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Jan 18

Homemade food to cure hangover | How to get rid of Hangover Fast | how to get over a hangover fast

geeky Posted by: geeky in Life Style | Health | Comments

 

How to get rid of hangover 

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Jan 18

Sonnet - I (O shall you love me through my mellowed years)

Valerie Dohren Posted by: Valerie Dohren in English Poems | Comments
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O shall you love me through my mellowed years
When I am no more as the rising sun
As less my visage to your heart endears –
The sweetness age thus ever has undone
And wilt thou fix your smile upon my face
Enjoin your fingers with my weathered hand
Then in your arms yet tenderly embrace
As if my life all time had never spanned
Or shall the years so meet with your disdain
As when you look upon this ag’ed brow
O shall you not see beauty there again
Or know once more the joys that youth endow
    I pray that love may ever so endure
    Unblemished by the years forever more

Jan 18

स्वाभिमान

ghotoo Posted by: ghotoo in हिंदी कविता | Comments
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स्वाभिमान किया प्रयास ,दिखूं  अच्छा ,पर दिख न सका मै ना चाहा था बिकना मैंने, बिक न  सका  मै मेरे आगे था मेरा स्वाभिमान  आ गया मै जैसा भी हूँ,अच्छा हूँ, ज्ञान    आ गया नहीं चाहता था,विनम्र बन,हाथ जोड़ कर अपने चेहरे पर नकली  मुस्कान ओढ़ कर करू प्रभावित उनको और मै उन्हें  रिझाऊ उनसे रिश्ता जोडूं ,अपना  काम बनाऊ पर मै जैसा हूँ,वैसा यदि उन्हें सुहाए मेरे असली रूप रंग में ,यदि अपनाएँ तो ही ठीक रहेगा ,धोका क्यों दूं उनको करें शिकायत ,ऐसा मौका क्यों दूं उनको पर्दा उठ ही जाता,शीध्र बनावट पन  का मिलन हमेशा ,सच्चा होता,मन से मन का मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Jan 18

अपनी अपनी किस्मत

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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       अपनी अपनी किस्मत जब तक बदन में था छुपा ,पानी वो पाक था,
बाहर  जो निकला पेट से ,पेशाब बन गया बंधा हुआ था जब तलक,सौदा  था लाख का, मुट्ठी खुली तो लगता है वो खाक बन गया कितनी ही बातें राज की,अच्छी दबी हुई,
बाहर जो निकली पेट से  ,फसाद बन गया हासिल जिसे न कर सके ,जब तक रहे जगे,
सोये तो ,ख्याल ,नींद में आ  ख्वाब बन गया जब तक दबा जमीं में था,पत्थर था एक सिरफ ,
हीरा निकल के खान से ,नायाब   बन गया कल तक गली का गुंडा था ,बदमाश ,खतरनाक,
नेता बना तो गाँव की वो नाक बन गया काँटों से भरी डाल पर  ,विकसा ,बढ़ा हुआ ,
वो देखो आज महकता  गुलाब बन गया घर एक सूना हो गया ,बेटी  बिदा  हुई,
तो घर किसी का बहू पा ,आबाद हो गया अच्छा है कोई छिप के और अच्छा  कोई खुला,
नुक्सान में था कोई,कोई लाभ बन गया किस का नसीब क्या है,किसी को नहीं खबर,
अंगूर को ही देखलो ,शराब   बन  गया 
मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Jan 18

