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Catch My Post कविता प्रतियोगिता जून 2012 का परिणाम PDF Print Write e-mail
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प्रिय कवि बंधुओं और बहनों,

Catch My Post की कविता प्रतियोगिता का निर्णय घोषित  करते हुए आज मुझे बहुत हर्ष हो रहा है, हमारे निर्णायक-मंडल का पूरा दल उन सभी प्रतियोगियों का  हृदय  से  आभारी है जिन्होंने अपनी एक से  बढ़  कर एक  सुन्दर रचनायें इस प्रतियोगिता के लिए  भेजीं, पर पुरुस्कारों का  चयन तो निर्धारित इनामों के अनुसार ही होना था और हम सभी निर्णायकों को काफी कशमकश का भी सामना करना पड़ा | फिर भी सबकी सहमति  से हमने पाँच रचनाकारों  को चुना. जिनका नाम इस पुरुस्कार-तालिका में नहीं हैं उनसे हार्दिक अनुरोध है कि  वे निराश न हों,उनकी रचनायें भी अच्छी थीं पर प्रतियोगिता  की दौड़ में आज अगर  कहीं पीछे रह गयीं तो क्या हुआ उनका मोल कहीं भी कम नहीं हुआ. आज नहीं  तो आगे भी बहुत से अवसर आयेंगे जब उनका भी नाम इस दौड़ में पुरुस्कार के लिए घोषित होगा |

 
शहीदों पर कविता - वो शहीद कहलाते हैं PDF Print Write e-mail
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वो  शहीद कहलाते है....

कई लोंग जीते जी मर जाते हैं

वो मर कर भी जी जाते हैं,

मौत क्या मार सकेगी उनको

क्योंकि वो दूसरो के खातिर वीरगति को पाते है

और  वो  शहीद कहलाते है,

जब हम बूदों से नहाते हैं,तितली से इठलाते हैं

हवाओँ से मुस्कुराते हैं

वो हमारे लिये चुपचाप तप जाते हैं,

तीसरी नेत्र बन हमें राहे दिखाते हैं,

नज़र ना लगे हमें किसी कि

 
प्रेम दिवस पर कविता - वेलेनटाइन डे PDF Print Write e-mail
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प्रेम दिवस के दिन इक बाला, बाल्यावस्था भूल गई
प्रीत के रंग में खुद को रंगकर, सुख सपनो में झूल गई
उम्र अठारह, रंग गोरा और, नैन नक्श सुन्दर से थे
सुन्दर तन पर वस्त्र विदेशी, वही भाव अन्दर भी थे
शर्मो हया की जगह रूपसी, आँखों में चंचलता थी
आवश्यकता थी इक प्रेमी की, मिलने की व्याकुलता थी
मतवाली वो प्रेम दीवानी, प्रेम लहर में उतर चली
प्रेम पत्र हाथों में लेकर, सजन ढूँढने  निकल पड़ी

 
पितृ दिवस पर रचना PDF Print Write e-mail
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स्मृति गीत:     हर दिन पिता याद आते हैं...

हर दिन पिता याद आते हैं...
पग थमते, कर जुड़ जाते हैं 
फल साफल्य चखाए तुमने. 
जब-जब मन कोशिश कर हारा- 
नित घर-घाट दिखाए तुमने. 
अक्षर-शब्द सिखाये तुमने.*

 
गणतंत्र दिवस पर कविता - कैसा ये गणतंत्र PDF Print Write e-mail
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लोकतंत्र की उड़ी है धज्जी, बिखरे सरे तंत्र,

फिर भी गर्व से मना रहे हम, कैसा ये गणतंत्र ?

राष्ट्रभक्ति की खोखली बातें कर हम भूले विकासमंत्र,

मंत्री हैं घोटाले करते और है हावी अफसर तंत्र,

दासों से भी बुरा हाल हमारा, और कहते हम स्वतंत्र !

