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Category >> शायरी
Jun 05

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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पाने को आतुर रहतें हैं  खोने को तैयार नहीं है

मुहँ मोड़ा जिम्मेदारी ने   ,सुबिधाओं की जीत हो रही.

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May 30

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ताई ताऊ , दादा दादी ,मौसा मौसी  दूर हुएँ अब
हम दो और हमारे दो का ये कैसा परिवार हुआ.

रिश्तें नातें -प्यार की बातें , इनकी परबाह कौन करें
सब कुछ पैसा ले डूबा ,अब जाने क्या ब्यबहार हुआ ..

मेरे जिस टुकड़े को  दो पल की दूरी बहुत सताती थी
जीवन के चौथेपन में अब ,बह सात समन्दर पार हुआ .

दिल में दर्द नहीं उठता है भूख गरीबी की बातों से
धर्म देखिये कर्म देखिये सब कुछ तो ब्यापार हुआ …
  मेरे प्यारे गुलशन को न जानें किसकी नजर लगी है
युबा को अब काम नहीं है बचपन अब बीमार हुआ ….

जाने कैसे ट्रेन्ड हो गए मम्मी पापा फ्रेंड हो गए
शर्म हया और लाज ना जानें आज कहाँ दो चार हुआ …..

ताई ताऊ , दादा दादी ,मौसा मौसी  दूर हुएँ अब
हम दो और हमारे दो का ये कैसा परिवार हुआ.

ग़ज़ल प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

May 28

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों  मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है .

किसी का दर्द पाने की तमन्ना जब कभी उपजे 
जीने का नजरिया फिर उसका बदल जाता है  ..

चेहरे की हकीकत को समझ जाओ तो अच्छा है तन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है ...

किसको दोस्त माने हम और किसको गैर कह दें हम 
 जरुरत पर सभी का जब हुलिया बदल जाता है ....

दिल भी यार पागल है ना जाने दीन दुनिया को 
किसी पत्थर की मूरत पर अक्सर मचल जाता है .....

क्या बताएं आपको हम अपने दिल की दास्ताँ 
जितना दर्द मिलता है ये उतना संभल जाता है ......


ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना  

May 15

ग़ज़ल (ऐतबार)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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जालिम लगी दुनिया हमें हर शख्श  बेगाना लगा
हर पल हमें धोखे मिले अपने ही ऐतबार से

नफरत से की गयी चोट का हर जख्म हमने सह लिया
घायल हुए उस रोज हम जिस रोज मारा प्यार से

प्यार के एहसास  से जब जब रहे हम बेखवर तब तब लगा हम को की हम जी रहे बेकार से

इजहार राज ए  दिल का बह जिस रोज मिल करने लगे
उस रोज से हम पा रहे खुशबु भी देखो खार से

जब प्यार से इंकार हो तो इकरार से है बो भला
आने लगेगा तब मज़ा फिर  इकरार का इंकार से

क्या कहूँ कि आज कल का ये समय कैसा तो है
आदमी ब्यापार से तो प्यार करता , दूर रहता प्यार से

ग़ज़ल :
मदन मोहन सक्सेना

May 14

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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जालिम लगी दुनिया हमें हर शख्श बेगाना लगा

हर पल हमें धोखे मिले अपने ही ऐतबार से


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May 10

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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दिल के पास हैं लेकिन निगाहों से बह ओझल हैं
क्यों असुओं से भिगोने का है खेल जिंदगी।

जिनके साथ रहना हैं ,नहीं मिलते क्यों दिल उनसे
खट्टी मीठी यादों को संजोने का है खेल जिंदगी।

किसी के खो गए अपने, किसी ने पा लिए सपनें
क्या पाने और खोने का है खेल जिंदगी।

उम्र बीती और ढोया है, सांसों के जनाजे को
जीवन सफर में हँसने रोने का है खेल जिंदगी।

किसी को मिल गयी दौलत, कोई तो पा गया शोहरत
मदन बोले , काटने और बोने का ये खेल जिंदगी।

















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May 07

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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May 05

dosti..

Dr.Sweet Angel Posted by: Dr.Sweet Angel in शायरी | Comments
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दोस्ती रूह,दोस्ती  खुदा और  इश्क  की शुरुवात  है 

दोस्ती मंदिर  ,मस्जिद और मुहब्बत  का आगाज़ है 

Apr 08

ग़ज़ल(दीवारें ही दीवारें)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों
बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.

