यूँ तो निकलता है चाँद रात को हर रोज पर न जाने किसने कर दी इस त्यौहार की खोज बड़े इंतजार के बाद आताहै यह त्यौहार नारियों के जीवन में ला देता है बहार सोलह श्रृंगार कर के करती हैं इंतजार न जाने कब हों चाँद के दीदार बिना अन्न -जल ग्रहण किये करती हैं पूजा चाँद की ताकि आयु हो लम्बी उनके पति की सासु मां को भी दे उपहार करती हैं धन्यवाद
जिसने कर दिया घर उसका आबाद पति को भी पूजें कर चाँद का दर्शन उसके लिए है बनी आज आकर्षण है भारत की नारी कितनी महान इन्सान को भी पूजे मान कर भगवान वैसे तो त्योहारों से भरा है ये देश करवाचौथ है पर नारियों के लिए विशेष दुलहन की तरह सजी होती है हर नारी सदियों पुरानी प्रथा है ये हमारी ! Savita Kaushal
क्या आप भी कवि हैं ?? अपनी रचनाएँ इ-मेल करें " mypost@catchmypost.com" पर |