 
सिपाही पर कविता - शहीद दिवस पर कविता PDF Print Write e-mail
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दीया अंतिम आस का [एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण ]


दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का

वक्त नहीं अब, हास परिहास उपहास का

कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ

पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का

बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभल जाऊँ

दोनों हाथ उठाकर, फिर एक बार तिरंगा लहराऊँ

दुआ अंतिम रब से, कण अंतिम अहसास का

कतरा अंतिम लहू का, क्षण अंतिम श्वास का

 
नारी के लिए कविता - नारी तेरा अस्तित्व PDF Print Write e-mail
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नारी दिवस पर कविता


नारी हूँ मैं

नारी  भी मुझ में

नर भी मुझी में है

तो फिर कमजोर में कैसे


सृष्टि की जननी हूँ  मैं

प्रेम   स्वरूपनी

मन  से  निर्मल

तन  से  चंचल

 
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर कविता - विज्ञान ..तुम हो महान! PDF Print Write e-mail
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विज्ञान...तुम हो महान!

पल पल के साथी हो तुम हमारे...

जब तुम्हे भूले ही नहीं है हम...
तो याद कैसे करे?....
फिर भी तुम हो खास...
इसलिए 28 फेब्रुआरी का दिन...
है 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस!'...शुभ-दिन!
हम मनाते आए है...मनाते रहेंगे!...
तुम ही तो हो हमारे भगवान!...ओ...विज्ञान!  

 
पिता पर कविता- ओ पिता PDF Print Write e-mail
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ओ पिता ......
मैं तुम पर कोई कविता नहीं लिखूंगा, ओ पिता.
जब माँ पर नहीं लिखी तो तुम पर भी क्यों लिखूं?
किसी दिवस को मनाने की भावुकता में भी क्यों बहूँ.
अगर तुम्हारे ऋण को शब्दों से उतार सकता ,
तो ज़रूर लिखता तुम पर कोई कविता.
पर ये तो हो नहीं सकता फिर तुम पर
कविता लिख कर भी क्या होगा?

 
भ्रूण हत्या पर कविता - राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कविता PDF Print Write e-mail
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माँ मुझको मत मारो ना

अजन्मी  ही सही ,
पर तेरी बेटी हूँ ,
भूल मुझसे क्या हुई ?
बतला दो ना ,
माँ मुझको मत मारो ना.

आने दो मुझको धरा पर ,
तेरी गोद में खेलूंगी ,
कभी न सताऊँगी,
ये वादा ले लो ना .
अवसर जो दिया प्रभु ने ,
उसको मत छीनो ना ,
माँ मुझको मत मारो ना.
 
माँ के लिए कविता - तुम रोना नहीं माँ PDF Print Write e-mail
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माँ दिवस पर कविता

माँ ओ माँ ...........

माँ  ...

ओ माँ ..मैं बोल रही हूँ

सुन पा रही हो ना मुझे

...आह सुन लिया तुमने मुझे

ओह माँ कितना खुबसूरत है तुम्हारा स्पर्श बिल्कुल तुम जैसा

मेरी तो अभी आँखे भी  नहीं खुली ...

 
स्वतंत्रता दिवस के लिए कविता - स्वतंत्रता दिवस में करो अपने वीर पूर्वजों का नमन PDF Print Write e-mail
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हमें अपने पूर्वजों का होना चाहिए कृतज्ञ
जिनके वजह से स्वतंत्र होकर देख रहे हैं हम ये जग |

हमे अपने पूर्वजों का करना चाहिए सम्मान
उन्ही के वजह से है आज हमारा ये शान |

क्रांति की लड़ाई में कितने माओं ने अपने बेटे को खोया
जवान बेटे के लाश पर बिलख बिलख कर रोया |

देश को एकजुट देखना
था बहुत लोगों का सपना |

 
कविता नारी पर - नारी PDF Print Write e-mail
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धरा सा धीर गगन से भीर,

नीर से गीले अलक भरे.

अचानक जा पनघट पर कड़ी,
माथ पर माटी कलश धरे.
पीट पट आँचल था फहरात,
सितारे लगे हुए थे जहीन.
वक्ष से चिपका हुआ था शिशु यकृत,
किलकता आहें भरता दीन.
जगत पर खड़ा एक सुकुमार
भर रहा पानी का घाट एक.
 
शहीद पर कविता - एक शहीद बेटे की अपनी माँ के प्रति भावना PDF Print Write e-mail
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शहादत का सेहरा बाँधे, मृत्यु से विवाह रचाता हूँ.
जन्मभूमि की रक्षा खातिर, अपनी भेंट चढ़ाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया से जाता हूँ.