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Apr 03

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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दिल के पास हैं लेकिन निगाहों से बह ओझल हैं
क्यों असुओं से भिगोने का है खेल जिंदगी। 


जिनके साथ रहना हैं ,नहीं मिलते क्यों दिल उनसे
खट्टी मीठी यादों को संजोने का है खेल जिंदगी।


किसी के खो गए अपने, किसी ने पा लिए सपनें
क्या पाने और खोने का है खेल जिंदगी।


उम्र बीती और ढोया है, सांसों के जनाजे को
जीवन सफर में हँसने रोने का
है  खेल जिंदगी।
किसी को मिल गयी दौलत, कोई तो पा गया शोहरत
मदन बोले , काटने और बोने का ये खेल जिंदगी।

ग़ज़ल प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना
Mar 25

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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सोचकर हैरान हैं  हम , क्या हमें अब हो गया है
चैन अब दिल को नहीं है ,नींद क्यों  आती नहीं है

बादियों में भी गये  हम ,शायद आ जाये सुकून
याद उनकी अब हमारे दिल से क्यों  जाती नहीं है

हाल क्या है आज अपना ,कुछ खबर हमको नहीं है देखकर मेरी ये हालत  , तरस क्यों खाती नहीं है

हाल क्या है आज उनका ,क्या याद उनको है हमारी किस तरह कैसे कहें हम  मिलती हमें पाती नहीं है 
चार पल की जिंदगी लग रही सदियों की माफ़िक
चार पल की जिंदगी क्यों  बीत अब जाती नहीं है 
किस तरह कह दे मदन जो बात उन तक पहुंच जाये
बात अपने दिल की क्यों  अब लिखी जाती नहीं है

 
ग़ज़ल :
मदन मोहन सक्सेना

Mar 22

ग़ज़ल(होली है)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज यारों कब मिले मौका  अब  छोड़ों ना कि होली है.
रंगों का आज मौसम है छायी अब खुमारी है चलों सब एक रंग में हो कि आयी आज होली है
क्या जीजा हों कि साली हों ,देवर हो या भाभी हो दिखे रंगनें में रंगानें में ,सभी मशगूल होली है
ना शिकबा अब रहे कोई ,ना ही दुश्मनी पनपे गले अब मिल भी जाओं सब, कि आयी  आज होली है  
तन से तन मिला लो अब मन से मन भी मिल जाये
प्रियतम ने प्रिया से आज मन की बात खोली है
प्रियतम क्या प्रिय क्या अब सभी रंगने को आतुर हैं हम भी बोले होली है तुम भी बोलो होली है .

ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना


Mar 15

ग़ज़ल (नजरिया)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों  मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है .

किसी का दर्द पाने की तमन्ना जब कभी उपजे 
जीने का नजरिया फिर उसका बदल जाता है  ..

चेहरे की हकीकत को समझ जाओ तो अच्छा है तन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है ...

किसको दोस्त माने हम और किसको गैर कह दें हम 
 जरुरत पर सभी का जब हुलिया बदल जाता है ....

दिल भी यार पागल है ना जाने दीन दुनिया को 
किसी पत्थर की मूरत पर अक्सर मचल जाता है .....

क्या बताएं आपको हम अपने दिल की दास्ताँ 
जितना दर्द मिलता है ये उतना संभल जाता है ......


ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना  

Mar 08

ग़ज़ल( मिली दौलत ,मिली शोहरत )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों  मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है .

किसी का दर्द पाने की तमन्ना जब कभी उपजे 
जीने का नजरिया फिर उसका बदल जाता है  ..

चेहरे की हकीकत को समझ जाओ तो अच्छा है तन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है ...

किसको दोस्त माने हम और किसको गैर कह दें हम 
 जरुरत पर सभी का जब हुलिया बदल जाता है ....

दिल भी यार पागल है ना जाने दीन दुनिया को 
किसी पत्थर की मूरत पर अक्सर मचल जाता है .....

क्या बताएं आपको हम अपने दिल की दास्ताँ 
जितना दर्द मिलता है ये उतना संभल जाता है ......


ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना  


Mar 08

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ
चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ..
इस आस में बीती उम्र कोई हमे अपना कहे .
अब आज के इस दौर में ये दिल भी बेगाना हुआ
जिस रोज से देखा उन्हें मिलने लगी मेरी नजर
आखो से मय पीने लगे मानो की मयखाना हुआ
इस कदर अन्जान हैं हम आज अपने हाल से
हमसे मिलकरके बोला आइना ये शख्श बेगाना हुआ
ढल नहीं जाते हैं लब्ज यूँ ही रचना में कभी
कभी ग़ज़ल उनसे मिल गयी कभी गीत का पाना हुआ

ग़ज़ल प्रस्तुति:

