Username:  Password:        Forgot Password? Username?   |   Register
Banner

Hasya Hindi Kavita -- खर्राटे पर कविता PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 26 November 2011 05:22

अनकही बातें--खर्राटे

रजनी की नीरवता में स्तब्ध मौन  सब
और नींद से बेसुध सी तुम, सोयी रहती  तब
तुम्हारे नथुनों से लय मय  तान निकलती
कैसे कह दूं कि तुम हो खर्राटे    भरती
दिल के कुछ अरमान पूर्ण जो ना हो पाते
वो रातों में है सपने बन कर के आते
उसी तरह  बातें जो दिन भर  ना कह पाती
तुम्हारे  खर्राटे बन कर  बाहर  आती
बातों का अम्बार दबा जो मन के अन्दर
मौका मिलते उमड़ उमड़ आता है बाहर
इतनी जल्दी जल्दी बाहर आती बातें
साफ़ सुनाई ना देती, लगती खर्राटे
दिन  की सारी घुटन निकल बाहर आती है
मन होता है शांत,नींद गहरी आती है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

क्या आप भी कवि हैं ?? अपनी रचनाएँ इ-मेल करें " mypost@catchmypost.com" पर  |

Hindi Hasya Kavita

खर्राटे पर कविता

 

Like and Comment

Share on Myspace
Banner

Share This Page

Some Online Users

2 users and 887 guests online

Activities
X
Please Login
Chat
X
Please login to be able to chat.
Activities
Chat (0)