मां देख तिरंगा मेरे तन पर, कितना सुंदर खिलता है.
ऐसा कफ़न मेरी मां बस, किस्मतवालो को मिलता है.
देकर समर्पण मातृभूमि को, गर्व से मैं इठलाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया से जाता हूँ.

 
राष्ट्रीय युवा दिवस पर कविता - युवा शक्ति PDF Print Write e-mail
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आंधी आये, तूफ़ान आये, लक्ष्य  साधे रखना ,

आशाओं का दीप तुम, दिल में जलाये रखना

दुःख सुख की धूप छाँव का डट कर हो सामना

मिलते न फूल सर्वदा काँटों से भी होता गुजरना


उम्मीदों के समंदर में गोते लगाये रहना

आशाओं का दीप तुम, दिल में जलाये रखना


देखो ,सफलता के शिखर पर,  है  तुम्हे चढ़ना

हर अवरोधित पथ को जीत कर, है आगे बढ़ना

भविष्य की स्वर्णिम तस्वीर को साकार करना

नव सृजन,नव क्रान्ति का बिगुल तुम बजाना

 
मात्री दिवस पर मुझे कुछ है कहना PDF Print Write e-mail
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हर वर्ष आता है मात्री दिवस
माँ को बहुत कुछ कहना चाहता हूँ, पर हूँ मैं विवश !

उनके चरणों को मैं छूना चाहता हूँ
प्यार से उन्हें माँ कह कर पुकारना चाहता हूँ
पर हूँ मैं विवश ! पर हूँ मैं विवश !

मुझे तुमहरा ममता न मिला
धर्म कहती है इसे पूर्व जन्म  के पापों का सिला 
कुछ न मैं कह पता क्यूंकि हूँ मैं विवश !

सपनो में मेरे तुम रोज आती  हो
अब तक मुझे लोरियां सुनाती हो 
चाहता हूँ की ये रात न बीते करूँ ऐसा बंदोबस्त , पर हूँ मैं विवश !

 
माँ के लिए कविता PDF Print Write e-mail
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माँ दिवस पर कविता

मेरे आते ही तेरा मुश्कुराना याद है
वो रोते रोते तुझसे लिपट जाना याद है

तेरे हाथों में माँ जादू रहा मीठा कोई
वो अपने हाथों से मुझको खिलाना याद है

तेरा दर छोड़ा मैंने जब पढ़ाई के लिये
मैं खुद भी रोया माँ तुझको रुलाना याद है

मेरे गम अपने आँचल में छुपा तुमने रखे
मेरी खुशियों में तेरा खिलखिलाना याद है

 
स्वतंत्रता दिवस PDF Print Write e-mail
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स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस के
उस अख़बार में
बलात्कार की सनसनी खेज
खबर के निचे ,छपा था
एक विज्ञपन -
 
अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस---नारी PDF Print Write e-mail
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हेय, हीन और तुच्छ समझ बैठा है तू जिस नारी को,
सदा तिरस्कृत नर करता है,
कह अबला बेचारी को,
यदि वह नारि नहीं होती तो हम नर मूढ़ कहां होते,
तब अनबूझे प्रश्नों के सब उत्तर गूढ़ कहां होते,
संभल अभी भी मानव,
सबला नारी शक्ति-हुंकार है,
नारी रणचंडी, दुर्गा, काली आदि-शक्ति अवतार है,
निर्बला न समझो नारी को।

 
शिक्षक दिवस : कुछ विचार - विमर्श PDF Print Write e-mail
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हमने प्रायः हमेशा ही सुना है -
'शिक्षक', 'शिक्षा', 'विद्यार्थी'
और 'विद्या' को शब्दरूप में;
परन्तु क्या गुना है - इनके अर्थ को,
भावार्थ को, शब्दार्थ को, निहितार्थ को?

तो शिक्षक क्या है?
हाड - मांस का एक पुतला ?
या ऐसा कोई व्यक्तित्व जो
कक्षा में खड़े-खड़े, खींचता रहता है -
कोई चित्र, कोई सूत्र, काले से बोर्ड पर,
रंग-विरंगे चाक से?

 
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