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कविता बसंत PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Friday, 03 February 2012 07:33

बनन में बागन में

बगरयो बसंत है |

खेतन,खलिहानन में

फागुनी उमंग है ||

 

फूटी अमराइयों में

बासंती सुगंध है |

गुनगुन गुंजाता

आम्रकुंजों में अनंग है ||

चम्पा और चमेली ने

कलियाँ चटकाई हैं |

टेसू और पलाश ने

आग लगाईं है ||

 

गाँवों ढाणियों की डगर

फूलों का लिबास है |

पर्वतों मैदानों में

सेमल अमलतास है ||

 

बसंत महीने में

पवन पगलाई है |

प्रकृति बंजारिन बनी

मस्ती भरी रंगत छाई है ||

Mohini Chordia

 

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