तुम्हारे मखमली आगोश में, कुछ देर मचल कर अंगड़ाई लूं मैं, महकती गर्म साँसों के घेरे में, सहमी तर तराई इस ख़ुशी को , समेट लो अपने बाजुओं में , टिकी रहे देर तक मुझ प़र, भुला दे,जो मुझसे मुझको, मादकता में बहके हम दोनों,
खों जाएँ एक-दूसरे में..................... डॉ.शालिनीअगम
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