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Hindi Corner -
Hindi kavita
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Thursday, 17 November 2011 04:12 |
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 बुद्धि पर ही जीने वाले दिल की दुनिया को क्या जानें, वह कुएं का पानी खारा यह अमृत का इक सागर है !
तर्कों का जाल बिछाया है क्या सिद्ध किया चाहोगे तुम, जो शुद्ध हुआ मन, सुमन हुआ वह भूलभुलैया भ्रामक है !
शिव तत्व ही सत्य जगत का है मानव के दिल में प्रकट हुआ, बुद्धि भी नतमस्तक होती छलके जब बुद्ध की गागर है !
दो आँसू बन के छलक गया भीतर जब नहीं समाय रहा, लेकिन जग यह क्या समझेगा सुख के पीछे जो पागल है !
टुकुर-टुकुर तकते दो नैना भीतर प्रज्ज्वलित एक प्रकाश, अक्सर दुनिया रोया करती जब तक नभ केवल बाहर है !
Anita Nihalini
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