मदन मोहन सक्सेना
Feb 27

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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वक़्त की साजिश नहीं तो और किया बोले इसे
पलकों में सजे सपने ,जब गिरकर चूर हो जाये
अक्सर रोशनी में खोटे सिक्के भी चला करते न जाने कब खुदा को क्या मंजूर हो जाए भरोसा है हमें यारो की कल तस्बीर बदलेगी
गलतफमी जो अपनी है बह सबकी दूर हो जाये लहू से फिर रंगा दामन न हमको देखना होगा जो करते रहनुमाई है, बह सब मजदूर हो जाये
शिकायत फिर मुक्कदर से ,किसी को भी नहीं होगी
जब हर पल मुस्कराने को हम मजबूर हो जाये...
शोहरत की ख़ुशी मिलती और तन्हाई का गम मिलता
जब चर्चा में रहे कोई और मशहूर हो जाये .......
ग़ज़ल :
मदन मोहन सक्सेना

Feb 26

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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बोलेंगे  जो  भी  हमसे  बो ,हम ऐतवार कर  लेगें  जो कुछ  भी उनको प्यारा  है ,हम उनसे प्यार कर  लेगें


बो  मेरे   पास  आयेंगे   ये  सुनकर  के   ही  सपनो  में क़यामत  से क़यामत तक हम इंतजार कर लेगें

मेरे जो भी सपने है और सपनों में जो सूरत है
उसे दिल में हम सज़ा करके नजरें चार कर लेगें


जीवन भर की सब खुशियाँ ,उनके बिन अधूरी है अर्पण आज उनको हम जीबन हजार कर देगें

हमको प्यार है उनसे और करते प्यार बो हमको गर  अपना प्यार सच्चा है तो मंजिल पार कर लेगें
 

प्रस्तुति:












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Feb 21

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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जिसे चाहा उसे छीना , जो पाया है सहेजा है
उम्र बीती है लेने में ,मगर फिर शून्यता क्यों हैं


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Feb 15

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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मेरे हमनसी मेरे हमसफ़र .तुझे खोजती है मेरी नजर तुम्हें हो ख़बर की न हो ख़बर मुझे सिर्फ तेरी तलाश है
मेरे साथ तेरा प्यार है ,तो जिंदगी में बहार है मेरी जिंदगी तेरे दम से है ,इस बात का एहसाश है
तेरे  इश्क का है ये असर ,मुझे सुबह शाम की न ख़बर मेरे दिल में तू रहती सदा , तू  ना   दूर है ना पास है

ये तो हर किसी का खयाल  है ,तेरे रूप की न मिसाल है
कैसें कहूं तेरी अहमियत, मेरी जिंदगी में खास है

तेरी झुल्फ जब लहरा गयीं , काली घटायें  छा गयीं हर पल तुम्हें देखा करू ,आँखों में फिर भी प्यास  है  
   ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना
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Feb 12

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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जिनका प्यार पाने में हमको ज़माने लगे
बह  अब नजरें मिला के   मुस्कराने लगे

राज दिल का कभी जो छिपाते थे हमसे
बातें  दिल की हमें बह बताने  लगे
अपना बनाने को  सोचा  था जिनको
बह अपना हमें अब   बनाने लगे

जिनको देखे बिना आँखे रहती थी प्यासी
बह अब नजरों से हमको पिलाने लगे

जब जब देखा उन्हें उनसे नजरे मिली
गीत हमसे खुद ब खुद बन जाने लगे

प्यार पाकर के जबसे प्यारी दुनिया रचाई
क्यों हम दुनिया को तब से भुलाने लगे

गीत ग़ज़ल जिसने भी मेरे देखे या सुने
तब से शायर बह हमको बताने लगे

हाल देखा मेरा तो दुनिया बाले ये बोले
मदन हमको तो दुनिया से बेगाने लगे ...

ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना

Jan 17

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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उसे हम बोल क्या बोलें जो दिल को दर्द दे जाये सुकूं दे चैन दे दिल को , उसी को बोल बोलेंगें ..

जीवन के सफ़र में जो मुसीबत में भी अपना हो राज ए दिल मोहब्बत के, उसी से यार खोलेंगें  ..

जब अपनों से और गैरों से मिलते हाथ सबसे हों किया जिसने भी जैसा है , उसी से यार तोलेंगें ..

अपना क्या, हम तो बस, पानी की ही माफिक हैं  मिलेगा प्यार से हमसे ,उसी  के यार होलेंगें ..

जितना हो जरुरी ऱब, मुझे उतनी रोशनी देना  अँधेरे में भी डोलेंगें उजालें में भी डोलेंगें ..  