हम खाने में अव्वल नंबर

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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              हम खाने में  अव्वल नंबर 
कभी समोसा,इडली डोसा,
                      कभी उतप्पम और साम्बर है हम हिन्दुस्तानी दुनिया में ,
                           खाने में  अव्वल नंबर  है 
फल सब्जी को दुनिया में सब,
                             फल सब्जी जैसे खाते है पर हम गाजर,लौकी,आलू,
                             सबका हलवा बनवाते है भला सोच सकता था कोई ,
                            कि  भूरे कद्दू को  लेकर बने आगरे वाला पेठा ,
                           अंगूरी ,केसर का मनहर परवल की सब्जी से भी तो,
                           हम स्वादिष्ट मिठाई बनाते आलू,प्याज और पालक की ,
                           गरमागरम  पकोड़ी खाते आलू की टिक्की खाते है ,
                             आलू बड़ा ,पाँव और भाजी सब्जी से ज्यादा सब्जी के ,
                             व्यंजन खाकर होते राजी खाने की हर एक चीज में ,
                             हम बस देते,लज्जत भर है हम हिन्दुस्तानी दुनिया में ,
                            खाने में अव्वल नंबर  है 
बना दूध से रबड़ी ,खुरचन,
                            कलाकंद और पेड़े  प्यारे दूध फाड़ ,छेने से बनते,
                             चमचम,रसगुल्ले ,रसवाले जमा दूध को दही जमाते,
                                 लस्सी और श्रीखंड खाते 
आइसक्रीम और कुल्फी से ,
                              हम गर्मी से राहत पाते तिल  से बने रेवड़ी ,लड्डू ,
                            खस्ता गज़क ,सर्द मौसम में  मेथी,गोंद ,सौंठ ,मेवे के,
                               लड्डू खूब बनाए  हमने 
काजू,पिस्ता ,ड्राय फ्रूट से,
                               हमने कई मिठाई बनायी ले गुलाब,गुलकंद बनाया ,
                              केसर की खुशबू रंग लायी       कभी खान्खरे ,कभी फाफड़े ,
                              कभी थेपले और पापड है हम हिन्दुस्तानी दुनिया में ,
                            खाने  में अव्वल  नंबर  है 
मैदा सड़ा  ,खमीर उठा कर,
                             अंग्रेजों ने ब्रेड  बनायी लेकिन हमने उस खमीर से ,
                             गरमा गरम जलेबी खायी मोतीचूर बने बेसन से ,
                               लड्डू,बूंदी,सेव,पकोड़ी 
उड़द दाल से बने इमरती ,
                              हमने कोई चीज न छोड़ी आटा ,सूजी ,बेसन ,मैदा ,
                              दाल मूंग की ,या बादामे ऐसी कोई चीज न जिसका ,
                              हलवा  नहीं बनाया हमने बारीक रेशे वाली फीनी ,
                             जाली वाले , घेवर प्यारे  मालपुवे ,मीठे  मलाई के,
                            और गुलाब जामुन मतवाले  चाट ,दही भल्ले ,ललचाते ,
                              मुंह में आता  पानी भर  है हम हिन्दुस्तानी दुनिया में,
                              खाने में अव्वल  नंबर  है मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Jan 17

पीढ़ी दर पीढ़ी---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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पीढ़ी दर पीढ़ी

सदियों का परिवर्तन

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Jan 17

तुम जियो हजारों साल ---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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आदरणीय हमारे पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी जी को उनके जन्म दिन पर शुभ कामनाएं तुम जियो हजारों साल भारत माँ के लाल !
तुम ही तो इस धरती के हल्दी चन्दन और गुलाल !
महक रहे हो बाग़ बगीचे ओंठों के अनुराग ,
दिया दिवाली और दशेहरा तुम ही देश की फाग ,
दुगनी छाती भारत माँ की तुम ही एक मिशाल !
तुम जियो हजारों साल भारत माँ के लाल !
तुम ही तो इस धरती के हल्दी चन्दन और गुलाल !
सारे रंग त्याग के तुमने देशभक्ति का पहना चोला ,
कठिन साधना के साधक तुम मंत्र ह्रदय में सबके घोला ,
शादियों साथ रहो दुनियां के करते रहो कमाल !
तुम जियो हजारों साल भारत माँ के लाल !
तुम ही तो इस धरती के हल्दी चन्दन और गुलाल !
तुम ही तो हो जनमानस की अविरल भाषा,
देश प्रेम की अमित छाप और तुम ही हो परिभाषा , गंगोती बन बहो सदा तुम रहे न धरती कोई मलाल !
तुम जियो हजारों साल भारत माँ के लाल !
तुम ही तो इस धरती के हल्दी चन्दन और गुलाल !
भोलानाथ
डॉ,राधा कृष्णन स्कूल के बगल में
अन अच्.-७ कटनी रोड मैहर ,जिला सतना मध्य प्रदेश .भारत
संपर्क -०९४२५८८५२३४

Jan 17

मधुबन बरसे---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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मधुबन बरसे

सावन भीगीं  

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Jan 17

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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उसे हम बोल क्या बोलें जो दिल को दर्द दे जाये सुकूं दे चैन दे दिल को , उसी को बोल बोलेंगें ..

