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May 04

याद करके खवाबों में बुलाया न करो

shashikantnishantsharma Posted by: shashikantnishantsharma in हिंदी कविता Print PDF



याद करके खवाबों में बुलाया न करो 

रेत पर  लिख  के  मेरा  नाम  मिटाया  न  करो 

आँखें  सच  बोलती  हैं , प्यार  छुपाया  न  करो

जो बात दिल में हो सुए जुबान पे लाया करो 

ये मुमकिन है कि जो नजरों से दूर हो 

हालात से मजबूर हो या मगरूर हो 

मन के दरीचों को खुला रखो यु दीवारे न बनाया करो 

दिल के आएने में झांक कर देखो  

कही वही हमनशीं रु-ब-रु हो

दिल कि ख्वाहिशों को यु न दबाया करो 

माना कि चाँद बहुत दूर है 'साहिल' 

पर चाहत का हाथ बढाया तो करो 

वक़्त अनमोल है यु जाया न करो  

लोग  हर  बात  का  अफसाना  बना  लेते  हैं 

सब  को  हाल -ए-दिल  सुनाया  न  करो 

ये  ज़रूरी  नहीं  हर  शख्स  फ़रिश्ता  ही  हो 

प्यार  के  ज़ख्म  अमानत  हैं  दिखाया  न  करो 

शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल' 

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