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नारी के लिए कविता - नारी तेरा अस्तित्व PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Tuesday, 19 June 2012 07:46

नारी दिवस पर कविता


नारी हूँ मैं

नारी  भी मुझ में

नर भी मुझी में है

तो फिर कमजोर में कैसे


सृष्टि की जननी हूँ  मैं

प्रेम   स्वरूपनी

मन  से  निर्मल

तन  से  चंचल

 

 

है  आपार क्षमता

हूँ सबल  करनी

मैं शक्ति  धारिणी

अन्नत सहनशालिनी


मैने  सभ्यता  बनाई

मैने  सीखाया  बोलना

मैने ही चलना  सीखाया

मैने ही सीखाया  उठकर  गिरना


अर्पण   किया  सब  कुछ  अपना

समर्पित  किया  खुद  को

भुलाकर खुद को भी

आपना अस्तित्व नहीं खोया 

कल  शायद  जो  तेरा  ना  था

आज  वो  युग  तेरा  है  परिणीता

है  अस्तित्व  तेरा  सम्पूर्णता

तुझ पर नारी आज  संसार गर्विता ......"किरण दीप"


 

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