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My Personal Diary

This blog is dedicated to Mr. Manoj dixit. he is the muse behind my works..............
May 03

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

ReetuSharma Posted by: ReetuSharma in Personal | Comments
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मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

तुम जिंदगी तुम बंदगी तुम हर अदा अंदाज भी
तुम ताजगी तुम सादगी तुम अंजाम भी आगाज भी
तुम रौशनी तुम ही तमस तुम साज भी आवाज भी
तुम मौत भी और जिंदगी और तुम मेरे दिल का करार भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

तुम रात में चमकते चाँद हो और चांदनी का प्यार भी
तुम हर दर्द आँसूं में हो और मौत का पैगाम भी
तुम हर कष्ट में शामिल भी हो और मेरे दिल की आह भी
और मेरे सफ़र की मजिल हो तुम और मेरे दिल की चाह भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

मेरी सुबह के सूरज हो तुम और मेरी रात क चाँद भी
मेरे तो तुम ही खुदा और तुम ही भगवान् भी
वीणा की इस झंकार में जीवन की इस मंझदार में
साहिल भी हो संगीत भी बैरी भी हो और मीत भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

चाहत की तुम हो इन्तेहाँ और मेरे इंतज़ार की
पराकाष्ठा हो प्रेम की और मेरे विश्वास की
अगर तुम मेरे आँसुं में हो तो तुम मेरी मुस्कान भी
तुम जीत भी हो हार भी धिक्कार भी पुरूस्कार भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?
Apr 28

मेरी ख्वाहिश

ReetuSharma Posted by: ReetuSharma in Personal | Comments
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काश यह वक़्त ऐसा थमे की तुम मेरी बाहोँ में रहो
मैं तुम्हें जीती रहूँ और तुम मुझे पीते रहो
काश हर सुबह ऐसी हो जैसे खिलता हो चेहरा तेरा
बाहोँ में तेरे सिमट जायुं मैं खींचे जो प्यार से तू आँचल मेरा

काश यह उम्र कभी ना कटे जवानी के फूल रोज खिलते रहें
ख्यालों के पुलंदे तुम बुनते रहो  रोज रोज ख़्वाबों मैं हम मिलते रहें

काश यह रिश्ता उम्र भर का हो प्रेम रस में मैं तुमको डुबोती रहूँ
प्यार की हर रोह एक नयी फसल उगे प्यार के बीज मैं रोज बोती रहूँ

काश यह जवानी कभी न कटे घटा बन के तुम पे बरसती रहूँ
 दोनों बाहोँ में भर के समेटो मुझे मैं माला के मोती सी बिखरती रहूँ

काश मोहब्बत का मेला लगे जहाँ प्यार का हर खिलौना बिके
नजर तुमपे सबकी बेईमान हो पर पाने का हक बस मुझे ही मिले

काश वोह पल जिंदगी का आखरी हो देखूं तुझे और नजर न हटे
हाथ थामे मेरा तुम बैठे रहो और वोह एक पल पूरी उम्र सा कटे
Apr 28

तलाश

ReetuSharma Posted by: ReetuSharma in Uncategorized | Comments
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Apr 24

यह कौन सा मोड़ है जिंदगी का?

ReetuSharma Posted by: ReetuSharma in Personal | Comments
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यह कौन सा मोड़ है जिंदगी का?

जहां मैं हूँ तुम हो और प्यार का एह्सास है खो चुकी हूँ



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Apr 18

नजर

ReetuSharma Posted by: ReetuSharma in Uncategorized | Comments
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हम आपकी एक नजर को तरस गये
दर्द आसूं बन के आँखों से बरस गये
यह बेरुखी दिल में तीर सी चुभती है
हम आपको खोने के ख्याल से ही सिहर गये

जिस राह पर में तेरा इंतज़ार करती रही
उस राह पर चल सब अपने-अपने घर गये
दिया बन के तेरी जिंदगी में रोशन रही हूँ मैं
तुम मेरी ही जिंदगी में इंतज़ार का अँधेरा कर गये

आप हमसे हमेशा यूँ जो रहते हैं खफ़ा -खफ़ा
इसी सोच की आंधी में हम टूट के बिखर गये
काश यह होता मुमकिन हाथ बाधा के थाम लेती
तुमको तेरी इसी कमी से आखों में आंसूं भर गये

मेरी इस हालत पे खुदा -ऐ -रसूल को भी नहीं रहम
वोह भी बन के पत्थर की मूरत बस खामोश ही रह गये
दर्द-ऐ-दिल के इलाज को हकीम की थी तलाश
पर क्या करे कोई जब हकीम ही मर्ज के सौदागर बन गये
Apr 15

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

ReetuSharma Posted by: ReetuSharma in Personal | Comments
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मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

तुम जिंदगी तुम बंदगी तुम हर अदा अंदाज भी
तुम ताजगी तुम सादगी तुम अंजाम भी आगाज भी
तुम रौशनी तुम ही तमस तुम साज भी आवाज भी
तुम मौत भी और जिंदगी और तुम मेरे दिल का करार भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

तुम रात में चमकते चाँद हो और चांदनी का प्यार भी
तुम हर दर्द आँसूं में हो और मौत का पैगाम भी
तुम हर कष्ट में शामिल भी हो और मेरे दिल की आह भी
और मेरे सफ़र की मजिल हो तुम और मेरे दिल की चाह भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

मेरी सुबह के सूरज हो तुम और मेरी रात क चाँद भी
मेरे तो तुम ही खुदा और तुम ही भगवान् भी
वीणा की इस झंकार में जीवन की इस मंझदार में
साहिल भी हो संगीत भी बैरी भी हो और मीत भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

चाहत की तुम हो इन्तेहाँ और मेरे इंतज़ार की
पराकाष्ठा हो प्रेम की और मेरे विश्वास की
अगर तुम मेरे आँसुं में हो तो तुम मेरी मुस्कान भी
तुम जीत भी हो हार भी धिक्कार भी पुरूस्कार भी

मैं तुम्हें कैसे बतायुं की तुम मेरे लिए क्या हो?

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