जज़्बात पर हिंदी लेख Print
Alankriti Shrivastava
Hindi Corner - Vichaar
Saturday, 21 January 2012 00:00

जज़्बात ....

क्या हैं ये जज़्बात ? हमारे जज़्बात उन खास दस्तावेजो की तरह हैं जिनकी भाषा बस हम ही समझते हैं ,कोई और उन्हें नहीं पढ़ सकता . दूसरों के लिए तो वो बस बेकार गुदे हुए कागज़ हैं ...बेकार कागज़ . इसलिए अपने इन कीमती दस्तावेजो को अपने मन की पेटी में किसी कोने में संजोकर रखिये यदि इन्हें आम करने की कोशिश करेंगे तो उनकी भाषा न समझाने वाले हो सकता है उन्हें फाड़ कर फेंक दें |


वैसे भी जज़्बात दिखाने के लिए नहीं होते, जज़्बात तो जज़्ब करने के लिए होते हैं . उन्हें खुद में गहराई तक जज़्ब होने दीजिये .जैसे चीनी पानी में घुलती है न ठीक वैसे ही जज्बातों को खुद में घुलने दीजिये . जैसे जैसे वो घुलते जायेंगे वैसे वैसे हमारी मिठास बढती जाएगी ..दिखाने के लिए नहीं होते, जज़्बात तो जज़्ब करने के लिए होते हैं . उन्हें खुद में गहराई तक जज़्ब होने दीजिये .जैसे चीनी पानी में घुलती है न ठीक वैसे ही जज्बातों को खुद में घुलने दीजिये . जैसे जैसे वो घुलते जायेंगे वैसे वैसे हमारी मिठास बढती जाएगी ..

कई बार हम कितनी बेमानी बातो के बारे में सोचते हैं न ? अरे इससे फर्क ही क्या पड़ता है कि हमारे जज़्बात जिसके भी लिए हैं उसे इनका इल्म है या नही . हम इम्तेहान में अव्वल तो तब आएंगे जब उसे एहसास ही न हो और हमारे जज्बातों कि शिद्दत उसी हद तक बरकरार रहे . क्योंकि जो धुंधले पड़ जाएँ या मर जाएँ वो सच्चे जज़्बात होते ही नही..

 

 

Alankriti Shrivastava