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Category >> शायरी
Oct 09

वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments

वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो

दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना हों
कर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया करो

पद पैसे की इच्छा बुरी तो नहीं मार डालो जमीर कहाँ ये सही
जैसा देखेंगे बच्चे वही सीखेंगें ,पैर अपने माँ बाप के भी दबाया करो

काला कौआ भी है काली कोयल भी है ,कोयल सभी को भाती क्यों है
सुकूँ दे चैन दे दिल को ,अपने मुहँ में ऐसे ही अल्फ़ाज़ लाया करो

जब सँघर्ष है तब ही मँजिल मिले ,सब कुछ सुबिधा नहीं यार जीबन में है
जिस गली जिस शहर में चला सीखना , दर्द उसके मिटाने भी जाया करो

यार जो भी करो तुम सँभल करो , सर उठे गर्व से ना झुके शर्म से
वक़्त रुकता है किसके लिए ये “मदन” वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो

ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना

Sep 04

ग़ज़ल(दूसरो का किस तरह नुकसान हो )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल(दूसरो का किस तरह नुकसान हो )

ख्बाब था मेहनत के बल पर , हम बदल डालेंगे किस्मत
ख्बाब केवल ख्बाब बनकर, अब हमारे रह गए हैं



कामचोरी , धूर्तता, चमचागिरी का अब चलन है
बेअरथ से लगने लगे है ,युग पुरुष जो कह गए हैं





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Aug 27

ग़ज़ल(इश्क क्या है)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल(इश्क क्या है)
हर सुबह रंगीन अपनी शाम हर मदहोश है
वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला


चार पल की जिंदगी में ,मिल गयी सदियों की दौलत
जब मिल गयी नजरें हमारी ,दिल से दिल अपना मिला



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Apr 25

ग़ज़ल (इशारे)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments

ग़ज़ल (इशारे)

किसी के दिल में चुपके से रह लेना तो जायज है
मगर आने से पहले कुछ इशारे भी किये होते

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Apr 22

ग़ज़ल (दुआओं का असर)

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ग़ज़ल (दुआओं का असर)


हुआ इलाज भी मुश्किल ,नहीं मिलती दबा असली
दुआओं का असर होता दुआ से काम लेता हूँ


मुझे फुर्सत नहीं यारों कि माथा टेकुं दर दर पे
अगर कोई डगमगाता है उसे मैं थाम लेता हूँ


खुदा का नाम लेने में क्यों मुझसे देर हो जाती
खुदा का नाम से पहले ,मैं उनका नाम लेता हूँ


मुझे इच्छा नहीं यारों कि  मेरे पास दौलत हो
सुकून हो चैन हो दिल को इसी से काम लेता हूँ


सब कुछ तो बिका करता मजबूरी के आलम में
मैं सांसों के जनाज़े को सुबह से शाम लेता हूँ


सांसे है तो जीवन है तभी है मूल्य मेहनत का
जितना हो  जरुरी बस उसी का दाम लेता हूँ


ग़ज़ल :ग़ज़ल (दुआओं का असर)
मदन मोहन सक्सेना

Apr 03

ग़ज़ल(क्या खोया और क्या पाया)

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ग़ज़ल(क्या खोया और क्या पाया)


अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना

जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल 


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Jan 02

ग़ज़ल ( प्यारे पापा डैड हो गए )

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ग़ज़ल ( प्यारे पापा डैड हो गए )


माता मम्मी अम्मा कहकर बच्चे प्यार जताते थे




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Jan 02

ग़ज़ल (ये रिश्तें)

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ग़ज़ल (ये रिश्तें)

ये रिश्तें काँच से नाजुक जरा सी चोट पर टूटे
बिना रिश्तों के क्या जीवन ,रिश्तों को संभालों तुम

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Dec 16

ग़ज़ल ( कैसे कैसे रँग)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल ( कैसे कैसे रँग)

कभी अपनों से अनबन है कभी गैरों से अपनापन
दिखाए कैसे कैसे रँग मुझे अब आज जीबन है

ना रिश्तों की ही कीमत है ना नातें अहमियत रखतें
रिश्तें हैं उसी से आज जिससे मिल सके धन है

सियासत में नहीं  युबा , बुढ़ापा काम पाता है
समय ये आ गया कैसा दिल में आज उलझन है

सच्ची बात किसको आज सुनना अच्छी लगती है
सच्ची  बात सुनने को ब्याकुल अब हुआ मन है

जीबन के सफ़र में जो मुसीबत में भी अपना हो
मदन साँसें जिंदगी मेरी  उसको ही समर्पन है
प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना



Nov 29

गज़ल ( अहसास)

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गज़ल ( अहसास)

हर इंसान के जीवन में ,ऐसे कुछ अहसास होते हैं
भले मुद्दत गुजर जाये , बे दिल के पास होते हैं

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Nov 21

ग़ज़ल (ज़माने की हकीकत)

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ग़ज़ल (ज़माने की हकीकत)

दुनिया में जिधर देखो हजारो रास्ते दीखते
मंजिल जिनसे मिल जाए बह रास्ते नहीं मिलते

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Nov 13

ग़ज़ल (जग की रीत)

