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Hindi Kavita
हिंदी कविता- ज़माना ख़ुद सही होता, तो बदल जाते हम.. PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Friday, 20 January 2012 12:40

हिंदी कविता

तू झूठ ही सही, कहता तो, बहल जाते हम,
ज़हर ही देता, तू देता तो, निगल जाते हम..

बड़ा ही सर्द रवैया रहा, तेरा हम से,
ज़रा सी गर्म-दिली से, क्या उबल जाते हम..

तू ही कहता था कि पत्थर हो, तो मज़बूत रहे,
जो तू कह देता हमें मोम, पिघल जाते हम..

तू बाहें खोल खड़ा होता, पार शोलों के,
हाँ चले जाते हम, चाहे तो जल जाते हम..

 
जैसे कोई द्वार खुला हो PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Thursday, 15 December 2011 18:34


भीतर-बाहर, सभी दिशा में
बरस रहा वह झर-झर, झर-झर,
पुलक उठाता, होश जगाता
भरता अनुपम जोश निरंतर !

जैसे कोई द्वार खुला हो
आज अमी की वर्षा होती,
आमन्त्रण दे मुक्त गगन भी
अंतर सहज ही रहे भिगोती !

रंचमात्र भी भेद नहीं है
जल से जल ज्यों मिल जाता है,
फूट गयीं दीवारें घट की
दौड़ा सागर भर जाता है !

 
तेरे सिवा कोई और कहाँ है PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Monday, 12 December 2011 10:20


बन जाऊँ मैं तेरी बांसुरी
तेरे गीतों को जन्माऊँ,
तू ही झलक-झलक जाये फिर
मन दर्पण को यूँ चमकाऊँ !

प्रस्तर में ज्यों छिपी मूर्ति
शिल्पी की आँखें लख लेतीं,
इस महा अस्तित्त्व में कान्हा
निरख-निरख शुभ दर्शन पाऊँ !

कण-कण में जो गूंज रहा सुर
उर में ही झंकृत कर पाऊँ,
हवा, धूप, आकाश, अनल सा
निकट सदा पा तुझको ध्याऊँ !

 
ये पागलपन है मेरा PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Monday, 12 December 2011 10:15


हम इस पाखंडी दुनिया से अक्सर दूर दूर से रहते हैं,
जो मन में आता उल्टा सीधा ज़ोर ज़ोर से कहते हैं,
ये बेढंगापन है मेरा,
स्वीकार करो तो कर लो,
नहीं तो खुशकिस्मत हैं हम,
अक्सर हँसते गाते रहते हैं।

हम चलते हैं अपनी राहों पर पदचिन्ह न सम्मुख रखते हैं,
मंजिल मिले, मिले न फिर भी, मर्यादित बढ़ते रहते हैं,
ये आवारापन है मेरा,
चुनना चाहो तो चुन लो,
नहीं तो मनमौजी हैं हम,

 
चाँद पर कविता - ऐ चाँद सुंनो PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Sunday, 11 December 2011 13:00

 

चाँद पर कविता


'' ऐ चाँद सुनो , कुछ बात करो'' ,

'' तेरी बात चले मेरी रात कटे '' ,


'' तुम बात करो उस बस्ती की'' ,

'' बादल , बारिश और मस्ती की''  ,


'' यां बात करो उस बंधन की'' ,

'' पायल चूड़ी और कंगन की'' ,

 
कभी धूप-कभी छाँव PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Sunday, 04 December 2011 09:19


कभी छाँव है,कभी धूप है
जीवन का ये ही स्वरूप है
पग पग हमें दिग्भ्रमित करती,
मृग तृष्णा ये तो अनूप है
कभी गेंद से टप्पा खाते,
छूकर धरा ,पुनह उठ जाते
कभी  सहारा लिए डोर का,
बन पतंग ऊपर लहराते
कभी हवा के रुख के संग हम,
सूखे पत्ते से उड़ते है
कभी जुदाई की पीड़ा है,
कभी नये रिश्ते जुड़ते है
इस जीवन में,हर एक क्षण में,
होते अनुभव खट्टे,मीठे
फेंका कीचड में जो पत्थर,
तो तुम तक  आते हैं छींटे
कभी फूल है,कांटे भी है,

 
विश्व विकलांग दिवस पर कविता PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 03 December 2011 07:30

विश्व विकलांग दिवस पर मृणाल ज्योति के बच्चों को समर्पित कविता

वे बाधाग्रस्त हैं
अपूर्ण हैं
किन्तु केवल देह के तल पर,
मन और आत्मा से वे भी पूर्ण हैं
हम आप ही की तरह..

