जैसे इन सजदों का सर से रिश्ता है.. बिलकुल ऐसा मेरे घर से रिश्ता है.. इन आँखों से बचकर कैसे जाओगे.. इन आँखों का हर मंजर से रिश्ता है.. तुम भी चलाओ तुमको रोका किसने है.. मेरे सर का हर पत्थर से रिश्ता है.. तुझको कैसे भूल सकेगा दिल मेरा.. तेरा मेरा तो अन्दर से रिश्ता है..
अथाह मन की गहराई और मन में उठी वो बातें हर तरफ है सन्नाटा और ख़ामोश लफ़्ज़ों में कही मेरी कोई बात किसी ने भी समझ नहीं पायी कानों में गूँज रही उस इक अजीब सी आवाज़ से तू हो गयी है कितनी पराई ।
अब शहनाई की वो गूँज देती है हर वक्त सुनाई तभी तो दुल्हन बनी तेरी वो धुँधली परछाईं अब हर जगह मुझे देने लगी है दिखाई कानों में गूँज रही उस इक अजीब सी आवाज़ से तू हो गयी है कितनी पराई ।
पर दिल में इक कसर उभर कर है आई इंतज़ार में अब भी तेरे मेरी ये आँखें हैं पथराई बाट तकते तेरी अब बोझिल आहें देती हैं दुहाई पर तुझे नहीं दी अब तक मेरी धड़कनें भी सुनाई कानों में गूँज रही उस इक अजीब सी आवाज़ से तू हो गयी है कितनी पराई ।
जब जब तेरी यदौं का बादल छाया तब तब मैं ये तन्हा दिल घबराया तन्हाई, अकेलेपन मैं तेरी यदौं का ये शमां बस कहता है, ना अब तू है, ना तेरी आहटें हैं बस अब तो मैं हूँ और मेरी तन्हाईयां हैं ....
दोस्तों अभी कुछ दिन पहले पता चला था 32 रुपये रोज खर्च करने वाला गरीब नहीं है ........................
हमने एक रात सुनी सरकारी बात बात सुनते सुनते हम हुए थोडा गंभीर | 32 रुपये की महिमा सुनकर अब हम हो गए अमीर ख़ुशी के गीत गाने लगे , सबको अपना बटुआ दिखने लगे | मेरी बीवी ने हमको टोका , पागलपन करने से रोका | पर हम तो मालामाल हो गए थे , समझो तो कमाल हो गए थे | अचानक देखा खाने की थाली , हमने अपनी ख़ुशी संभाली , थाली में 2 रोटी के साथ आधा प्याज पड़ा था , और सामने फटी पैंट में मेरा लड़का खड़ा था , बटुए से 32 रुपये निकाला , तुरंत उसका हिसाब बना डाला , उसमे न ही फटी पैंट सिली , न बीवी के लिए साड़ी मिली , लेकिन रोटी प्याज के साथ नमक मिल गया , बेटे का चेहरा इतने में ही ख़ुशी से खिल गया , नेता जी, ऐसी बातें करके कुछ तो शरमाया करो , गरीबों की तो अब कोई बात ही नहीं, कम से कम गरीबी का तो मजाक मत उड़ाया करो .