गोल गप्पे Print
madan mohan baheti'ghotoo'
Hindi Corner - Hindi kavita
Thursday, 17 November 2011 00:00


जिंदगी,
पानीपूरी के पानी की तरह,
खट्टी,मीठी,चटपटी,तीखी,
और स्वादिष्ट होती है
और आदमी इसे गटागट पी भी सकता है
पर उसमे इतना मज़ा नहीं आता
अगर उसका असली स्वाद लेना हो,
तो गोलगप्पे की तरह,
एक जीवनसाथी की जरुरत पड़ती है,
जिसमे भर भर कर,
घूँट घूँट पीने से,
जिंदगी का असली मज़ा आता है

मदन मोहन बहेती'घोटू'