
मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?
तुम जिंदगी तुम बंदगी तुम हर अदा अंदाज भी
तुम ताजगी तुम सादगी तुम अंजाम भी आगाज भी
तुम रौशनी तुम ही तमस तुम साज भी आवाज भी
तुम मौत भी और जिंदगी और तुम मेरे दिल का करार भी
मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?
तुम रात में चमकते चाँद हो और चांदनी का प्यार भी
तुम हर दर्द आँसूं में हो और मौत का पैगाम भी
तुम हर कष्ट में शामिल भी हो और मेरे दिल की आह भी
और मेरे सफ़र की मजिल हो तुम और मेरे दिल की चाह भी
मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?
मेरी सुबह के सूरज हो तुम और मेरी रात क चाँद भी
मेरे तो तुम ही खुदा और तुम ही भगवान् भी
वीणा की इस झंकार में जीवन की इस मंझदार में
साहिल भी हो संगीत भी बैरी भी हो और मीत भी
मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?
चाहत की तुम हो इन्तेहाँ और मेरे इंतज़ार की
पराकाष्ठा हो प्रेम की और मेरे विश्वास की
अगर तुम मेरे आँसुं में हो तो तुम मेरी मुस्कान भी
तुम जीत भी हो हार भी धिक्कार भी पुरूस्कार भी
मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?