क्या है मलमास या अधिक मास ऋग्वेद के अनुसार अधिकमास एक खगोलीय गणना है I इसके अनुसार सूर्य लगभग 30.44 दिन में एक राशी पूरी करता है उसे सूर्य का एक सौरमास कहते हैं 12 सौर मास में लगभग 365.25 होते हैं जिसे एक सौर वर्ष कहा जाता है प्रत्येक मास का आरम्भ सक्रांति से होता है I प्रत्येक चन्द्र मास 29.53 दिन का होता है जो अमावस्या के अगले दिन से लेकर पूर्णिमा तक होता है ,इसलिए चन्द्र वर्ष में लगभ 354.36 दिन होते हैं I इस तरह सौर वर्ष तथा चन्द्र वर्ष में लगभ 10.87 दिन का अंतर आ जाता है और तीन वर्ष में यह अंतर एक मास का हो जाता है इस अंतर को दूर करने के लिए एक अधिक मास का नियम है और प्रत्येक तीसरे वर्ष एक चन्द्र मास की वृद्धि की जाती है यह अधिक मास लगभग 32 मास 16 दिन और 4घटी के बाद आता है सौर वर्ष के 12 मास चेत्र ,वैशाख आदि हर मास की एक राशी होती है अर्थात हर संक्रांति को सूर्य एक राशी से दूसरी राशी में प्रवेश करता है I जिस चन्द्र मास में सूर्य एक राशी से दूसरी में प्रवेश नहीं करता वह अधिकमास होता है इस वर् 16 अगस्त को सूर्य सिंह राशी में प्रवेश करेंगे त 16 सितम्बर अमावस्या को कन्या राशी में चले जाएँगे सूर्य के एक ही संक्रांति कल में दो अमावस्या आने से 18 अगस्त ,प्रतिपदा से 16 सितम्बर अमावस्या तक भाद्रपद अधिक मास होगा I भगवान श्री कृष्ण ने इस मास का नाम पुरुषोतम मास दिया है