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निजता में उसको पा जाये PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Thursday, 03 November 2011 00:00


धन कमाता चैन गंवा कर

चैन कमाता धन गंवाकर,

कैसा अद्भुत प्राणी मानव

रह जाते दोनों खाली कर !


श्वास श्वास में भर सकता था

बड़े परिश्रम से वह पाता,


सहज ही था जो मिला हुआ

दुगना श्रम कर उसे मिटाता !


खेल समझ के जीवन कोई

मोल कौडियों बेच रहा है,

मुँह लटकाए बोझ उठाये

दूजा पीड़ा झेल रहा है !


कहीं हो रही भूल है भारी

निज पैरों पर चले है आरी

तज हीरे कंकर घर लाते

करें अँधेरे की तैयारी !


भीतर जो चल रहा युद्ध है

भाग रहा है उससे मानव,

धन, यश एक बहाना ही है

बचने का भीतर जो दानव !


खुले आँख तो भ्रम मिट जाये

उत्सव जीवन में छा जाये,

ढूँढ रहा जो मानव जग में

निजता में उसको पा जाये !

Anita Nihalini
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