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Hindi Corner - Vichaar
Wednesday, 15 August 2012 21:04

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होली पर लेख - होली का मनोवैज्ञानिक दर्शन PDF Print Write e-mail
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Monday, 05 March 2012 19:59

होली का मनोवैज्ञानिक दर्शन


होली का पर्व मात्र एक परंपरागत उत्सव नहीं; जीवन का मनोविज्ञान है, इसका एक अपना विशिष्ट सामाजिक दर्शन है. पर्व और त्योहारों की सांस्कृतिक स्वीकृति ही इसलिए है कि समाज का प्रबुद्ध वर्ग इसे समझेगा, समाज को इसे समझाएगा. यदि हम बात होली पर्व की करें तो केवल इसी एक पर्व को भली - भांति समझ लिया जाये तो मानव जीवन की आधी उलझने, समस्याएं, उहापोह की स्थिति का शमन, समाधान और निराकरण स्वयं हो जायेगा; इसमें किंचित भी संदेह नहीं. तो क्या है होली? बात यहीं से प्राम्भ करते हैं.

 
राजनीति की भेंट चढ़ गया लोकपाल विधेयक PDF Print Write e-mail
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Monday, 23 January 2012 12:21

हर बार किसी न किसी कारण से पारित होने से रुका लोकपाल विधेयक इस बार देशभर में कथित रूप से उठे बड़े जनआंदोलन के बावजूद राजनीति की भेंट चढ़ गया। राजनीतिज्ञों ने तो राजनीति की ही, एक पवित्र उद्देश्य के लिए आवाज उठाने के बाद राजनीति के दलदल में फंसी टीम अन्ना भी पटरी से उतर गई। असल में लोकपाल के लिए दबाव बनाने की जिम्मेदारी का निर्वाह कर पाने में जब प्रमुख विपक्षी दल भाजपा विफल हुआ तो इसकी जिम्मेदारी टीम अन्ना ने ली और आमजन में भी आशा की किरण जागी, मगर वह भी अपने आंदोलन को निष्पक्ष नहीं रख पाई और  सरकार पर दबाव बनाने की निष्पक्ष पहल के नाम पर सीधे कांग्रेस पर ही हमला बोलने लगी।

 
जज़्बात पर हिंदी लेख PDF Print Write e-mail
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Saturday, 21 January 2012 00:00

जज़्बात ....

क्या हैं ये जज़्बात ? हमारे जज़्बात उन खास दस्तावेजो की तरह हैं जिनकी भाषा बस हम ही समझते हैं ,कोई और उन्हें नहीं पढ़ सकता . दूसरों के लिए तो वो बस बेकार गुदे हुए कागज़ हैं ...बेकार कागज़ . इसलिए अपने इन कीमती दस्तावेजो को अपने मन की पेटी में किसी कोने में संजोकर रखिये यदि इन्हें आम करने की कोशिश करेंगे तो उनकी भाषा न समझाने वाले हो सकता है उन्हें फाड़ कर फेंक दें |

 
आ ही गया राहुल गाँधी के कंधों पर कांग्रेस का भार PDF Print Write e-mail
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Tuesday, 22 November 2011 08:58

आ ही गया राहुल के कंधों पर कांग्रेस का भार

हालांकि यह पहले से ही तय था कि सोनिया गांधी जल्द ही राहुल पर पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी डालेंगी, डाल भी दी थी महासचिव बना कर, मगर जैसे ही उन्हें किसी अज्ञात बीमारी का इलाज कराने के लिए विदेश जाना पड़ा, उन्हें चार दिग्गजों के कार्यवाहक ग्रुप का सदस्य बना दिया। समझा यही जा रहा था कि सोनिया एकाएक सारा भार उन पर फिलहाल नहीं डालेंगी, मगर इलाज करवा कर लौटने के बाद के हालात से यह साफ हो गया सोनिया में अब वह ऊर्जा नहीं रही है कि तूफानी चुनावी दौरे कर सकें।

 
खिवैये ही डुबोने में जुटे हैं केन्द्र सरकार की नैया को PDF Print Write e-mail
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Sunday, 06 November 2011 10:24

खिवैये ही डुबोने में जुटे हैं केन्द्र सरकार की नैया को मौजूदा कांग्रेसनीत सरकार पर विपक्षी दलों और टीम अन्ना के हमले लगातार जारी हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा हो, जब सरकार की कार्यशैली अथवा किसी कदम की आलोचना नहीं हुई हो। महंगाई व भ्रष्टाचार के मुद्दे इतने हावी हो चुके हैं कि पूरे देश में यह संदेश जा चुका है कि सरकार का इन पर कोई नियंत्रण नहीं है और उसने लगभग हाथ खड़े कर दिए हैं। आम आदमी इतना त्रस्त है कि उसका व्यवस्था पर से विश्वास सा उठने लगा है। एक बारगी तो हालात अराजकता जैसे उत्पन्न हो गए और सरकार की चूलें पूरी तरह से हिल गईं। कोई और देश होता तो हिंसक क्रांति ही हो जाती।

