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रेत के घरोंदे PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Thursday, 24 November 2011 14:23

रेत के घरोंदे

बहुत

समझाता था उसे

सपनों पर

विश्वास मत किया करो

समुद्र किनारे रेत के

घरोंदे  मत बनाया करो

 


कभी कोई तेज़ लहर आयेगी

घर को बहायेगी

अपने सपनों को टूटते देख

तुम व्यथित हो कर

दुःख मनाओगे

बार बार घरोंदे को

याद कर आंसू बहाओगे

घरोंदे बनाने ही हो

तो मेहनत,लगन और सब्र की

सुद्रढ़  नीव से बनाओ

जो आसानी से नहीं टूटे

जीवन भर चैन से रहने दे

समय की तेज़ हवाएं

भाग्य की लहरें

कुछ बिगाड़ ना सके

निश्चिंतता से सो सको

पर कभी

बात नहीं मानी उसने

निरंतर रेत के घरोंदे से

सपनों पर विश्वास

करता रहा

शीघ्र पाने की इच्छा में

उतावलापन दिखाता  रहा

जीवन भर

बेघर और असंतुष्ट रहा

असंतुष्ट ही

संसार से विदा हुआ

Dr. Rajendra Tela

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रेत के घरोंदे

 

 

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