अन्धकार पर कविता - अन्धकार तुम्हारा भी अभिनन्दन है ... Print
Ojaswi Kaushal
Hindi Corner - Hindi kavita
Tuesday, 08 November 2011 07:02


अंधियारी कालिख में लिपटे

श्याम पट

मेरे जीवन में
तुम्हारा भी अभिनन्दन है

तुम अवसर देते
श्वेत बिंदु को उभर कर
अक्षर बनने का.

सद का संकेत तुम्ही से  तो है ..

निर्विचार से उपजकर
विचार रूप में आकर

ज्ञान की देवी शब्दों में बैठ

उतरती है किस पर ,
अन्धकार तुम्ही पर तो

तभी तो वह शुभ्रा कर पाती है
चिद आनंद के दिव्य आलोक को सार्थक

जीवन के श्याम पट
सृष्टी में तुम्हारा अमूल्य योग है

फिर भी तुम्हे मिलती दुत्कार
अनंत समय से .सब ओर से ..

क्यों भला ?

उजियारों के बीच अंधियारे के
इस अविकल शोधार्थी को

आज से
अभी से

अन्धकार स्वीकार है ...

प्रिय आत्मन !

अन्धकार

मेरे जीवन में
तुम्हारा भी अभिनन्दन है ..

मेरी नज़र में तुम्हे भी हक़ है
प्रकाश की तरह ही पूजे जाने का

जान गया हूँ
श्याम रूप में तुम ही
उजियारे का आभूषण हो ..

पुनः पुनः हिरण्यगर्भ की भूमि हो

लय में ,
प्रलय का
आधार तुम भी हो ,
सर्जक तुम भी हो ..

देवत्व पर तुम्हारा भी
सम-अधिकार है

हे अन्धकार !
तुम्हारी निराकार शक्ति
सहज ही
विराजित है
पूजित है
वन्दित है अब

मेरे जीवन में
अन्धकार

तुम्हारा भी अभिनन्दन है ..

अभिनन्दन है ..


संजीव गौतम

Sanjeev Gautam

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