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चंद फूल खिला के देखो तो कभी PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Monday, 07 November 2011 00:00


कोई दरख्त होकर देखो तो कभी
जमीं से जुड़कर भी देखो तो कभी,
रगों में दौड़ती फिरेगी हरियाली
चंद फूल खिला के देखो तो कभी !

हवा में झूमकर जो गुनगुनाओ
गगन को आँख भर देखो तो कभी,
कोंपलें फूट जाएँगी उमंगों की
न कोई आस बचेगी देखो तो कभी !


नहाके बारिश में सिहरो सर्दियों में
बहा के खुशबुएँ अंतर को बिखर जाने दो,
चहकते खग की मानिंद फिजाओं में
तिरछे तिरके जरा देखो तो कभी !

Anita Nihalini
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