ग़ज़ल मदन मोहन सक्सेना

Jan 10

फैसला .......

praveen Posted by: praveen in शायरी | Comments
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                    फैसला

 

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Jan 02

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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सजा क्या खूब मिलती है , किसी से दिल लगाने की
तन्हाई की महफ़िल में आदत हो गयी गाने की

हर पल याद रहती है , निगाहों में बसी सूरत तमन्ना अपनी रहती है खुद को भूल जाने की

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Dec 21

आगमन नए दौर का

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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आगमन नए दौर का आप जिसको कह रहे
बो सेक्स की रंगीनियों की पैर में जंजीर है

सुन चुके है बहुत किस्से वीरता पुरुषार्थ के
हर रोज फिर किसी द्रौपदी का खिंच रहा क्यों चीर है

खून से खेली है होली आज के इस दौर में
कह रहे सब आज ये नहीं मिल रहा अब नीर है

मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी
ये ब्यथा अपनी नहीं हर एक की ये पीर है

आज के हालत में किस किस से हम बचकर चले
प्रशं लगता है सरल पग़ज़लर ये बहुत गंभीर है

चाँद रुपयों की बदौलत बेचकर हर चीज को
आज हम आबाज देते की बेचना जमीर है
ग़ज़ल :
मदन मोहन सक्सेना

Dec 14

ग़ज़ल(मेरे मालिक मेरे मौला )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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मेरे मालिक मेरे मौला  ये क्या दुनिया बनाई है किसी के पास सब कुछ है मगर बह खा नहीं पाये
तेरी दुनियां में कुछ बंदें करते काम क्यों गंदें कि किसी के पास कुछ भी ना, भूखे पेट सो जायें
जो सीधे सादे रहतें हैं मुश्किल में क्यों रहतें है
तेरी बातोँ को तू जाने, समझ अपनी ना कुछ आये।

ना रिश्तों की महक दिखती ना बातोँ में ही दम दीखता
क्यों मायूसी ही मायूसी जिधर देखो नज़र आये
तुझे पाने की कोशिश में कहाँ कहाँ मैं नहीं घूमा
जब रोता बच्चा मुस्कराता है तू ही तू नजर आये
गुजारिश अपनी सबसे है कि  जीयो और जीने दो ये जीवन कुछ पलों का है पता कब मौत आ जाये
 
ग़ज़ल प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

Dec 11

ग़ज़ल (खेल जिंदगी।)

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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किसी के खो गए अपने  किसी ने पा लिए सपनें क्या पाने  और खोने का है खेल जिंदगी।

दिल के पास हैं लेकिन निगाहों से बह  ओझल हैं क्यों असुओं से भिगोने का है खेल जिंदगी।

उम्र बीती और ढोया है सांसों के जनाजे को जीवन   सफर में  हँसने  रोने का  खेल जिंदगी।

जिनके साथ रहना हैं नहीं मिलते क्यों दिल उनसे खट्टी मीठी  यादों को संजोने का है खेल जिंदगी।

किसी को मिल गयी दौलत कोई तो पा गया शोहरत मदन कहता कि  काटने और बोने का ये खेल जिंदगी।
ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना

Nov 29

पुराणी शायरी

LOve and Hate Posted by: LOve and Hate in शायरी | Comments
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कुछ करे तो भी खुदा है 
कुछ न करे तो खुदा फिर वही 
कुछ क्यूँ करे वो तेरे कहेने से 
कुछ तो नहीं पास जो चाह उसकी 






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Nov 23

तलाश करने से

praveen Posted by: praveen in शायरी | Comments
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तलाश करने से 

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Nov 06

ग़ज़ल (इलाज )

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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हुआ इलाज भी मुश्किल ,नहीं मिलती दबा असली दुआओं का असर होता  दुआ से काम लेता हूँ

मुझे फुर्सत नहीं यारों कि  माथा टेकुं दर दर पे
अगर कोई डगमगाता  है  उसे मैं थाम लेता हूँ
खुदा का नाम लेने में क्यों  मुझसे  देर हो जाती
खुदा का नाम से पहले मैं उनका नाम लेता हूँ

मुझे इच्छा नहीं यारों की मेरे पास दौलत हो
सुकून हो चैन हो दिल को इसी से काम लेता हूँ

सब कुछ तो  बिका करता  मजबूरी के आलम में
सांसों के जनाज़े  को सुबह से शाम लेता हूँ
सांसे है तो जीवन है तभी है मूल्य मेहनत  का जितना  है जरुरी बस उसी का दाम लेता हूँ
ग़ज़ल :
मदन मोहन सक्सेना

Nov 05

ग़ज़ल

Madans Posted by: Madans in शायरी | Comments
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रंगत इश्क की क्या है ,ये बो ही जान सकता है
दिल से दिल मिलाने की ,जुर्रत जो किया होगा

तन्हाई में जीना तो उसका मौत से बद्तर
किसी के साथ ख्बाबों में ,जो इक  पल भी जिया होगा
दुनिया में न जाने क्यों ,पी -पी कर के जीते है बही समझेगा मय पीना, जो नजरो से पिया होगा

दर्दे दिल को दीवाने क्यों सीने से लगाते है
मुहब्बत में किसी ने ,शायद उसको दे दिया होगा..

ग़ज़ल:
मदन मोहन सक्सेना

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