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 ( प्रतियोगिता हेतु )
मैने तुमसे प्यार किया था, तुमने क्यों प्रतिकार किया था?
प्रकृति के रस-रंग मनोहर, लाया था चुन-चुन कर प्रतिपल, प्यार की सीमा,भाव का सागर, हमदोनों ने पार किया था।
मैने तुमसे प्यार किया था।
सदियों से तेरी खातिर आया, पर प्यार तुम्हारा क्यों ना पाया?
निर्झर सा बहता मै कल-कल, इक प्यार तुम्हारा मिले जो इक पल, ना सोया था,ना जाग सका, बस तेरा इंतजार किया था।
मैने तुमसे प्यार किया था।
वो पर्वत ऊँचा,बहती नदी, सारी धरती थी सजी सजी, हमदोनों बागों में घूमे, पनघट पे तू मुझको चूमे।
कब से था जग में एकांत,अकेला, तुमने प्रिय बाहों का हार दिया था।
मैने तुमसे प्यार किया था।
मतवाला बेताब सा दिल मै, तेरी चाहत की चौखट पर, दिल हल्का होता था बस, काँधे पे तेरे सर रख कर।
बंजारा था इस जग में जब, तुमने ही संसार दिया था।
मैने तुमसे प्यार किया था।
लगन लगी जब से तेरी मन को, ना भूख,ना प्यास लगे मेरे तन को, प्यासी है नैना तेरी दरश जो पाये, मेरा प्रियतम कभी नजर तो आये।
अधरों से रस पी प्यास बुझाता, तुमने तो सब कुछ वार दिया था।
मैने तुमसे प्यार किया था।
तुम थी राधा,मै था कान्हा, है पता मुझे,सबने जाना, मै राम था,तुम सीता थी प्रिय, कब से है अपना आना-जाना।
बंशी मै ही बजाता था, प्यार के मधु-धुन सुनाता था, हमदोनों ने ही कभी,कही प्रिय, प्यार के श्रृँगार को आधार दिया था।
मैने तुमसे प्यार किया था।
Satyam Shivam
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