| गणतंत्र दिवस पर कविता - कैसा ये गणतंत्र |
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| Hindi Corner - Hindi kavita |
| Wednesday, 20 June 2012 00:00 |
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लोकतंत्र की उड़ी है धज्जी, बिखरे सरे तंत्र, फिर भी गर्व से मना रहे हम, कैसा ये गणतंत्र ? राष्ट्रभक्ति की खोखली बातें कर हम भूले विकासमंत्र, मंत्री हैं घोटाले करते और है हावी अफसर तंत्र, दासों से भी बुरा हाल हमारा, और कहते हम स्वतंत्र ! हमको ही बनाना होगा अब देश का विकास यन्त्र, जागरूकता से ही सदा बना है एक अद्भुत संयंत्र, हमसे ही ये देश बचेगा, जब हम फूंकेंगे ये मंत्र, फिर ना कोई कभी कहेगा, कैसा ये गणतंत्र ?
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