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मीत बावरा - Hindi kavita PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Wednesday, 23 November 2011 11:32

मीत बावरा
है मीत ही बावरा उसका ,
निमिष में घबरा गया पाया न सामने जब उसको ,
भावना में बह गया |

थी बेचैन निगाहें उसकी ,
ना ही धरा पैरों तले जाने कब तक यूं ही भटका ,
न पाया जब तक उसे |


भागा हुआ वह गया अपनी ,
प्रियतमा की खोज में पा दूर से ही झलक उसकी ,
ठंडक आई सोच में |

आया नियंत्रण साँसों पर ,
आहट पाकर उसकी
मुस्कानों में खो गया ,
थी वह जन्नत उसकी | आशा

 


Asha Saxena

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