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ग़ज़ल (जग की रीत)
पाने को आतुर रहतें हैं खोने को तैयार नहीं है
जिम्मेदारी ने मुहँ मोड़ा ,सुबिधाओं की जीत हो रही
साझा करने को ना मिलता , अपने गम में ग़मगीन हैं
स्वार्थ दिखा जिसमें भी यारों उससे केवल प्रीत हो रही
कहने का मतलब होता था ,अब ये बात पुरानी है
जैसा देखा बैसी बातें .जग की अब ये रीत हो रही
अब खेलों में है राजनीति और राजनीति ब्यापार हुई
मुश्किल अब है मालूम होना ,किस से किसकी मीत हो रही
क्यों अनजानापन लगता है अब, खुद के आज बसेरे में
संग साथ की हार हुई और तन्हाई की जीत हो रही
ग़ज़ल प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

Nov 12

मुक्कद्दर आज रूठा है

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जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती है
मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है

कहूं कैसे मैं ये तुमसे बहुत मुश्किल गुजरा है
भरी दुनियां में बिन तेरे नहीं कोई सहारा है

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Nov 07

ऐसे कुछ अहसास

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ऐसे कुछ अहसास

ऐसे कुछ अहसास होते हैं हर इंसान के जीवन में
भले मुद्दत गुजर जाये , बे दिल के पास होते हैं

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Nov 04

ग़ज़ल (दीवारें ही दीवारें )

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दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों
बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.
उलझन आज दिल में है कैसी आज मुश्किल है
समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं
जिसे देखो बही क्यों आज मायूसी में रहता है
दुश्मन दोस्त रंग अपना, समय पर आज बदले हैं
जीवन के सफ़र में जो पाया है सहेजा है
खोया है उसी की चाह में ,ये दिल क्यों मचले है
समय ये आ गया कैसा कि मिलता अब समय ना है
रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं













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Oct 15

कुछ शेर

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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कुछ शेर

 

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Oct 08

ग़ज़ल (कुर्सी और वोट) )

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ग़ज़ल (कुर्सी और वोट)
कुर्सी और वोट की खातिर काट काट के सूबे बनते
नेताओं के जाने कैसे कैसे , अब ब्यबहार हुए
दिल्ली में कोई भूखा बैठा, कोई अनशन पर बैठ गया
भूख किसे कहतें हैं नेता उससे अब दो चार हुए नेता क्या अभिनेता क्या अफसर हो या साधू जी
पग धरते ही जेल के अन्दर सब के सब बीमार हुए
कैसा दौर चला है यारों गंदी हो गयी राजनीती अब
अमन चैन से रहने बाले दंगे से दो चार हुए
दादी को नहीं दबा मिली और मुन्ने का भी दूध खत्म
कर्फ्यू में मौका परस्त को लाखों के ब्यापार हुए
तिल का ताड़ बना डाला क्यों आज सियासतदारों ने
आज बापू तेरे देश में, कैसे -कैसे अत्याचार हुए
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में सब भाई भाई
ख्बाजा साईं के घर में , ये बातें क्यों बेकार हुए
ग़ज़ल प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

Oct 07

ग़ज़ल (सत्ता की जुगलबंदी)

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सत्ता की जुगलबंदी

कैसी सोच अपनी है किधर हम जा रहें यारों
गर कोई देखना चाहें बतन मेरे बो आ जाये

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Sep 30

ग़ज़ल (बोल)

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Sep 23

ग़ज़ल (ये कैसा परिवार हुआ)

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ग़ज़ल (ये कैसा परिवार हुआ)

 

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Sep 17

ग़ज़ल (सेक्युलर कम्युनल)

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जब से बेटे जबान हो गए
मुश्किल में क्यों प्राण हो गए

किस्से सुन सुन के संतों के
भगवन भी हैरान हो गए

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Sep 13

मर्ज ऐ इश्क

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वक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियें
दर्द से ग़मगीन वक़्त यू ही गुजर जाता है


जीने का नजरिया तो, मालूम है उसी को बस
अपना गम भुलाकर जो हमेशा मुस्कराता है



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Aug 20

ग़ज़ल (ये कल की बात है )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल (ये कल की बात है )

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Jul 23

ग़ज़ल(ये कल की बात है )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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 ग़ज़ल(ये कल की बात है )

 

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Jul 02

ग़ज़ल(शून्यता)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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जिसे चाहा उसे छीना , जो पाया है सहेजा है
उम्र बीती है लेने में ,मगर फिर शून्यता क्यों हैं

सभी पाने को आतुर हैं ,नहीं कोई चाहता देना
देने में ख़ुशी जो है, कोई बिरला सीखता क्यों है

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Jun 05

ग़ज़ल (जग की रीत)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल (जग की रीत)

पाने को आतुर रहतें हैं खोने को तैयार नहीं है
जिम्मेदारी ने मुहँ मोड़ा ,सुबिधाओं की जीत हो रही

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May 30

ग़ज़ल(ये कैसा परिवार हुआ.)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल(ये कैसा परिवार हुआ)



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May 28

ग़ज़ल (हकीक़त)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल (हकीक़त)

चेहरे की हकीक़त को समझ जाओ तो अच्छा है
तन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है

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May 14

ग़ज़ल (जालिम दुनिया)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल ((जालिम दुनिया))




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May 10

ग़ज़ल (दिल के पास)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ग़ज़ल (दिल के पास)




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