जीवन के सफ़र में जो मुसीबत में भी अपना हो राज ए दिल मोहब्बत के, उसी से यार खोलेंगें  ..

जब अपनों से और गैरों से मिलते हाथ सबसे हों किया जिसने भी जैसा है , उसी से यार तोलेंगें ..

अपना क्या, हम तो बस, पानी की ही माफिक हैं  मिलेगा प्यार से हमसे ,उसी  के यार होलेंगें ..

जितना हो जरुरी ऱब, मुझे उतनी रोशनी देना  अँधेरे में भी डोलेंगें उजालें में भी डोलेंगें ..  

ग़ज़ल मदन मोहन सक्सेना

Jan 17

ख़ामोशी कब तक

Madans Posted by: Madans in हिंदी कविता | Comments
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ख़ामोशी कब तक


दामिनी ,अमानत या फिर कोई और
क्या फर्क पड़ता है नाम से
हर लड़की होती है
घर आँगन की दुलारी, परिवार की प्यारी,
सबका मन मोहने वाली, सबका दुःख बाँटने वाली...
मात-पिता की लाडली, भाई की दुलारी
जब किसी दामिनी का हुआ
चलती बस में या कहीं पर भी बलात्कार
तो दिखती है
पुलिस प्रशाशन की नाकामी और हार
उसके बाद
युबा और युब्तियों की हमदर्दी और न्याय के लिए प्रदर्शन
नेताओं और पुलिस का निन्दनीय आचरण
हमेशा की तरह मामले को दवाने की साजिश
पुलिस का ब्यबहार गैरजरूरी और शरमशार
भारत और दिल्ली की जनता एक बार फिर से लाचार .
मैं भी तीन तीन बेटियों का पिता हूँ
शिंदे मनमोहन और आर पी एन सिंह का ये कहना
हर मौके की तरह इस बार भी मनमोहन का मौन रहना
पहले तो गाँव में
खेतों खलिआनों में ,
अकेले जाने में डर लगता था
किन्तु अब तो
हद ही हो गयी
दामिनी का बलात्कार ही नहीं हुआ
लगता है कि
हमारे संस्कार , ब्यबस्था और जीवन दर्शन का ही बलात्कार हो गया
क्यों दिल्ली में आज माँ पिता को डर लगता है
जब लडकी बाहर जाती है
क्या पता कि एक दिन यह मासूम कली दरिंदो के हाथ लग जाये
मेरी प्यारी ,दुलारी मासूम कली
उनकी हवस का शिकार बन जाए
जब जब ऐसी शर्मनाक घटना होती है
पबित्र गंगा हर घर में रोती है
दिल्ली की हर एक यमुना डरी डरी होती है
क्यों फिर सरस्वती खून के आंसू बहाती है
और पवित्रता के संगम का क़त्ल करके
क्यों यह दरिन्दे शराब में नहाते हैं
क्या इन्हें कानून का खौफ़ नहीं है
या फिर इनको स्त्री का सम्मान करने का संस्कार ही नहीं मिला
इसके लिए कौन दोषी है
हम ,आप,कानून या फिर समाज
या फिर इस देश के रहनुमाँ ,कानून बनाने बाले या कोई और
आज मंथन करना जरुरी है कि
हम लोंग किस तरफ जा रहें है
किसी ने सच ही कहा है कि
कन्या पहले देवी है,
फिर बेटी ,बहन ,पत्नी और माँ है,
अब गंगा की पवित्रता का अपमान करो
घर घर में गंगा है , उसका आदर सम्मान करो
कोई पुरुष अकेला नहीं हैं उसकी बेटी है ,बहन है ,माँ है
आखिर क्यों नहीं सोचतें है ऐसा शर्मनाक कार्य करने से पहले
कि मेरी अपनी के साथ
कल को खुदा करें ऐसा हो जाये
तो मुझ पर
मेरी अपनी पर क्या गुजरेगी
आखिर क्यों
अब करा करता है शोषण ,आजकल बीरों का पोरुष मानकर बिधि का विधान, जुल्म हम सब सह गए हैं ?
और थक गएँ हैं सुनते सुनते बीरता के किस्से
फिर क्यों सुन चुके है बहुत किस्से वीरता पुरुषार्थ के
हर रोज फिर किसी द्रौपदी का खिंच रहा क्यों चीर है ?
जुल्म, अन्याय को देख कर हम सब खामोश क्यों हो जाते हैं . अब समय गया है की
हम सभी अपने कल को बदलने के लिए प्रयासरत हों .
प्रस्तुति:
मदन मोहन  सक्सेना