 
दादी माँ पर लेख - दादी ! प्यारी दादी PDF Print Write e-mail
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Saturday, 22 October 2011 04:42

मेरे बचपन की मधुर यादों में एक याद यह भी है, मेरे द्वारा अपनी दादीजी को रामायण (रामचरितमानस) पढ़कर सुनाना. भगवान राम पर उनकी पूरी आस्था थी. पहले दीदी से फिर मुझसे रामायण सुनती थीं. हमारे जाने के बाद छोटी भाभी से सुना करती थीं. आज सोचती हूँ तो आश्चर्य होता है, मैं उस समय कितना सत्य मानती थी इस कथा को और दादीजी वह तो पूरी डूब जातीं थीं. पर उनके लिये शायद सत्य-असत्य का प्रश्न ही नहीं था, वह समर्पित थीं इस भावना को कि भगवान की कथा को सुनने से बढ़कर कोई पुण्य नहीं. मैं पढ़ती जाती थी, पढ़ती जाती थी और कई बार तो जब काफ़ी छोटी थी तो पढ़ा हुआ एक भी शब्द समझ में नहीं आता था. फिर मैं पेज गिनती और दादी जी कहतीं, बस.. अब तुम थक गयी होगी.

 
पाकिस्तानी फ़ौज की रणनीति PDF Print Write e-mail
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Monday, 17 October 2011 11:09


आज अमेरिका में बूट्स आन ग्राउंड याने पाकिस्तान के नार्थ वजीरिस्तान और बलूचिस्तान पर हमले पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह हमला दो तरीको से हो सकता है। ड्रोन और मिसाईलो के जरिये हवाई हमले या इन इलाको को पाकिस्तान से अलग कर नया देश बनाना। मामला दूसरे विकल्प तक भी पहुंचना लगभग तय ही है। बलोचिस्तान में पहले ही पाकिस्तान से अलग होने की जद्दोजहद जारी है। वहां के कीमती खनिजो, तेल, गैस को पाकिस्तान दूसरे मुल्को को खास कर चीन को बेच रहा है।  जाहिर है अमेरिका इन खनिजो पर नजर गड़ाये हुये है।

 
ताजमहल का छुपा हुआ सत्य PDF Print Write e-mail
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Saturday, 08 October 2011 00:00

बी.बी.सी. कहता है...........

ताजमहल...........
एक छुपा हुआ सत्य..........
कभी मत कहो कि.........
यह एक मकबरा है..........

ताजमहल का आकाशीय दृश्य......
आतंरिक पानी का कुंवा............

ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य
गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....

Last Updated on Saturday, 08 October 2011 00:29
 
सबसे बड़ा डंडा खुद का चरित्र है.....क़ानून नहीं ......!! PDF Print Write e-mail
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Saturday, 01 October 2011 21:24

हम रोज-ब-रोज तरह-तरह के अपराधों के बारे में पढ़ते हैं,सुनते हैं और साथ ही बड़े लोगों के अपराधों के बारे या अपराधियों को सज़ा देने के लिए तरह-तरह के आयोग या कमीशन बैठाए जाने के बारे सुना करते हैं,मगर बाद में यह भी देखते हैं कि दरअसल कुछ भी होता जाता नहीं है और मैं आपको सच बताता हूँ दोस्तों कि आगे भी कुछ होने जाने को नहीं है या कहूँ कि कभी कुछ होगा ही नहीं......

 
भूले बिसरे कवि, साहित्यकार सुकविमनीषी-पं० जगदम्बा प्रसाद मिश्र 'हितेषी' पर शोध लेख PDF Print Write e-mail
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Wednesday, 28 September 2011 17:31


शहीदों की चिताओं पर जुड़ेगें हर बरस मेले , वतन पर मरने वालों का यहीं बाकी निशां होगा | -'हितैषी'

परिचय :

