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प्रेम काव्य- मेहंदी का रंग हूँ. PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Sunday, 06 November 2011 00:00


''मेहंदी'' का रंग हूँ ''मैं'' ''हाथों'' पर तो आऊँगा ,

उतर गया तो ''महक'' अपनी छोड़ जाऊँगा ,

''ग़ज़ल'' का शेयर हूँ ''दिल'' की ''किताब'' में लिख लो ,

भुला दिया तो कभी ''याद'' भी न आऊँगा ,

तेरा ही ''अश्क'' हूँ ''विष'' रोक लो ''मुझको'' ,

''मैं'' इक दिन ''तेरी'' ''पलकों'' पे ''जगमगायोंगा'',

''मोहब्बते'' ''दिल'' से अगर ''आवाज'' दी ''किसी'' ने ,

''विष''

गयी ''बाहार'' की तरह फिर ''लौट'' आऊँगा......!!

Vishal Khaneja
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