प्रेम दिवस के दिन इक बाला, बाल्यावस्था भूल गई प्रीत के रंग में खुद को रंगकर, सुख सपनो में झूल गई उम्र अठारह, रंग गोरा और, नैन नक्श सुन्दर से थे सुन्दर तन पर वस्त्र विदेशी, वही भाव अन्दर भी थे शर्मो हया की जगह रूपसी, आँखों में चंचलता थी आवश्यकता थी इक प्रेमी की, मिलने की व्याकुलता थी मतवाली वो प्रेम दीवानी, प्रेम लहर में उतर चली प्रेम पत्र हाथों में लेकर, सजन ढूँढने निकल पड़ी
मिले एक से एक मगर, कोई उसको रास नहीं आया ऐसा कोन युवक था जो, उसके पास नहीं आया भंवरों से घिरी हुई कली को, कोई साथी ना मिल पाया खिलते हुए गुलशन में उसके, कोई गुल हाथ नहीं आया तभी अचानक एक सुदर्शन, युवक नज़र उसे आया देख के उसको मृगनयनी के, मन में कुछ कुछ हो आया स्वस्थ दुरुस्त और तंदुरुस्त, युवक की छवि निराली थी आँखों में भारत दीखता था, चेहरे पर छाई लाली थी देख के उसको युवती ने, प्रेम निवेदन उसे किया बिना लाज संकोच के उसको, प्रेम पत्र वह सोंप दिया पड़कर प्यार भरी पाती, वो दिलवाला भी ड़ोल उठा लेकिन उसके अन्दर था जो, हिन्दुस्तानी बोल उठा बोला वो हिन्द का बेटा यूँ , ओ प्रेम की मारी प्यारी सुन अपने दिल की सुनने वाली, अब इक बात हमारी सुन लाज शर्म ही इक औरत का, सबसे सुन्दर गहना है अफ़सोस मुझे है तूने ये, गहना अब तक ना पहना है इस प्रेम प्यार में पड़कर के, तू इतना भी भूल गई किसी के घर की इज्ज़त है तू ,किसी भाई की बहना है प्रेम को क्या बस एक दिवस की, अवधि माना जाता है प्रेम सनातन सत्य है जो, युग युग से जाना जाता है प्रेम शब्द तो इस श्रृष्टि के, यशोगान का गायक है भारत की पुण्य धरा की, आत्मा का परिचायक है प्रेम तो शबरी के बेरों में, भरत के मन में बसता है सूरदास के गीतों में, मीरा की आँखों में सजता है प्रेम यशोदा के आँगन के, दही माखन में मिलता है प्रेम तो दीन सुदामा के, सूखे चावल में मिलता है प्रेम छुपा नहीं होता महँगी, महँगी आखर पाती में प्रेम बसा होता है बहना, दो पैसे की राखी में मैं पूरबवासी हूँ पश्चिम के, रंग मुझे नहीं भाते हैं इक विदेशी रस्म की खातिर, क्यों हम रुपये बहाते हैं वेलेनटाइन डे पर कितने, ज़श्न मनाये जाते हैं पैसो की दम पर रूठे हुए, महबूब मनाये जाते हैं पीते हैं पिलाते हैं खुलकर , छलकाते मदिरा के प्याले बस अपनी हवस मिटाते हैं, और कहलाते हैं दिलवाले प्रेम दिवस नहीं कहता है, लड़का और लड़की प्यार करे प्रेम दिवस का अर्थ है ये, इन्सां से इन्सां प्यार करे ये प्रेम दिवस छलावा है, जिसके पीछे हम भागे जाते हैं ये कैसा प्रेमदिवस जिसमे, लव लैटर बाटे जाते हैं ये कैसा प्रेम दिवस है जो, इच्छाएँ खोटी देता है क्या कोई प्रेमी इस दिन को, भूखे को रोटी देता है प्रेम दिवस पर लाखो का, खर्चा हर वर्ष ही होता है फिर भी भारत में क्यों, कोई बच्चा भूख से रोता है सुनते है की बालक ही, भविष्य देश का होता है वर्तमान में ये भविष्य, फुटपाथ पे भूखा सोता है गर दिल में सच्चा प्यार है तो, आगे बढकर के आओ तुम यही है असली प्रेम-पात्र , लो इनको गले लगाओ तुम क्या इनको प्यार की प्यास नहीं, या फिर ये इन्सान नहीं ओ प्रेम के दूतो तुम ही क्यों, बनते इनके भगवान नहीं जिसके माध्यम से तुम पूरी, करते हो अपने मन की हवस हो तुम्हे मुबारक अपना ये, पवित्र पावन प्रेम दिवस भारत माता के दिल पर, इक चोट भयंकर लगती है जब उसकी संताने ही, चाल विदेशी चलती है मैं भारत माता को कोई, घाव नहीं दे पाउँगा इसीलिए मैं प्रेमदिवस के, गीत नहीं गा पाउँगा इसीलिए मैं प्रेमदिवस के, गीत नहीं गा पाउँगा जिस दिन भूख की पीड़ा से, ना कोई यहाँ बेबस होगा सच्चे अर्थो में मेरे लिए, वो दिन ही प्रेम दिवस होगा वो दिन ही प्रेम दिवस होगा | वो दिन ही प्रेम दिवस होगा