जिनकी वाणी में प्राणों की वंशी के रंध्र-रंध्र में फूंक भर कर नवजीवन जगा देने वाली संजीवनी थी,जिनकी हुनकर में दिग्गज अंग्रेजो के पाषण हृदय को दहला देने की शक्ति थी , जिनकी पुकार पर देश के कोने कोने से लक्ष-लक्ष युवा पराधीन भारतमाता की बेड़ियों को काटने के लिए सर्वस्व समर्पण हेतु मचल उठते थे | ऐसे प्रखर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  सुकविमनीषी ,सवैया-सम्राट पं० जगदम्बा प्रसाद मिश्र 'हितैषी' जी का जन्म कान्यकुब्ज आंकिन के मिश्र पं० रामचंद्र मिश्र के घर मार्ग शीर्ष  शुक्ल एकादशी संवत १९५२ विक्रमी तदनुसार १२ नवंबर १८९५ ई० को गंजमुरादाबाद जनपद उन्नाव(उ०प्र०) में हुआ था |

 
बंगलादेश को भारतीय भूमि देने का सत्य - हिंदी विचार PDF Print Write e-mail
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Saturday, 10 September 2011 07:04


बंगलादेश को कुछ विवादों के चलते भूमि दी जा रही है, जिसके बारे में अनजान रखा जा रहा है सबको l
कोई समाचार पत्र छाप रहा है की केवल 60 एकड़ भूमि ही दी गई है ?
किसी का छापना है की 600 एकड़ .... 140 एकड़ ....

क्या है सत्य ... ?

ये बात है तब की जब Jessore के हिन्दू राजा और मुर्शिदाबाद के नवाब जुए में गाँव के गाँव हार जीत पर लगाया करते थे l

 
दुनिया भी अजीब चीज है PDF Print Write e-mail
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Wednesday, 07 September 2011 05:56

दुनिया भी अजीब चीज है इसे समझना आज के मनुष्यों की बस की बात नहीं है फिर हम मानव अपने आप को सर्वश्रेष्ठ समझते है इस पृथ्वी का दोहन करते जा रहे है यह जानते हुए भी की इसका दोहन करना हमारी जिंदगी ढहीं सकती है  |  हमशे तो अच्छा मांसाहारी जानवर है,जो जंगल में मौजूद अपने शिकार को कभी एकसाथ नहीं मारा करते  |  मई सोच रहा था की एक दिन ऐसा समय आएगा जब इस पृथ्वी पर मौजूद सभी लोगो की "यादे " एक ही चीज हो जाएगी और वो होगा "मिटी के द्वारा दिया गया हमारा अमूल्य धरोहर "जिसे आज हम खोते जा रहे है  | 

 
लोकपाल आन्दोलन का एक और अनदेखा बलिदान PDF Print Write e-mail
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Thursday, 01 September 2011 04:29

मौत से पहले दिनेश ने पूछा था, ”टीम अन्ना का कोई क्यों नहीं आया?”
अब आप जानना चाहेंगे की कौन दिनेश?
हम बात कर रहे हैं अन्ना हजारे जी के सशक्त लोकपाल के समर्थन में आत्मदाह करने वाला दिनेश.

दिनेश यादव का शव जब बिहार में उसके पैतृक गांव पहुंचा तो हजारों की भीड़ ने उसका स्वागत किया और उसकी मौत को ‘बेकार नहीं जाने देने’ का प्रण किया। लेकिन टीम अन्ना की बेरुखी कइयों के मन में सवालिया निशान छोड़ गई। सवाल था कि क्या उसकी जान यूं ही चली गई या उसके ‘बलिदान’ को किसी ने कोई महत्व भी दिया?

 
संसद और सांसद , कुछ महत्वपूर्ण तथ्य PDF Print Write e-mail
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Wednesday, 31 August 2011 07:41

भारतीय लोकतंत्र का आधार संसद है | संसद  के दो भाग है लोक सभा और राज्य सभा  | लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता करती है और राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि करते है | इसलिए जनता संसद का आधार है, हम ये भी कह सकते है कि जनता लोकतंत्र का आधार होती है | जनता सांसदों से ये उम्मीद करती है कि वे उनकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगे |

 
भ्रष्टाचार से आजादी अर्थात भारत-परम वैभव प्राप्ति PDF Print Write e-mail
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Monday, 29 August 2011 06:20

•    प्रिय मित्रों सप्रेम नमन |
आज मै आपसे तीन बिदुओं पर बात करूँगा | १)भ्रष्टाचार २) आज़ादी ३ ) परम वैभव |
क्रम तोड़ते हुए पहले आज़ादी का अर्थ जाने |
१)आज़ादी केवल भोग विलास की वस्तु नहीं वरन उत्तरदायित्वपूर्ण कृत्य करने की स्वतंत्रता |
उदाहरणस्वरूप बंधुआ मजदूरी और मजदूरी जो फर्क है वही पराधीनता और स्वतंत्रता में है | जिस प्रकार वैवाहिक इकाई-व्यभिचार में अंतर है | वही गहरा अंतर आज़ादी और उच्खन्लता(व्यभिचार) मै है | और हमने नेताओं द्वारा आज़ादी नहीं उच्खन्लता(उद्दंडता) प्राप्त की है अंग्रेजो से मात्र सत्ता हस्तांतरित कर हिंदुस्तान कों और लूटने का गहरा षड्यंत्र  | यह है हमारा स्वतंत्रता दिवस !
२)भ्रष्टाचार

