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महात्मा गाँधी पर कविता - तड़प रहा गांधी का अंतस PDF Print Write e-mail
Hindi Corner - Hindi kavita
Friday, 26 August 2011 02:05

तड़प रहा गांधी का अंतस,
आज देश का हाल देखकर.
क्या मेरी वह राह गलत थी,
पायी थी आजादी चलकर?

रोक लगी क्यों सत्याग्रह पर,
अनशन हुआ गैर कानूनी?
भ्रष्ट लोग गद्दी पर जब हों,
न्याय, सत्य होते बेमानी.

नहीं किया संघर्ष था मैंने,
ऐसी  आज़ादी  पाने को.
अपना स्वार्थ हुआ सर्वोपरि,
भूल गए हैं जन सेवा को.


गर्व मुझे कुछ जन अब भी,
चलते  हैं मेरे  रस्ते पर.
जो बनते हैं मेरे वारिस,
भूल गये मेरी शिक्षा पर.

अब मेरी तस्वीर हटा दो,
दफ़्तर की दीवारों से तुम.
झुक जाती हैं मेरी नज़रें,
काले कार्य देखकर हरदम.

Kailash C Sharma

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