को आतुर रहने वाले हैं। तभी तो कुछ देशों के दूतावासों को अपने नागरिकों को दिल्ली में सावधान रहने की अपील जारी करनी पड़ी। आधी आबादी की पूरी नागरिकता स्थापित करने के लिए महिलाओं के विषयों पर इतनी जंग छेड़ी गई, मानो टीवी चैनलों ने महिलाओं को सारी मर्यादाएं लांघने को प्रेरित कर स्वतंत्र सत्ता स्थापित करवाने का ही ठेका ले लिया हो। इस जद्दोजहद में सांस्कृतिक मूल्यों को पुरातन व अप्रासंगिक बता कर जला कर राख किया जाने लगा। क्या मजाल जो किसी के मुंह से महिलाओं की मर्यादा व ढंग के कपड़े पहनने की बात निकल जाए, उसके कपड़े फाड़ दिए गए। जिन के भरोसे ये देश चल रहा है, उन भगवान को ही पता होगा कि इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए कैसा देश बनने जा रहा है। अपनी तो समझ से बाहर है। नेति नेति।
-तेजवानी गिरधर

Jan 13

मधुशाला पर कविता - मधुशाला

priyanka Posted by: priyanka in हिंदी कविता | Comments
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चाहत   की   मधुशाला में ,

डूबा  हर एक साकी हँ !
प्याला  लबो तक लगाने की ,
न  जाने कितनी बेताबी  है !1
ये प्याले को  पाने की दीवानगी है ,
य हाला मे उतरने का कोई नशा ,
अगूर  माशल कर ,
जब आ जाती है मदिरा हाला तक !!
हाला  तक लगाने की ,
होर  सी लगी है  मधुशाला ,
सैकरो  लोगो को ,
एक अकेली झेलती मधुशाला !!!
बदल  गया   हँ ,
हर एक पैमाना ,
मधुशाला से जुड़ गया हँ ,
हर एक आशिक -दीवाना !!!!
अब  दिले - दास्ता  बताने का ,
आशिके -मिजाज  है ये प्याला ,!!!!
प्याला हाल तक लगा कर ,
कबि आशिकी का जश्न  मानते ,
तो कबि भुलाने के  लिए ,
हाला से उतारते है !!!!
हर एक मर्ज की ,दावा  है अब ये मधुशाला !!!!!priyanka barsaiya

 

Jan 13

वक़्त वक़्त की बात

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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  वक़्त वक़्त की बात एक जवां मच्छर ने,कहा एक बूढ़े से,
                              आपके जमाने में ,बड़ी सेफ लाइफ थी  ना 'हिट 'ना' डी .डी .टी .'न ही 'आल आउट 'था,
                              और ना धुवां देती ,कछुवे की कोइल थी एक आह ठंडी भर,बोला बूढा मच्छर,
                               वो तो सब ठीक मगर ,मौज तुम उड़ाते हो आज के जमाने में ,है इतना खुल्लापन ,
                               जहाँ चाहो मस्ती से ,चुम्बन ले पाते हो हमारे जमाने में,एक बड़ी मुश्किल थी,
                               औरतों का सारा तन,रहता था ,ढका ,ढका तरस तरस जाते थे ,मुश्किल से कभी,कहीं,
                                 चूमने का मौका हम,पाते थे यदा कदा समुन्दर के तट पर या फिर स्विमिंग पूलों पर ,                                                खतरा भी कम है और रौनक भी ज्यादा है तुम तो हो खुश किस्मत ,इस युग में जन्मे हो ,
                                   तुम्हे मौज मस्ती के,मौके भी ज्यादा  है मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Jan 13

कल और आज

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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      कल और आज याद हमें आये है वो दिन ,
                            जब ना होते थे कंप्यूटर चालीस तक के सभी पहाड़े,
                          बच्चे रटते रहते दिन भर ना था इंटरनेट उन दिनों ,
                          और न होते थे मोबाईल कभी ताश या फिर अन्ताक्षरी ,
                           बच्चे ,खेला करते सब मिल ना था टी वी ,ना एम .पी ,थ्री ,
                           ना ही मल्टीप्लेक्स ,माल थे ना ही को- एजुकेशन था ,
                            हम सब कितने मस्त हाल थे हाथों में स्कूल बेग और ,
                             कोपी ,कलम, किताबें होती रामायण के किस्से होते ,
                             देश प्रेम की बातें होती रहता था परिवार इकठ्ठा,
                            पांच ,सात  होते थे बच्चे घर में चहल पहल रहती थी ,
                             सच वो दिन थे कितने अच्छे अब तो छोटे छोटे से ,बच्चों,,
                                    के हाथों में है मोबाईल कंप्यूटर और लेपटोप के ,
                                  बिना पढाई करना मुश्किल नन्हे बच्चे जो कि अपना ,
                               फेस तलक ना खुद धो सकते खोल फेस बुक,सारा दिन भर,
                                   मित्रों  से  है बातें  करते   अचरज,छोटे बच्चों में भी ,
                                 पनप रहा ये नया ट्रेंड  है उमर दस बरस की भी ना है ,
                                 दस से ज्यादा गर्ल फ्रेंड है मेल भेजते फीमेलों को,
                                  बात करें स्काईप पर मिल ट्वीटर  पर ट्विट करते रहते ,
                                  हरदम ,हाथों में मोबाईल हम खाते थे लड्डू,मठरी ,
                                   ये खाते है पीज़ा ,बर्गर ईयर फोन लगा कानों में,
                                   गाने सुनते रहते दिन भर क्योकि अब ,एक बेटा ,बेटी ,
                                     एकाकी वाला बचपन है मम्मी,पापा ,दोनों वर्किंग ,
                                   भाग दौड़ वाला जीवन है 'हाय'हल्लो 'की फोर्मलिटी में,
                                  अपनापन  हो गया गौण है इतना 'आई' हो गया हावी ,                                             'आई पेड 'है ,'आई फोन 'है ये ही अगर  तरक्की है तो ,
                                    इससे हम पिछड़े अच्छे थे मिलनसार थे,भोलापन था ,
                                        प्यार मोहब्बत थी,सच्चे थे      मदन मोहन बाहेती'घोटू'
                    