 
थू थू थू ब्रिटिश संसद(भारतीय संसद) पर ! भगत सिंह बन क्रांतिबीज का उदघोष करो रे PDF Print Write e-mail
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Sunday, 28 August 2011 03:03

मै मानता हूँ कि गांधीजी की प्रासंगिकता सदैव रही है | और भगत सिंह राजगुरु सुखदेव चंद्रशेखर बिस्मिल अशफाक नेताजी सुभाष की प्रासंगिकता भी रहेगी | हमने उस समय का दौर तो नहीं देखा अत: गाँधी जी के गांधीवाद और उनकी बेबसी को समझना है तो श्रद्धेय अन्ना जी का सहचर बने आंदोलन का हिस्सा बन कर | गौरे अंग्रेजो के साथ गाँधी और भगत सिंह कैसे लड़े होगे नहीं देखा|

 
सकारात्मक क़दम PDF Print Write e-mail
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Sunday, 28 August 2011 00:00
अन्ना की हालत को देखते हुए जिस तरह से पूरे देश में चिंता बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए जिस तरह से विलम्ब से ही सही संप्रग सरकार ने जिस तरह से अन्ना की सभी मांगों पर शुक्रवार को संसद में नियम १८४ के तहत चर्चा करने करने का जो निर्णय लिया है वह स्वागत योग्य है. जिस तरह से अन्ना का स्वास्थ्य निरंतर बिगड़ रहा था उसे देखते हुए अब कोई बड़ा कदम उठाने की आवश्यकता थी.  देश के राजनैतिक तंत्र में इस बिल को लेकर जिस तरह का असमंजस दिखाई दिया वह समझ से परे है |
Last Updated on Sunday, 19 February 2012 18:42
 
इस्लाम में कट्टरता न कल थी और न ही आज है PDF Print Write e-mail
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Thursday, 25 August 2011 06:14

एक नेक औरत अपने एक ही पति के सामने समर्पण करती है, हरेक के सामने नहीं और अगर कोई दूसरा पुरूष उस पर सवार होने की कोशिश करता है तो वह मरने-मारने पर उतारू हो जाती है। वह जिसे मारती है दुनिया उस मरने वाले पर लानत करती है और उस औरत की नेकी और बहादुरी के गुण गाती है। इसे उस औरत की कट्टरता नहीं कहा जाता बल्कि उसे अपने एक पति के प्रति वफ़ादार माना जाता है। दूसरी तरफ़ हमारे समाज में ऐसी भी औरतें पाई जाती हैं कि वे ज़रा से लालच में बहुतों के साथ नाजायज़ संबंध बनाये रखती हैं। उन औरतों को हमारा समाज, बेवफ़ा और वेश्या कहता है। वे किसी को भी अपने शरीर से आनंद लेने देती हैं, उनके इस अमल को हमारे समाज में कोई भी ‘उदारता‘ का नाम नहीं देता और न ही उसे कोई महानता का खि़ताब देता है।

 
सरकार का गन्ना, ना बन जाए अन्ना, युवक रहें चोकन्ना PDF Print Write e-mail
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Saturday, 20 August 2011 03:53

आज पूरी बिसात बिछने को तैयार है और देश की जनता जिसमे युवको की संख्या ज्यादा है कुछ बातों का ध्यान रखें! पहला तो विदेशी में जमा भारतीयों का पैसा, देश में जमा काला धन, और भ्रष्टाचारियों को सजा! 12 करोड़ मतों से चुनी हुई कांग्रेस आज जनमत में नहीं है, इसलिए उसको सरकार कहना और समझने की गलती जनता अभी भी कर रही है!

 
गुदगुदी PDF Print Write e-mail
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Sunday, 14 August 2011 02:11

मेरा पोता रोज़ रात में सोने से पहले मुझसे गले मिल कर ‘गुड नाइट’ कहने आता है।  वह तब तक मुझसे लिपटा रहता है जब तक मैं उसे गुदगुदी न करूँ। इस गुदगुदी से वह कसमसाता है और हँसते हुए ‘गुड नाइट’ कह कर चला जाता है।  यह प्रक्रिया सुबह भी चलती है जब वह उठ कर ‘गुड मार्निंग’ कहता है।  

 
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