कभी वे बोल नहीं सके
सुन पाने में असमर्थ रहे
कभी नाकाबिल चल पाने में
मन की मन में रखने को विवश रहे  !

 
बरसात पर कविता PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 03 December 2011 00:00

हिंदी कविता बरसात

हरी भरी वादी में
लगी ज़ोर की आग
मन में सोचा
जाने होगा क्या हाल ।
फिर ज़ोर से चली हवा
हुआ आसमान स्याह
उमड़ घुमड़ बादल बरसा
सरसा सब संसार |
बरस-बरस जब बादल हुआ उदास
मैंने जब देखा तब पाया

 
रब भीतर तू बिछड़ा था कब PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 03 December 2011 00:00


तोड़ दीं बेडियाँ मैंने सब
अब ना तू चाहिए, न ही रब,
तज कर इस तलाश को जाना
रब भीतर तू बिछड़ा था कब !

चाह मात्र ही दीवार थी
नाहक जिंदगी दुश्वार थी,
मुक्त पखेरू की मानिंद था
चाहत ही लटकी कटार थी !

 
हिंदी कविता - बैठ जाइए बैठ जाइए PDF Print Write e-mail
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Friday, 02 December 2011 13:42

हिंदी कविता - बैठ जाइए बैठ जाइए (आम आदमी पार्ट २)


यदि आप ने मीरा कुमार को लोकसभा में सुना हो तो, पढ़िए आम आदमी का दर्द :-

बैठ जाइए बैठ जाइए बैठ जाइए
इस देश को हम कभी, खड़ा होने नहीं देंगे
जिन्दा लाश बना देंगे, आम जन को
किसी को कब्र में भी चैन से सोने नहीं देंगे |
बैठ जाइए बैठ जाइए बैठ जाइए ||

आप बैठते है तो ,पेट्रोल ऊँचा चड़ता है
आरक्षण का आक्रोश बड़ता है
सरकारी गोदामों में अनाज सड़ता है
भूख से बिलख के आम आदमी मरता है |

 
ग़ज़ल - तकियों से क्या करें दोस्ती. PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Friday, 02 December 2011 00:00

ग़ज़ल

तकियों से क्या करें दोस्ती,आये पास सुला देतें है
शीशे के प्याले अच्छे है,भर कर जाम,पिला देते है
बहुत मुश्किलें,जीवनपथ पर,पत्थर,कंकर है,कांटे है,
पर जूते है सच्चे साथी,रास्ता पार करा देते है
एक बार जो तप जाए तो,बहुत उबाल दूध में आता,
लेकिन चंद दही के कतरे,सारा दूध जमा देते है
अरे इश्क करने वालों का,ये तो है दस्तूर पुराना,
मालुम है कलाई थामेंगे,बस ऊँगली पकड़ा देते है
दो बुल (bull )अगर प्यार से मिलते,बन जाते नाज़ुक बुलबुल से,

 
हिंदी कविता - हम से जो बेवफाई कर ली PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Wednesday, 30 November 2011 10:02

हिंदी कविता

हम से जो बेवफाई कर ली,
अब न करना किसी और से,
सोच लेना, मिले जो थोड़ी फुरसत,
करना अब सफाई से,

हर कोई यूँ, मजबूर नहीं होता,
जिन्दगी में मशगूल नहीं होता,
वक्त देगा तुझे, तेरे लिए,
तू बन्जा बस उसके लिए,

 
मार्मिक हास्य कविता - कैसे कहूं उनसे ? PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Wednesday, 30 November 2011 00:00

(मार्मिक  -हास्य )