Jan 13

संक्रांति पर

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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      संक्रांति पर
आया सूर्य मकर में ,आये नहीं तुम मगर
 पर्व उत्तरायण का आया ,पर दिया न उत्तर तिल तिल कर दिल जला,खिचड़ी  बाल हो गये और गज़क जैसे हम खस्ता हाल  हो गये अगन लोहड़ी की है तपा रही ,इस तन को अब आ जाओ ,तड़फ रहा मन,मधुर मिलन को मकर संक्रांति की शुभ कामनाये 
घोटू 
 

Jan 12

ललछर बंदरिया ---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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हाँथहाथ और

पांव की

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Jan 11

हिंदी साहित्य में नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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पिछले  अंक में जैसा की शम्भुनाथ जी ने लिखा है  ,जिसका विवर ण दिए जाने पर यह शंका की जा सकती है की अज्ञेय द्वारा संकलित और सम्पादित  चार सप्तकों के अनुकरण के रूप में अथवा नवगीत नमक अक नये काव्यान्दोलन का नेतृत्व ग्रहण करने के उदेश्य से  ये तीन नवगीत दशक प्रकाशित किये जा रहे हैं!किन्तु वास्तविकता यह है की अज्ञेय द्वारा सम्पादित सप्तकों में और इन नवगीत दसको में कोई तुल्नीयता या सद्रश्यता नहीं है !अज्ञेय ने लगभग  आठ आठ वर्षों की अवधि के अंतराल से प्रथम तीन सप्तकों का सम्पादन प्रकाशन किया !अल्पज्ञात नये यश प्रार्थी कविओं को प्रोत्साहित करने ,ख्याति दिलाने और स्थापित करने के उद्देश्य से उन्होंने तार सप्तक १९४३ दूसरा सप्तक १९५१ और तीसरा सप्तक १९५८ का का प्रकाशन किया और तीसरे प्रकाशन के लगभग दो दशक बाड चौथे सप्तक का प्रकाशन  संपादन शायद इस दृष्टि से किया की कहीं  लोग यह न समझ लें की नै कविता का युग समाप्त हो गया है या नै कविता का नेतृत्व यागे के हांथों से छीन गया है !इसके विपरीत प्रस्तुत योजना के अंतर्गत तीनों दशकों का प्रकाशन अक ही साथ नवगीत के प्रादुर्भाव के तीन दशकों के के उपरांत हो रहा है !...................क्रमशः

 

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Jan 11

Tathata

Varna Posted by: Varna in Inspirational | Motivational | Comments
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Jan 10

फ़ौज का सिपाही है ---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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फ़ौज का सिपाही है किसकी लापरवाही है सिपाही होते हैं अपना सिर कटाकर शहीद होने के लिये ! राजा राजा है वक्त का तकाजा है किले का मालिक बनाया है देश को चैन की नींद सोने के लिये ! तेल नहीं जंगी तलवार देखिये और देखिये तलवार की ये धार हमने म्यूजियम में कैसा सजाया है, महाराणा और शिवा जी का चरित्र मत पढ़ाईये उनकी तलवारों ने उन्हें उम्र भर कितना भगाया है, हम जानते हैं राजाराजा का धरम पहचानते हैं फौजियों के अलावा नहीं कोई मुरीद खोने के लिये ! फ़ौज का सिपाही है किसकी लापरवाही है सिपाही होते हैं अपना सिर कटाकर शहीद होने के लिये ! राजा राजा है वक्त का तकाजा है किले का मालिक बनाया है देश को चैन की नींद सोने के लिये ! शेर का सिर लायेगा कौन मांद में हाँथ डालेगा कौन धड ले आये हैं हम कैसे बहुत बड़ी भाग है, तलब किया है जंगल के रक्षक को उसने बताया खोज जारी है बर्फीली राख में ढंकी मुंदी आग है, दे दी सलामी शहादत से सूखा आँखों का पानी शहीद दिवस शेष रहा तस्वीरी दीद रोने के लिये ! फ़ौज का सिपाही है किसकी लापरवाही है सिपाही होते हैं अपना सिर कटाकर शहीद होने के लिये ! राजा राजा है वक्त का तकाजा है किले का मालिक बनाया है देश को चैन की नींद सोने के लिये ! सम्राट का बयान नहीं आया दोस्ती की चिराग में और तेल डालेंगे या देंगे शनीचर को दान, भारत की गरिमा और भंगिमा दोनों है दाव पर कब तक पीना है पीड़ा और सहना है कसईया अपमान, फेंकें गुलाल नोंचें डाढ़ी के बाल बंज़र जमीन है शेष बची नहीं कोई उम्मीद बोने के लिये ! फ़ौज का सिपाही है किसकी लापरवाही है सिपाही होते हैं अपना सिर कटाकर शहीद होने के लिये ! राजा राजा है वक्त का तकाजा है किले का मालिक बनाया है देश को चैन की नींद सोने के लिये ! भोलानाथ डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर ,जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत संपर्क -०९४२५८८५२३४

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