Username:  Password:        Forgot Password? Username?   |   Register
Banner

करवा चौथ पर कविता - करवा चौथ PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Sunday, 16 October 2011 01:19


यूँ तो निकलता है चाँद रात को  हर रोज
पर न जाने किसने कर दी इस त्यौहार की खोज
बड़े इंतजार के बाद आताहै यह त्यौहार
नारियों के जीवन में ला देता है बहार
सोलह श्रृंगार कर के करती हैं इंतजार
न जाने कब हों चाँद के दीदार
बिना अन्न -जल ग्रहण किये करती हैं पूजा चाँद की
ताकि आयु हो लम्बी उनके पति की
सासु मां को भी दे उपहार करती हैं धन्यवाद


जिसने कर दिया घर उसका आबाद
पति को भी पूजें कर चाँद का दर्शन
उसके लिए है बनी आज  आकर्षण
है भारत की नारी कितनी महान
इन्सान को भी पूजे  मान   कर भगवान  
वैसे तो त्योहारों से भरा है ये देश
करवाचौथ है पर नारियों के लिए विशेष
दुलहन की तरह सजी होती है हर नारी
सदियों पुरानी प्रथा है ये  हमारी !

Savita Kaushal

क्या आप भी कवि हैं ?? अपनी रचनाएँ इ-मेल करें " mypost@catchmypost.com" पर  |

 

Like and Comment

Share on Myspace
Banner

Share This Page

Some Online Users

0 users and 1831 guests online

Activities
X
Please Login
Chat
X
Please login to be able to chat.
Activities
Chat (0)