 


Jan 16

धुंआ धुंआ घर ---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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धुंआ धुंआ घर

फला नहीं अनुष्ठान

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Jan 16

Black Feathers

marie Posted by: marie in English Poems | Comments
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 I seen this black feather angel in a dream. He was pure evil and it scared me. His were so evil they could send a chill all over you body.

I though to myself this would end badly. To my surprise it did. He walk a slow scarey walking over to were I was seated put his cold stiff hand on my shoulder and he said evil was going in my soul. I was not ware the may soul would speak for it self but it did.

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Jan 16

बिन तुम्हारे

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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      बिन तुम्हारे क्या बतलाऊँ ,बिना तुम्हारे ,    कैसे कटती          मेरी रातें मिनिट मिनिट में नींद टूटती ,मिनिट मिनिट में सपने आते 
बांह पसारूं,तो सूनापन,
                 तेरी बड़ी कमी लगती है बिन ओढ़े सर्दी लगती है,                                        ओढूं तो गरमी  लगती है तेरी साँसों की सरगम बिन,
                        सन्नाटा छाया रहता है करवट करवट ,बदल बदल कर,
                      ये तन अलसाया रहता है ना तो तेरी भीनी खुशबू ,और ना मीठी ,प्यारी बातें क्या बतलाऊँ ,बिना तुम्हारे ,कैसे कटती ,मेरी रातें      कितनी बार,जगा करता हूँ,
                     घडी  देखता,फिर सो जाता तकिये को बाहों में भरता ,
                      दीवाना सा ,मै  हो जाता थोड़ी सी भी आहट होती ,
                    तो एसा लगता  तुम आई संग तुम्हारे जो बीते थे,
                    याद आते वो पल सुखदायी सूना सूना लगता बिस्तर ,ख्वाब मिलन के है तडफाते क्या बतलाऊँ,बिना तुम्हारे,  कैसे कटती ,    मेरी रातें   तुम जब जब, करवट लेती थी,
                       होती थी पायल की रुन झुन बढ़ जाती थी ,दिल की धड़कन ,
                       खनक चूड़ियों की ,प्यारी सुन अपने आप ,अचानक कैसे,
                       बाहुपाश में हम  बंध  जाते बहुत सताती ,जब याद आती ,
                         वो प्यारी  ,मदमाती  राते फिर से वो घडियां  आयेंगी ,दिल को ढाढस ,यही बंधाते क्या बतलाऊँ,बिना तुम्हारे,     कैसे कटती  ,मेरी रातें 
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Jan 16

असर -मौसम का

ghotoo Posted by: ghotoo in Uncategorized | Comments
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     असर -मौसम का आजकल का मौसम ,
ही इतना जालिम है ,
अच्छे भले लोगों की ,कमर तक टूट गयी तुलसी जी को देखो ,
दो महीने पहले ही,
था इनका ब्याह हुआ,और बिलकुल सूख गयी घोटू

Jan 15

महा कुम्भ के पवन पर्व पर नवगीतों से शिव अभिषेक --भोलानाथ

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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अमुआं की

