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Hindi Corner -
Hindi kavita
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Saturday, 26 November 2011 00:00 |
मन दीवाना
कोई नजर नहीं आता जब जाने किससे बतियाता है, मन को दीवाना कहने का पूरा-पूरा हक है हमको !
कोई दुःख देने वाला जब दूर-दूर तक नजर न आये, केले के पत्ते सा कांपे जाने क्या खलिश है इसको !
दुनिया अपनी राह चल रही रोती हो या हंसती खुद पर, मन जाने किस भोले पन में जाने इसका कारण खुद को !
वार्तालाप चला करता है निशदिन जाने किसके साथ, भूत, भविष्य माया दोनों दे डाला है खुद को किसको !
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