Username:  Password:        Forgot Password? Username?   |   Register
Banner

हास्य व्यंग्य - बाबा रामू का प्रवचन PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Vyangya
Thursday, 24 November 2011 15:25

हिंदी  हास्य व्यंग्य

एक दिन सुबह सुबह श्रीमती ने फ़रमाईश रख दी- " बाबा रामू आये हुये हैं आपको हमे प्रवचन में ले चलना होगा। हमने कहा भी कि भाई आज कल बाबा रामू में पहले जैसे योग नही सिखाते है फ़ोकट राजनैतिक प्रवचन झेलना होगा" श्रीमति कहां मानती हमे ले जाकर ही दम लिया।

खैर बाबा का प्रवचन शुरू हुआ, बोले - "हम प्रमाणिकता के साथ आपकी बीमारियों को दूर भगा देंगे और विदेशों से कालाधन वापस ले आयेंगे।"

उसके बाद बाबा ने कपाल भाती सिखाना शुरू किया, बोले- " जोर से सांस खींचो" , हमने सांस अंदर ली,  फ़िर बाबा बोल उठे- "कालाधन छोड़ो।" हमने कहा- " बाबा हम तो आपके कहे में केवल सांस अंदर किये हैं, अब कालाधन कैसे छोड़ें।"  बाबा बोले - " बेटा आप को सांस ही छोड़ना है कालाधन वाला बात तो हम कांग्रेसियों के लिये कह रहे थे।"

बाबा फ़िर शुरू हुये - " देश का तीन सौ तीस लाख करोड़ कालाधन विदेशो में जमा है। हम कानून बनवा कर इसे राष्ट्रीय संपंत्ती घोषित कर देश मे वापस लायेंगे। और इस पैसे को हम बैंक में जमा करवा देंगे इससे हर साल तैतीस लाख करोड़ की आमदनी होगी। इससे हम गांव गांव को स्वर्ग बना देंगे इस पैसे से हिंदुस्तान की हर सड़क पर दस मिमी मोटी सोने की परत चढ़ाई जा सकती है। गांव गांव में खादी बुनी जायेगी,  पंदरह करोड़ लोगो को इससे रोजगार मिलेगा,  पूरा विश्व भारत का बनाया कपड़ा ही पहनेगा। गाय के गोबर से हम मीथेन गैस बनाकर इससे बिजली बनायेंगे फ़िर भारत को तेल आयात करने की जरूरत नही होगी।"

इतना सुनते सुनते हम सपनो में खो गये। बाबा देश के राष्ट्रपति और हम उनके प्रमुख सचिव बन गये। हमसे मिलने के लिये लोगो का ताता लग गया हर कोई शिकायत बताने और मांगे लेकर हमारे पास आ रहा था। एक प्रतिनिधी मंडल आया बोला - " साहब हमारे दलित गांव का गोबर,  पड़ोस के गांव के दबंग छीन कर सोसाईटी में बेच देते हैं।" हमने तुरंत आदेश जारी किया- "गायो के मालिको का हिसाब रखा जाये और नाथूराम गोड़से गोबर खरीद गारंटी मिशन के अंतर्गत चेक से सीधे मालिक के खाते में भुगतान हो।"


तभी विभिन्न देशों का के राजदूत मिलने आये, पाकिस्तान वाला बोला- "सर आपने हमसे कपास खरीदना क्यों बंद कर दिया है।" हमने कहा-  " पहले आतंकवाद बिल्कुल बंद होना चाहिये, दाउद के जैसे तमाम आरोपी भारत को सौंपिये, उसके बाद आपसे कपास खरीदा जायेगा।" अगला दल यूरोप का था, आते ही गिड़गिड़ाने लगे- "माई माप, सारे यूरोप का पैसा तो आप वापस ले गये हो। हमारे यहां हाहाकार मचा हुआ है, हमे कर्ज दीजिये वरना हम तबाह हो जायेंगे।" हमने कहा- "अपना सोना गिरवी रखना होगा उसके अलावा ब्रिटेन के म्यूजियम मे भारत और पाकिस्तान की जितनी ऐतिहासिक वस्तुयें हो वो सब लौटानी होगी। आखिरी शर्त लंदन के मुख्य मार्केट की सड़क हमारी होगी। उसमें बोर्ड लगा होगा- " ब्रिटिश एन्ड डाग्स नाट अलाउड।"