गुफरी  में

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Jan 15

हिंदी साहित्य में नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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पिछले  अंक में जैसा की शम्भुनाथ जी ने लिखा है  ,जिसका विवर ण दिए जाने पर यह शंका की जा सकती है की अज्ञेय द्वारा संकलित और सम्पादित  चार सप्तकों के अनुकरण के रूप में अथवा नवगीत नमक अक नये काव्यान्दोलन का नेतृत्व ग्रहण करने के उदेश्य से  ये तीन नवगीत दशक प्रकाशित किये जा रहे हैं!किन्तु वास्तविकता यह है की अज्ञेय द्वारा सम्पादित सप्तकों में और इन नवगीत दसको में कोई तुल्नीयता या सद्रश्यता नहीं है !अज्ञेय ने लगभग  आठ आठ वर्षों की अवधि के अंतराल से प्रथम तीन सप्तकों का सम्पादन प्रकाशन किया !अल्पज्ञात नये यश प्रार्थी कविओं को प्रोत्साहित करने ,ख्याति दिलाने और स्थापित करने के उद्देश्य से उन्होंने तार सप्तक १९४३ दूसरा सप्तक १९५१ और तीसरा सप्तक १९५८ का का प्रकाशन किया और तीसरे प्रकाशन के लगभग दो दशक बाड चौथे सप्तक का प्रकाशन  संपादन शायद इस दृष्टि से किया की कहीं  लोग यह न समझ लें की नै कविता का युग समाप्त हो गया है या नै कविता का नेतृत्व यागे के हांथों से छीन गया है !इसके विपरीत प्रस्तुत योजना के अंतर्गत तीनों दशकों का प्रकाशन अक ही साथ नवगीत के प्रादुर्भाव के तीन दशकों के के उपरांत हो रहा है !...................क्रमशः

 

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Jan 15

अब और कथा नहीं सुननी ---नवगीत

Bholanath Posted by: Bholanath in Uncategorized | Comments
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बहुत हुआ

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Jan 15

Creamy Garlic Mushroom Recipe | Mushroom Garlic Recipe | How to make Garlic Mushroom

catchmypost Posted by: catchmypost in Food | Drinks | Recipe | Comments

 

Garlic Mushroom Recipe

Hi Today I am going to share Creamy Garlic Mushroom Recipe with you. Mushroom Garlic recipe has lots different variant as per different cuisines like Chinese, Italian and Indian. Though there is not much difference. This recipe of Garlic Mushroom is rich in taste and very easy to cook.  So this is how make Garlic Mushroom

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Jan 15

तिरंगे तू गवाह है

Dilip Posted by: Dilip in हिंदी कविता | Comments
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तिरंगे तू गवाह है,
तेरे ही सामने , संविधान ने
जाती ,धर्म ,वर्ण- रहित सामाज कि व्यवस्था दी थी,
लेकिन, आज नागरिकों से सबसे पहला सवाल होता है -
S/C हो S/T हो OBC हो या गुर्जर हो,और तो और,
तेरे बन्दों का विश्वास भी नहीं करते,
प्रमाण पत्र मांगते हैं,और प्रमाणित करवाते हैं,
उन लोगों से जिनकी प्रमाणिकता खुद संदेहास्पद है,
ऐ तिरंगे सावधान,
तू ही कुछ कर, नहीं तो एक दिन,
ये,तुझसे ही,तेरी जाती पूछेंगे.

Jan 15

पिछड़े वर्ग को उठाया जा रहा है | व्यंग्य

Dilip Posted by: Dilip in हिंदी कविता | Comments
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आरक्षण पर व्यंग्य कविता

एक गधे को, जींस की पेंट ,लिनेन की शर्ट ,
रीबोक के जूते, पहनाये जा रहे हैं
प्रोफेसनल डिग्री, अपोइन्टमेंट लेटर,
मारुती कार थमाई जा रही है
विश्वस्त सूत्रों से पता चला है,
पिछड़े वर्ग को उठाया जा रहा है |

<< Start < 41 42 43 44 45 47 49 50 > End >>

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