कैसे कहूं उनसे ?
बगीचे में
रोज़ क्यों नहीं आती
क्यों कई दिन बाद
झलक अपनी दिखलाती
जब भी उन्हें देखता
मन करता
दौड़ कर गले से
लग जाऊं
कैसे अहसास दिलाऊँ ?
उनका यूँ
कई कई दिन तक

 
राजस्थान पर कविता - मेरा राजस्थान PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Tuesday, 29 November 2011 00:00

धोरों का,महलों का ,मेरा राजस्थान

वीरों का,अलबेलों का
धोरों का,महलों का
मेरा राजस्थान
मेलों का,त्योहारों का
रंग रंगीला राजस्थान
जंतर मंतर, आमेर
बढाए जयपुर की शान
सूर्यनगरी जोधपुर
मारवाड़ की आन
झीलों की नगरी उदयपुर

 
Hindi Kavita PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Monday, 28 November 2011 00:00

Hindi Kavita मैंने भी सपना देखा था

मैंने भी सपना देखा था
कोई मुझे भी मिल जाए  
अपना जिसे कह सकूँ  
साथ हँसू ,साथ घूमूँ
हाथ में हाथ डाल के
छोटा सा संसार हो मेरा
स्वछन्द जिसमें रह सकूँ
खुशी से जी सकूँ

 
रास्ते अलग क्यों थे ? PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Sunday, 27 November 2011 00:00


दोनों मित्र  थे
एक यीशु मसीह को
मानता
चर्च जाता
दूसरा राम-क्रष्ण को
मानता
मंदिर जाता
दोनों निरंतर
इमानदारी से कर्म करते
निश्छल निष्कपट
जीवन जीते
थोड़े अंतराल में
दोनों का निधन हुआ

 
Hindi Poem on 26/11 Mumbai attack PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 26 November 2011 07:55

लो फिर आ गयी छब्बीस बटा ग्यारह..........अब तो कुछ शर्म कर लो

26 / 11 मुंबई हमले पर कविता

लो फिर आ गयी
छब्बीस बटा ग्यारह
एक दिन का शोर शराबा
फिर वो ही मंजर पुराना
सब कुछ भुला देना
चादर तान के सो जाना
क्या फर्क पड़ता है
मासूमों की जान गयी

 
Hasya Hindi Kavita -- खर्राटे पर कविता PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 26 November 2011 05:22

अनकही बातें--खर्राटे

रजनी की नीरवता में स्तब्ध मौन  सब
और नींद से बेसुध सी तुम, सोयी रहती  तब
तुम्हारे नथुनों से लय मय  तान निकलती
कैसे कह दूं कि तुम हो खर्राटे    भरती
दिल के कुछ अरमान पूर्ण जो ना हो पाते
वो रातों में है सपने बन कर के आते
उसी तरह  बातें जो दिन भर  ना कह पाती
तुम्हारे  खर्राटे बन कर  बाहर  आती

 
हास्य कविता - हँसमुखजी का ज्योतिष प्रेम PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 26 November 2011 00:00

हास्य कविता

हँसमुखजी
ज्योतिष के बारे में
कुछ नहीं जानते थे
पहली बार
ज्योतिषी के पास जन्म पत्री
दिखाने गए
जन्मपत्री देखते ही
ज्योतिषी बोला
आपकी मंगल बहुत भारी है
कन्या के घर में नीच का

 

 
आवाज पर कविता - मेरी आवाज PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 26 November 2011 00:00

मेरी आवाज


मैं खोना नहीं चाहता अपनी आवाज,
एहसानों के नीचे क्यूँ दबाते हो मुझे?

सिद्दत से बेहद चाहा है हमने तुमको,
खुद ही कमजोर क्यूँ बनाते हो मुझे?

हमें पता है तुमने भुला दिया है हमें,
अब खुद याद आ क्यूँ सताते हो मुझे?

 
मन पर कविता - मन दीवाना PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Saturday, 26 November 2011 00:00

मन दीवाना

कोई नजर नहीं आता जब
जाने किससे बतियाता है,
मन को दीवाना कहने का
पूरा-पूरा हक है हमको !

कोई दुःख देने वाला जब
दूर-दूर तक नजर न आये,
केले के पत्ते सा कांपे
जाने क्या खलिश है इसको !

 
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