इसके बाद अमेरिका के वैज्ञानिकों का दल था,  वे आते ही चढ़ बैठे-  "आप विश्व हित की टेक्नोलाजी को  छुपा  रहे हो। आप वसुदैव कुटूंबकम की हिंदू संस्कृती भूल गये हो।" हमने  पूछा कि भाई मामला क्या है। वे और भड़क गये- " आपके यहां गायें खुल्ला घूमती है, उनके पीछे गोबर इकठ्ठा करने के लिये भागना पड़ता है। फ़िर भी आप उस गोबर से मीथेन गैस बना,  इंधन के मामले में आत्म निर्भर हो गये। और हम है कि दस हजार गायें एक एक फ़ार्म मे पालते है, सबका गोबर आटॊमेटिक एकठठा हो जाता है। फ़िर भी हम उसका उपयोग करने मे असमर्थ हैं।" हमने कहा- " हम आपको गोबर की तकनीक विशेष शर्तो पर उपलब्ध करा सकते हैं।  इस तकनीक में काम आने वाला गौ मूत्र, शुद्ध भारतीय होगा और यह गोमूत्र आपको सौ डालर प्रति लीटर पर खरीदना होगा।"  शर्ते सुन कर अमेरिकी जमीन में लोट गये बोले -" माई बाप पहले एक रूपये की कीमत पचास डालर हो गयी है,  हम ये बोझ और न सह पायेंगे।"  हमने इंकार में सर हिला दिया

अमेरिकन बोले- " हम बाबा रामू से सीधे बात करेंगे।"  हमने कहा -" सौ देशो की खुफ़िया पुलिस बाबा रामू को खोज रही है कि उनके हाथ लग जायें तो उनके देश का भला हो जाये। इसलिये वे गुप्त स्थान पर रहते हैं, आप नही मिल सकते।" जाते जाते अमेरिकन भुनभुना रहे थे -" जितने आलतू फ़ालतू बाबा थे,  उनको हरे रामा हरे कृष्णा करने अमेरिका भेजते रहे और महान  बाबा रामू से मिलने तक नही देते हैं।"


तभी  भाजपा के गड़करी साहब आ गये- "बोले, दवे जी चुनाव सर पर आ गया है, देश में कोई समस्या ही नही बची है जनता से कहें क्या।" हमने कहा- "कल ही वित्त मंत्री  कह रहे थे कि सारे विकास कार्य हो चुके हैं। जो बचे हैं उनके लिये पैसा आबंटित हो चुका है। अब हर साल  ब्याज  के तैतीस लाख करोड़  खर्च कहां करें। आप विश्व के सत्तर गरीब देश को इस पैसे से मदद करते हैं।  फ़िर यूएन में उनकी सहायता से प्रस्ताव पारित करा लिया जायेगा कि चीन और पाकिस्तान भारत को जमीन वापस करे। बिना लड़े जमीन  आ गई तो समझिये अगला चुनाव जीतना तय है।"  

प्रसन्न होकर गड़करी साहब निकले ही थे कि तभी तेल उत्पाकदक देशों (ओपेक) का दल आया- आते ही गिड़गिड़ाने लगे -" साहब कोई ऐसे आर्डर कैंसल करता है क्या भला। आपने तो हमे कहीं का नही छोड़ा। " हमने कहा- भाई करे क्या अब कुछ काम ही नही रहा तेल का अब तो खाली परंपरा निभाने के लिये राष्ट्रपति पंदरह अगस्त को पेट्रोल की कार में बैठ कर समारोह में जाते हैं।"  बाकी देशों ने तो मन मसोस लिया, लेकिन अरब वाले पैरों मे गिर गये- "माई बाप हमारे छोटे छोटे बच्चों पर तरस खाओ, साल मे कम से कम पांच टैंकर ले लो।" हमे याद आया, जब तेल बिकता था तो कैसे अकड़ते थे, हमने तुरंत लात जड़ी - "चलो भागो यहां से।"

तभी हमारा स्वप्न भंग हो गया देखा तो हमारे सामने बैठा श्रद्धालू मुंह के बल जमीन पर पड़ा था। हमारी लात अरब राजदूत को नही, उसे पड़ी थी। लोग भड़क गये,  हमे घेर लिया तभी बाबा रामू ने बीच बचाव करते हुये पूछा- " क्या बेटा लात क्ल्यों मारी।"  हमने  सफ़ाई दी- " बाबा आपकी बाते सुनकर हमे कांग्रेस पर इतना गुस्सा आया कि हम क्रोध में होश खो बैठे और गलती से लात चल गयी।"

सफ़ाई दे माफ़ी मांग हम प्रवचन से उठ तो आये लेकिन कहे क्या आजतक मन कालेधन की वापसी की राह देख रहा है। रोज भगवान से दुआ करते हैं कि बाबा को इतनी शक्ती दे कि बाबा कालाधन वापस ले आयें गोबर से मीथेन गैस बना परमाणू संयंत्रो से कोयल की राख से मुक्ती दिलवाये और पूरा विश्व भारत का माल खरीदे पर भारत किसी देश का माल न ले।

 

अरूणेश सी दवे

लेखक  प्लायवुड के व्यवसाय मे संलग्न हैं । पर्यावरण और वन्यप्राणियों से बहुत लगाव है |
लेखक का एक अन्य व्यंग्य

क्या आप भी लेखक है ?? अपनी रचनाये ई- मेल करें " mypost@catchmypost.com"पर |

 

Like and Comment

Share on Myspace
Banner

Share This Page

Some Online Users

1 user and 479 guests online

Activities
X
Please Login
Chat
X
Please login to be able to chat.
Activities
Chat (0)